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अब तक नहीं लगे टीके, खतरे में 73 हजार नौनिहालों का स्वास्थ्य
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नोएडा। जिले में 12 वर्ष से अधिक उम्र के हर दूसरे बच्चे पर कोरोना संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। इन बच्चों को अब तक वैक्सीन का सुरक्षा कवच नहीं मिला है। आलम यह है कि शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के बीच तालमेल के अभाव में जिले के 100 से ज्यादा निजी स्कूलों के करीब 73 हजार बच्चों का टीकाकरण नहीं हो पाया है, जबकि जिले में बच्चों की संक्रमण दर 10 फीसदी से ज्यादा पहुंच गई है।
मंगलवार को जिले में 43 नए कोरोना संक्रमित मरीज मिले, इनमें बच्चों की संख्या छह दर्ज की गई। संक्रमण का खतरा टला नहीं है और स्कूलों में लापरवाही बरती जा रही है। ज्यादातर स्कूल में कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा है। संक्रमण से बचाव के लिए देशभर में बच्चों के टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन गौतमबुद्ध नगर में 1.85 लाख में 13,981 को पहली और 58,997 को दूसरी डोज नहीं लगी है। 15 से 17 वर्ष आयु के बच्चों का टीकाकरण मार्च में ही पूरा हो जाना चािहए था जो अब तक नहीं हो सका है।
आखिर लापरवाह कौन
शिक्षा विभाग का तर्क: जिला विद्यालय निरीक्षक धर्मवीर सिंह ने बताया कि सरकारी स्कूलों के अधिकांश बच्चों का टीकाकरण हो गया है। निजी स्कूलों के बच्चे काफी संख्या में रहते हैं। इसकी वजह समय पर स्कूलों को टीकाकरण शिविर की जानकारी नहीं मिल पाना है। कई स्कूलों से शिकायत मिली है कि टीकाकरण से एक दिन पहले जानकारी दी जाती है। अभिभावकों तक जानकारी पहुंचना संभव नहीं हो पाता। बिना अभिभावकों की अनुमति बच्चों को वैक्सीन नहीं लगाई जा सकती।
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स्वास्थ्य विभाग का तर्क: मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि टीकाकरण कार्यक्रम बनाकर चार से पांच दिन पहले ही शिक्षा विभाग को भेज दिया जाता है। स्कूलों को सूचित करने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की भी बनती है। गर्मी की छुट्टियों के बाद सात जुलाई को स्कूलों में पहला टीकाकरण अभियान चलाया जाना था, जिसकी जानकारी दो जुलाई को ही शिक्षा विभाग को दी गई थी। अब हमारी तरफ से भी स्कूलों को सूचित किया जा रहा है।
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कोताही न बरतने के निर्देश
जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने बताया कि शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के बीच तालमेल के अभाव की शिकायत मिली थी। दोनों ही विभागों को बच्चों के टीकाकरण में किसी तरह की कोताही न बरतने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। अभिभावकों में भी बच्चों के टीकाकरण के प्रति हिचकिचाहट की स्थिति देखी जा रही है। हम लगातार टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
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मंगलवार को जिले में 43 नए कोरोना संक्रमित मरीज मिले, इनमें बच्चों की संख्या छह दर्ज की गई। संक्रमण का खतरा टला नहीं है और स्कूलों में लापरवाही बरती जा रही है। ज्यादातर स्कूल में कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा है। संक्रमण से बचाव के लिए देशभर में बच्चों के टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन गौतमबुद्ध नगर में 1.85 लाख में 13,981 को पहली और 58,997 को दूसरी डोज नहीं लगी है। 15 से 17 वर्ष आयु के बच्चों का टीकाकरण मार्च में ही पूरा हो जाना चािहए था जो अब तक नहीं हो सका है।
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आखिर लापरवाह कौन
शिक्षा विभाग का तर्क: जिला विद्यालय निरीक्षक धर्मवीर सिंह ने बताया कि सरकारी स्कूलों के अधिकांश बच्चों का टीकाकरण हो गया है। निजी स्कूलों के बच्चे काफी संख्या में रहते हैं। इसकी वजह समय पर स्कूलों को टीकाकरण शिविर की जानकारी नहीं मिल पाना है। कई स्कूलों से शिकायत मिली है कि टीकाकरण से एक दिन पहले जानकारी दी जाती है। अभिभावकों तक जानकारी पहुंचना संभव नहीं हो पाता। बिना अभिभावकों की अनुमति बच्चों को वैक्सीन नहीं लगाई जा सकती।
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स्वास्थ्य विभाग का तर्क: मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि टीकाकरण कार्यक्रम बनाकर चार से पांच दिन पहले ही शिक्षा विभाग को भेज दिया जाता है। स्कूलों को सूचित करने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की भी बनती है। गर्मी की छुट्टियों के बाद सात जुलाई को स्कूलों में पहला टीकाकरण अभियान चलाया जाना था, जिसकी जानकारी दो जुलाई को ही शिक्षा विभाग को दी गई थी। अब हमारी तरफ से भी स्कूलों को सूचित किया जा रहा है।
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कोताही न बरतने के निर्देश
जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने बताया कि शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के बीच तालमेल के अभाव की शिकायत मिली थी। दोनों ही विभागों को बच्चों के टीकाकरण में किसी तरह की कोताही न बरतने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। अभिभावकों में भी बच्चों के टीकाकरण के प्रति हिचकिचाहट की स्थिति देखी जा रही है। हम लगातार टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।