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जिले में प्रतिबंध के बावजूद प्लास्टिक का हो रहा प्रयोग
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जिले में प्रतिबंध के बावजूद प्लास्टिक का हो रहा प्रयोग
नूंह। पॉलिथीन और प्लास्टिक के प्रयोग पर रोक को सख्ती से लागू करने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार लगातार मुहिम छेड़े हुए हैं लेकिन बावजूद इसके मेवात इलाके में प्रशासन ढिलाई बरते हुए है। इसकी बानगी इलाके में कई स्थानों पर देखने को मिल सकती है जहां धड़ल्ले से पॉलिथीन और प्लास्टिक का प्रयोग किया जा रहा है। पॉलिथीन में सब्जियों और अनाजों की बिक्री खुलेआम हो रही है लेकिन स्थानीय प्रशासन इस पर रोक लगाने के लिए अभियान नहीं चला रहा है। हालांकि जिले में कई बार खानापूर्ति के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं लेकिन इन अभियानों का कोई असर नहीं दिख रहा है।
दरअसल, प्रदूषण को देखते हुए सरकार द्वारा बीते वर्ष 2019 में दो अक्तूबर से सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया हुआ है। सरकार का मकसद वर्ष 2022 तक देश को पॉलिथीन मुक्त बनाने का है। प्लास्टिक के जिन उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा, उनमें प्लास्टिक बैग, कप, प्लेट, छोटी बोतल, प्लास्टिक स्ट्रा और कुछ टाइप की पैकिंग प्लास्टिक है। लेकिन जिले में प्रशासनिक स्तर पर इस पर बैन लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठा पाया है। नूंह शहर में पॉलीथिन के प्रयोग के कारण जोगीपुर रोड, नलहड रोड, होडल रोड कूड़े से अटे हुए हैं। वहीं नाले-नालियां में पॉलिथीन की भरमार है। सरकार ने भले ही पॉलिथीन के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। लेकिन प्रशासन के ढुलमुल रवैये के चलते दुकानदार व आमजन पॉलिथीन व प्लास्टिक का मोह त्याग नहीं पा रहे हैं। प्रशासन की उदासीनता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है, दुकानदारों से लेकर चाय और परचून की बड़ी दुकानों तक पॉलिथीन का प्रयोग हो रहा है। इसी का नतीजा है कि जिले के शहरी क्षेत्रों में जल निकासी के लिए पॉलिथीन अभिशाप बन चुकी है। नाले नालियां पॉलिथीन से अटकने के कारण जल-निकासी व्यवस्था चौपट है।
कई बार चल चुका है अभियान
पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने की जिम्मेदारी नगरपालिका, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अफसरों के साथ ही जिलाधिकारियों को दी गई है। सरकार के आदेश के बाद कई बार खानापूर्ति के लिए गांवों व शहरों में अभियान चलाए गए जो बेअसर रहे। कई बार नूंह शहर के साथ तावडू, फिरोजपुर झिरका व पुन्हाना में दुकानदारों पर कार्रवाई हो चुकी है। लेकिन इस सबके बाद भी पॉलिथीन का प्रयोग बंद नहीं हो सका है। अभियानों में नूंह के साथ अन्य कस्बों में कई बार लोगों पर लाखों रुपये का जुर्माना लगा।
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लाखों रुपये होते है जागरूकता पर खर्च
केंद्र व प्रदेश सरकार के स्वच्छता अभियान को सिरे चढ़ाने के लिए नगरपालिकाओं व ग्राम पंचायतों के लोगों को जागरूक करने के लिए लाखों रुपये खर्च किए जाते है, इसके लिए प्रशासन द्वारा होर्डिंग, पोस्टर व टैंट लगाकर ग्रामीणों को जागरूक करता है। लेकिन जिले में इस अभियान का रिजल्ट अभी शून्य दिख रहा है। जिससे सरकार द्वारा इन अभियानों में खर्च किए गए पैसे पानी में मिल रहे हैं।
यह भी एक मुख्य कारण
नूंह जिले में प्लास्टिक अपशिष्ट के मैनेजमेंट का कोई सिस्टम नहीं है। इसकी वजह से जिले के शहरों और गांवों से बड़ी मात्रा में प्लास्टिक अपशिष्ट निकलता है।
क्या कहते है लोग
हाजी आमीन, आमिर खान बीबीपुर, प्रवीन, गोपाल, ज्ञानचंद आर्य व अहमद मुस्तलहा ने बताया कि सरकार का यह अभियान लोगों के हितों के लिए है, लेकिन जब बाजार में लोगों को दुकानों पर पॉलीथिन मिल जाती है, तो वह उन्हें इस्तेमाल करते हैं। इसलिए बाजारों से पॉलीथिन को पूरी तरह से बैन करना चाहिए। यह सभी के हित से जुड़ा मामला है।
सरकार के इस अभियान को सिरे चढ़ाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। इस मामले में संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट ली जाएगी। पॉलीथिन व प्लास्टिक को जिले से पूरी तरह से मुक्त किया जाएगा।
पंकज कुमार, उपायुक्त नूंह।
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नूंह। पॉलिथीन और प्लास्टिक के प्रयोग पर रोक को सख्ती से लागू करने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार लगातार मुहिम छेड़े हुए हैं लेकिन बावजूद इसके मेवात इलाके में प्रशासन ढिलाई बरते हुए है। इसकी बानगी इलाके में कई स्थानों पर देखने को मिल सकती है जहां धड़ल्ले से पॉलिथीन और प्लास्टिक का प्रयोग किया जा रहा है। पॉलिथीन में सब्जियों और अनाजों की बिक्री खुलेआम हो रही है लेकिन स्थानीय प्रशासन इस पर रोक लगाने के लिए अभियान नहीं चला रहा है। हालांकि जिले में कई बार खानापूर्ति के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं लेकिन इन अभियानों का कोई असर नहीं दिख रहा है।
दरअसल, प्रदूषण को देखते हुए सरकार द्वारा बीते वर्ष 2019 में दो अक्तूबर से सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया हुआ है। सरकार का मकसद वर्ष 2022 तक देश को पॉलिथीन मुक्त बनाने का है। प्लास्टिक के जिन उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा, उनमें प्लास्टिक बैग, कप, प्लेट, छोटी बोतल, प्लास्टिक स्ट्रा और कुछ टाइप की पैकिंग प्लास्टिक है। लेकिन जिले में प्रशासनिक स्तर पर इस पर बैन लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठा पाया है। नूंह शहर में पॉलीथिन के प्रयोग के कारण जोगीपुर रोड, नलहड रोड, होडल रोड कूड़े से अटे हुए हैं। वहीं नाले-नालियां में पॉलिथीन की भरमार है। सरकार ने भले ही पॉलिथीन के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। लेकिन प्रशासन के ढुलमुल रवैये के चलते दुकानदार व आमजन पॉलिथीन व प्लास्टिक का मोह त्याग नहीं पा रहे हैं। प्रशासन की उदासीनता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है, दुकानदारों से लेकर चाय और परचून की बड़ी दुकानों तक पॉलिथीन का प्रयोग हो रहा है। इसी का नतीजा है कि जिले के शहरी क्षेत्रों में जल निकासी के लिए पॉलिथीन अभिशाप बन चुकी है। नाले नालियां पॉलिथीन से अटकने के कारण जल-निकासी व्यवस्था चौपट है।
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कई बार चल चुका है अभियान
पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने की जिम्मेदारी नगरपालिका, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अफसरों के साथ ही जिलाधिकारियों को दी गई है। सरकार के आदेश के बाद कई बार खानापूर्ति के लिए गांवों व शहरों में अभियान चलाए गए जो बेअसर रहे। कई बार नूंह शहर के साथ तावडू, फिरोजपुर झिरका व पुन्हाना में दुकानदारों पर कार्रवाई हो चुकी है। लेकिन इस सबके बाद भी पॉलिथीन का प्रयोग बंद नहीं हो सका है। अभियानों में नूंह के साथ अन्य कस्बों में कई बार लोगों पर लाखों रुपये का जुर्माना लगा।
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लाखों रुपये होते है जागरूकता पर खर्च
केंद्र व प्रदेश सरकार के स्वच्छता अभियान को सिरे चढ़ाने के लिए नगरपालिकाओं व ग्राम पंचायतों के लोगों को जागरूक करने के लिए लाखों रुपये खर्च किए जाते है, इसके लिए प्रशासन द्वारा होर्डिंग, पोस्टर व टैंट लगाकर ग्रामीणों को जागरूक करता है। लेकिन जिले में इस अभियान का रिजल्ट अभी शून्य दिख रहा है। जिससे सरकार द्वारा इन अभियानों में खर्च किए गए पैसे पानी में मिल रहे हैं।
यह भी एक मुख्य कारण
नूंह जिले में प्लास्टिक अपशिष्ट के मैनेजमेंट का कोई सिस्टम नहीं है। इसकी वजह से जिले के शहरों और गांवों से बड़ी मात्रा में प्लास्टिक अपशिष्ट निकलता है।
क्या कहते है लोग
हाजी आमीन, आमिर खान बीबीपुर, प्रवीन, गोपाल, ज्ञानचंद आर्य व अहमद मुस्तलहा ने बताया कि सरकार का यह अभियान लोगों के हितों के लिए है, लेकिन जब बाजार में लोगों को दुकानों पर पॉलीथिन मिल जाती है, तो वह उन्हें इस्तेमाल करते हैं। इसलिए बाजारों से पॉलीथिन को पूरी तरह से बैन करना चाहिए। यह सभी के हित से जुड़ा मामला है।
सरकार के इस अभियान को सिरे चढ़ाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। इस मामले में संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट ली जाएगी। पॉलीथिन व प्लास्टिक को जिले से पूरी तरह से मुक्त किया जाएगा।
पंकज कुमार, उपायुक्त नूंह।