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Noida News: महिला की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज
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(अदालत से)
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि यदि ट्रायल के दौरान किसी की संलिप्तता के पर्याप्त और ठोस साक्ष्य सामने आते हैं तो उसे धारा 319 सीआरपीसी (अब बीएनएसएस के समकक्ष प्रावधान) के तहत मुकदमे में तलब किया जा सकता है। भले ही उसका नाम एफआईआर या पुलिस विवेचना में शामिल न रहा हो। इसी आधार पर अदालत ने दनकौर के 2021 के आपराधिक मामले में तलब की गई महिला संतरा की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।
याचिका में महिला ने कहा था कि उसका नाम न तो एफआईआर में था और न ही विवेचना के दौरान दर्ज गवाहों के बयान में आया। उसने यह भी तर्क दिया कि वह घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थी और उसे पुरानी रंजिश और क्रॉस केस में फंसाया गया है। याचिका में यह भी कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने बिना पर्याप्त आधार के उसे अन्य आरोपियों के साथ तलब कर लिया। हालांकि, रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद पाया गया कि ट्रायल के दौरान मुख्य गवाह ने शपथ पर दिए बयान में संतरा की भूमिका का स्पष्ट उल्लेख किया था। ब्यूरो
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ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि यदि ट्रायल के दौरान किसी की संलिप्तता के पर्याप्त और ठोस साक्ष्य सामने आते हैं तो उसे धारा 319 सीआरपीसी (अब बीएनएसएस के समकक्ष प्रावधान) के तहत मुकदमे में तलब किया जा सकता है। भले ही उसका नाम एफआईआर या पुलिस विवेचना में शामिल न रहा हो। इसी आधार पर अदालत ने दनकौर के 2021 के आपराधिक मामले में तलब की गई महिला संतरा की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।
याचिका में महिला ने कहा था कि उसका नाम न तो एफआईआर में था और न ही विवेचना के दौरान दर्ज गवाहों के बयान में आया। उसने यह भी तर्क दिया कि वह घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थी और उसे पुरानी रंजिश और क्रॉस केस में फंसाया गया है। याचिका में यह भी कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने बिना पर्याप्त आधार के उसे अन्य आरोपियों के साथ तलब कर लिया। हालांकि, रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद पाया गया कि ट्रायल के दौरान मुख्य गवाह ने शपथ पर दिए बयान में संतरा की भूमिका का स्पष्ट उल्लेख किया था। ब्यूरो
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