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कोड बताने पर होती थी हथियारों की तस्करी
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हथियारों की तस्करी में चार के गिरफ्तार होने का मामला: साइड स्टोरी
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हेडिंग: कोड बताने पर होती थी हथियारों की तस्करी, डिलीवरी के बाद तोड़ते थे मोबाइल-सिम
हर डिलीवरी से पहले आरोपी चुराते थे एक बाइक, बाद में छोड़ देते थे लावारिस
हथियार तस्करी के दौरान मास्क-हेलमेट का करते थे प्रयोग
मनोज कुमार
नोएडा। पुलिस की गिरफ्त में आए बदमाश चार साल से हथियारों की तस्करी कर रहे थे। तस्करी के लिए चोरी की बाइक और फर्जी तरीके से मिले मोबाइल सिम का इस्तेमाल करते थे। प्रत्येक डिलीवरी से पहले ही बाइक चुराई जाती थी और डिलीवरी के तत्काल बाद उसे लावारिस छोड़ दिया जाता था। सिम और मोबाइल को भी आरोपी तोड़कर नष्ट कर देते थे। हथियार सप्लाई से पहले ही ऑनलाइन प्लेटफार्म पर ग्राहक को एक कोड बताया जाता था। कोड बताने पर ही हथियार दिया जाता था। सप्लाई देने के दौरान आरोपी खुद का चेहरा मास्क और हेलमेट से कवर करके रखते थे।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह माह में दो बार भिंड-मुरैना और दो बार कानपुर देहात जाते थे। जबकि मुंगेर से जो पिस्टल आती थीं, उन्हें कानपुर तक मंगाया जाता था। वहां से दूसरा व्यक्ति हथियार लेकर आता था। आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए विशेष रूप से एहतियात बरतते थे। एक स्थान पर एक ही व्यक्ति जाता था, दूसरी बार मिलना होता था तो दूसरा जाता था। इससे पहले खरीदार को एक कोड दिया जाता था। जब भी मीटिंग होती थी तो कोड पूछकर ही आगे बात की जाती थी। डिलीवरी होने के बाद जब सप्लायर कुछ दूर जाता तो उस बाइक को वहीं छोड़ देता था और मोबाइल फोन व उसके सिम को कुछ दूरी पर ले जाकर तोड़ देता था।
एनसीआर के विकसित क्षेत्र में अधिक है हथियारों की मांग
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि अभी तक एनसीआर में करीब 18 लोगों को आरोपी हथियार सप्लाई कर चुके हैं। इनमें ज्यादातर युवा हैं। एक से दूसरे से तीसरे तक कई लोगों की चेन बन गई थी। इसके बाद वह एक ही व्यक्ति से संपर्क में थे, लेकिन न तो वह उसे जानते हैं और न ही युवक बदमाशों के बारे में जानता था। हर बार सप्लाई करने के लिए अलग-अलग स्थानों को चिह्नित किया जाता था। डिलीवरी की जगह का चयन बदमाश खुद करते थे। एनसीआर के विकसित क्षेत्र में हथियारों की अधिक मांग है।
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खोड़ा और दिल्ली में किराये के कमरों में था ठिकाना
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने एक कमरा खोड़ा में किराये लेने की बात बताई है, जबकि दिल्ली के गोकलपुरी के पास भी एक कमरा किराये पर ले रखा था। दिल्ली में डिलीवरी करके वहीं पर ठहर जाते थे। नोएडा-गाजियाबाद में सप्लाई करने के बाद खोड़ा के कमरे पर रात में ठहर जाते थे।
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पुलिस अभी इनके उस नेटवर्क की तलाश कर रही है, जिनसे यह हथियार खरीदते थे। इनके अलावा जिले में कितने लोगों को हथियार बेचे गए हैं और कहां-कहां पर डिलीवरी दी थी। इन भी पहलुओं की जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों को रिमांड पर लाकर फिर से पूछताछ की जाएगी, ताकि अवैध हथियार तस्करी के गिरोह को पकड़ा जा सके।
- हरीश चंदर, डीसीपी सेंट्रल जोन
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हेडिंग: कोड बताने पर होती थी हथियारों की तस्करी, डिलीवरी के बाद तोड़ते थे मोबाइल-सिम
हर डिलीवरी से पहले आरोपी चुराते थे एक बाइक, बाद में छोड़ देते थे लावारिस
हथियार तस्करी के दौरान मास्क-हेलमेट का करते थे प्रयोग
मनोज कुमार
नोएडा। पुलिस की गिरफ्त में आए बदमाश चार साल से हथियारों की तस्करी कर रहे थे। तस्करी के लिए चोरी की बाइक और फर्जी तरीके से मिले मोबाइल सिम का इस्तेमाल करते थे। प्रत्येक डिलीवरी से पहले ही बाइक चुराई जाती थी और डिलीवरी के तत्काल बाद उसे लावारिस छोड़ दिया जाता था। सिम और मोबाइल को भी आरोपी तोड़कर नष्ट कर देते थे। हथियार सप्लाई से पहले ही ऑनलाइन प्लेटफार्म पर ग्राहक को एक कोड बताया जाता था। कोड बताने पर ही हथियार दिया जाता था। सप्लाई देने के दौरान आरोपी खुद का चेहरा मास्क और हेलमेट से कवर करके रखते थे।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह माह में दो बार भिंड-मुरैना और दो बार कानपुर देहात जाते थे। जबकि मुंगेर से जो पिस्टल आती थीं, उन्हें कानपुर तक मंगाया जाता था। वहां से दूसरा व्यक्ति हथियार लेकर आता था। आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए विशेष रूप से एहतियात बरतते थे। एक स्थान पर एक ही व्यक्ति जाता था, दूसरी बार मिलना होता था तो दूसरा जाता था। इससे पहले खरीदार को एक कोड दिया जाता था। जब भी मीटिंग होती थी तो कोड पूछकर ही आगे बात की जाती थी। डिलीवरी होने के बाद जब सप्लायर कुछ दूर जाता तो उस बाइक को वहीं छोड़ देता था और मोबाइल फोन व उसके सिम को कुछ दूरी पर ले जाकर तोड़ देता था।
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एनसीआर के विकसित क्षेत्र में अधिक है हथियारों की मांग
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि अभी तक एनसीआर में करीब 18 लोगों को आरोपी हथियार सप्लाई कर चुके हैं। इनमें ज्यादातर युवा हैं। एक से दूसरे से तीसरे तक कई लोगों की चेन बन गई थी। इसके बाद वह एक ही व्यक्ति से संपर्क में थे, लेकिन न तो वह उसे जानते हैं और न ही युवक बदमाशों के बारे में जानता था। हर बार सप्लाई करने के लिए अलग-अलग स्थानों को चिह्नित किया जाता था। डिलीवरी की जगह का चयन बदमाश खुद करते थे। एनसीआर के विकसित क्षेत्र में हथियारों की अधिक मांग है।
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खोड़ा और दिल्ली में किराये के कमरों में था ठिकाना
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने एक कमरा खोड़ा में किराये लेने की बात बताई है, जबकि दिल्ली के गोकलपुरी के पास भी एक कमरा किराये पर ले रखा था। दिल्ली में डिलीवरी करके वहीं पर ठहर जाते थे। नोएडा-गाजियाबाद में सप्लाई करने के बाद खोड़ा के कमरे पर रात में ठहर जाते थे।
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पुलिस अभी इनके उस नेटवर्क की तलाश कर रही है, जिनसे यह हथियार खरीदते थे। इनके अलावा जिले में कितने लोगों को हथियार बेचे गए हैं और कहां-कहां पर डिलीवरी दी थी। इन भी पहलुओं की जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों को रिमांड पर लाकर फिर से पूछताछ की जाएगी, ताकि अवैध हथियार तस्करी के गिरोह को पकड़ा जा सके।
- हरीश चंदर, डीसीपी सेंट्रल जोन