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फोनरवा की वार्षिक आम सभा में हंगामा, पुलिस ने निकाला बाहर
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नोएडा। सेक्टर-52 स्थित सामुदायिक केंद्र में रविवार को हुई फेडरेशन ऑफ नोएडा रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (फोनरवा) की वार्षिक आम सभा हंगामेदार रही। बैठक में कुछ पदाधिकारियों के बीच जमकर गाली-गलौच हुई। हालात इस कदर बिगड़े कि पुलिस बुलानी पड़ी। इसके बाद पुलिस सभागार खाली करा लिया। वहीं, आरडब्ल्यूए और फोनरवा पदाधिकारियों ने पुलिसकर्मियों पर अभद्रता व धक्कामुक्की का आरोप लगाया। कुछ देर तक चले हंगामे के बाद बैठक को समाप्त कर दी गई।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई। सबसे पहले मौजूद सभी सदस्यों व पदाधिकारियों ने कोविड संक्रमण से मारे गए लोगों के लिए दो मिनट का मौन रखा। इसके बाद महासचिव केके जैन ने वित्तीय वर्ष 2020-21 का लेखा जोखा प्रस्तुत किया जो सदस्यों ने पारित कर दिया। इसके बाद तय किया गया कि फोनरवा की 2021-23 कार्यकारिणी का चुनाव 1 अगस्त को होगा। चुनाव कराने के लिए रिटायर्ड कर्नल शशि वैध, आशिम कुमार, मदन मोहन, डीके खरबंदा की प्रति नियुक्ति के साथ-साथ वीरेंद्र सिंह नेगी को चुनाव अधिकारी बनाया गया है।
इसके बाद जब कुछ सदस्यों द्वारा लगातार 2 बार चुनाव लड़ने के बाद एक टर्म कूलिंग पीरियड (थोड़े अंतराल) के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू की गई तो हंगामा शुरू हो गया। फोनरवा महासचिव केके जैन ने लोगों को शांत कराया तो सेक्टर-56 के आरडब्ल्यूए महासचिव संजय मावी ने गाली गलौज कर दी। इसे लेकर कई सदस्य नाराज हो गए। लोगों ने कहा कि महासचिव बहुत ही सीधे स्वभाव के हैं उनसे ऐसा व्यवहार निंदनीय है। संजय को उनसे माफ ी मांगनी चाहिए। हालांकि, संजय का कहना है कि उन्होंने किसी को गाली नहीं दी। कुछ लोग गलत आरोप लगा रहे हैं। हमारा व्यवहार सेक्टर में भी ऐसा नहीं है।
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मुख्य सलाहकार के संबोधन के दौरान हुआ विवाद
फोनरवा उपाध्यक्ष संजीव कुमार ने बताया कि बैठक में शहर के 30 सम्मानित अध्यक्ष व महासचिवों ने फ ोनरवा में अध्यक्ष व महासचिव के पद पर लगातार 2 बार चुने हुए पदाधिकारियों पर अगली बार कूलिंग पीरियड लागू करने पर संविधान संशोधन के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव पर जैसे ही चर्चा आरंभ हुई तो मुख्य सलाहकार ऋषिपाल अवाना प्रस्ताव के पक्ष में स्पष्टीकरण देने लगे। प्रस्ताव को पास होता देख फोनरवा के पदाधिकारी द्वारा पूर्व पदाधिकारियों को अपमानित करते हुए शेम-शेम चिल्लाना शुरू कर दिया गया। हंगामे के बीच फोनरवा अध्यक्ष योगेंद्र शर्मा और महासचिव केके जैन मूकदर्शक बने रहे। इस पर सदन ने मंच से निर्णय लिया कि योगेश शर्मा, इसके लिए खेद व्यक्त करें। उन्होंने कहा कि मैं जो चाहूंगा वो कहूंगा। इस पर सदन में जोरदार हंगामा हो गया। ऐसे में अध्यक्ष व महासचिव को सदन की इच्छा के खिलाफ सभा को भंग कर दिया और मंच छोड़कर बाहर चले गए।
पुलिस कार्रवाई से दुखी हुए पदाधिकारी
सभा में जब हंगामा हुआ तो उसे शांत करने के लिए पुलिस को बुलवाया गया। सेक्टर-48 बीसीडी के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष पवन गोयल का आरोप है कि पुलिस ने लोगों की भीड़ देखकर सभा की परमिशन मांगी तो लोग परमिशन दिखाने में असमर्थ लगे। इस पर पुलिस ने उपस्थित अध्यक्षों व महासचिवों को अभद्र शब्द कहे और उन्हें भगाया। कुछ पदाधिकरियों के साथ धक्कामुक्की भी की गई। हंगामा ज्यादा बढ़ने के बाद पुलिस कर्मियों ने सभागार खाली करा लिया। बाहर भी माहौल गर्म रहा और फोनरवा के सभी पदाधिकारी करीब 20 मिनट तक बाहर खडे़ रहे। बिना मास्क वालों का वीडियो बनाया। पुलिस के व्यवहार से सभी आमंत्रित आरडब्ल्यूए अध्यक्ष व महासचिव ने खुद को अपमानित महसूस किया। कुछ आरडब्ल्यूए पदाधिकारी तो बैठक के बाद बिना खाना खाए ही गुस्से में चले गए।
फोनरवा महासचिव केके जैन के साथ जिस तरह का व्यवहार आज सभा में किया गया, अपशब्दों का प्रयोग किया गया अत्यंत निंदनीय है। कुछ लोग फोनरवा पर जबरन कब्जा करना चाहते हैं। शहर के लोग मंसूबा पूरा नहीं होने देंगे। दो साल बेहतरीन काम करने वाली टीम फि र से चुनाव न जीत जाए, इसलिए कुछ लोगों ने हंगामा खड़ा किया। - पवन यादव, सचिव, फ ोनरवा
वार्षिक आम सभा सकुशल संपन्न हुई। महासचिव केके जैन के साथ अभद्र व्यवहार होने के कारण क्षुब्ध हूं। केके जैन कर्मठ और ईमानदार छवि के व्यक्ति हैं। उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया, लेकिन नतीजा उल्टा हुआ। लोगों ने केके जैन की सहनशीलता को अंतर्मन से स्वीकार किया।
- अजय चौरसिया, महासचिव, उद्योग विहार सेक्टर 82ए नोएडा
आमसभा में एक व्यक्ति एक पद पर लगातार दो बार रहने के उपरांत कूलिंग पीरियड वाले नियम को पुन: लागू करने के लिए प्रस्ताव लाया गया था। इस नियम को फोनरवा के मूल बायलॉज में से 2010 में गोपनीय तरीके से हटा दिया गया था जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। जब इस नियम को हटाने का कारण पूछा गया तो उन लोगों ने आक्रोशित होकर हंगामा करना प्रारंभ कर दिया। - योगेश शर्मा, सचिव फोनरवा
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फ ोनरवा बैठक में बुलाकर वरिष्ठ सदस्यों का अपमान किया गया और माफी भी नहीं मांगी। पुलिस द्वारा बार-बार सभी से परमीशन मांगना बहुत दुखद रहा फ ोनरवा की छवि धूमिल हुई है। - एनपी सिंह पूर्व अध्यक्ष फोनरवा
फोनरवा की वार्षिक आम सभा सकुशल संपन्न हुई। कुछ लोग फ ोनरवा को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं और अपनी निजी संस्था को आगे बढ़ाना चाह रहे है।
- योगेंद्र शर्मा, अध्यक्ष, फ ोनरवा
फ ोनरवा सचिव योगेश शर्मा के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जिससे पुलिस को सूचना देकर तुरंत बुलाया गया। पुलिस के आने पर हंगामा करने वाले वहां से गायब हो गए। इससे फि र शांति का माहौल बन गया।
- टीसी गौड़, सचिव लीगल, फोनरवा
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पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई। सबसे पहले मौजूद सभी सदस्यों व पदाधिकारियों ने कोविड संक्रमण से मारे गए लोगों के लिए दो मिनट का मौन रखा। इसके बाद महासचिव केके जैन ने वित्तीय वर्ष 2020-21 का लेखा जोखा प्रस्तुत किया जो सदस्यों ने पारित कर दिया। इसके बाद तय किया गया कि फोनरवा की 2021-23 कार्यकारिणी का चुनाव 1 अगस्त को होगा। चुनाव कराने के लिए रिटायर्ड कर्नल शशि वैध, आशिम कुमार, मदन मोहन, डीके खरबंदा की प्रति नियुक्ति के साथ-साथ वीरेंद्र सिंह नेगी को चुनाव अधिकारी बनाया गया है।
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इसके बाद जब कुछ सदस्यों द्वारा लगातार 2 बार चुनाव लड़ने के बाद एक टर्म कूलिंग पीरियड (थोड़े अंतराल) के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू की गई तो हंगामा शुरू हो गया। फोनरवा महासचिव केके जैन ने लोगों को शांत कराया तो सेक्टर-56 के आरडब्ल्यूए महासचिव संजय मावी ने गाली गलौज कर दी। इसे लेकर कई सदस्य नाराज हो गए। लोगों ने कहा कि महासचिव बहुत ही सीधे स्वभाव के हैं उनसे ऐसा व्यवहार निंदनीय है। संजय को उनसे माफ ी मांगनी चाहिए। हालांकि, संजय का कहना है कि उन्होंने किसी को गाली नहीं दी। कुछ लोग गलत आरोप लगा रहे हैं। हमारा व्यवहार सेक्टर में भी ऐसा नहीं है।
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मुख्य सलाहकार के संबोधन के दौरान हुआ विवाद
फोनरवा उपाध्यक्ष संजीव कुमार ने बताया कि बैठक में शहर के 30 सम्मानित अध्यक्ष व महासचिवों ने फ ोनरवा में अध्यक्ष व महासचिव के पद पर लगातार 2 बार चुने हुए पदाधिकारियों पर अगली बार कूलिंग पीरियड लागू करने पर संविधान संशोधन के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव पर जैसे ही चर्चा आरंभ हुई तो मुख्य सलाहकार ऋषिपाल अवाना प्रस्ताव के पक्ष में स्पष्टीकरण देने लगे। प्रस्ताव को पास होता देख फोनरवा के पदाधिकारी द्वारा पूर्व पदाधिकारियों को अपमानित करते हुए शेम-शेम चिल्लाना शुरू कर दिया गया। हंगामे के बीच फोनरवा अध्यक्ष योगेंद्र शर्मा और महासचिव केके जैन मूकदर्शक बने रहे। इस पर सदन ने मंच से निर्णय लिया कि योगेश शर्मा, इसके लिए खेद व्यक्त करें। उन्होंने कहा कि मैं जो चाहूंगा वो कहूंगा। इस पर सदन में जोरदार हंगामा हो गया। ऐसे में अध्यक्ष व महासचिव को सदन की इच्छा के खिलाफ सभा को भंग कर दिया और मंच छोड़कर बाहर चले गए।
पुलिस कार्रवाई से दुखी हुए पदाधिकारी
सभा में जब हंगामा हुआ तो उसे शांत करने के लिए पुलिस को बुलवाया गया। सेक्टर-48 बीसीडी के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष पवन गोयल का आरोप है कि पुलिस ने लोगों की भीड़ देखकर सभा की परमिशन मांगी तो लोग परमिशन दिखाने में असमर्थ लगे। इस पर पुलिस ने उपस्थित अध्यक्षों व महासचिवों को अभद्र शब्द कहे और उन्हें भगाया। कुछ पदाधिकरियों के साथ धक्कामुक्की भी की गई। हंगामा ज्यादा बढ़ने के बाद पुलिस कर्मियों ने सभागार खाली करा लिया। बाहर भी माहौल गर्म रहा और फोनरवा के सभी पदाधिकारी करीब 20 मिनट तक बाहर खडे़ रहे। बिना मास्क वालों का वीडियो बनाया। पुलिस के व्यवहार से सभी आमंत्रित आरडब्ल्यूए अध्यक्ष व महासचिव ने खुद को अपमानित महसूस किया। कुछ आरडब्ल्यूए पदाधिकारी तो बैठक के बाद बिना खाना खाए ही गुस्से में चले गए।
फोनरवा महासचिव केके जैन के साथ जिस तरह का व्यवहार आज सभा में किया गया, अपशब्दों का प्रयोग किया गया अत्यंत निंदनीय है। कुछ लोग फोनरवा पर जबरन कब्जा करना चाहते हैं। शहर के लोग मंसूबा पूरा नहीं होने देंगे। दो साल बेहतरीन काम करने वाली टीम फि र से चुनाव न जीत जाए, इसलिए कुछ लोगों ने हंगामा खड़ा किया। - पवन यादव, सचिव, फ ोनरवा
वार्षिक आम सभा सकुशल संपन्न हुई। महासचिव केके जैन के साथ अभद्र व्यवहार होने के कारण क्षुब्ध हूं। केके जैन कर्मठ और ईमानदार छवि के व्यक्ति हैं। उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया, लेकिन नतीजा उल्टा हुआ। लोगों ने केके जैन की सहनशीलता को अंतर्मन से स्वीकार किया।
- अजय चौरसिया, महासचिव, उद्योग विहार सेक्टर 82ए नोएडा
आमसभा में एक व्यक्ति एक पद पर लगातार दो बार रहने के उपरांत कूलिंग पीरियड वाले नियम को पुन: लागू करने के लिए प्रस्ताव लाया गया था। इस नियम को फोनरवा के मूल बायलॉज में से 2010 में गोपनीय तरीके से हटा दिया गया था जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। जब इस नियम को हटाने का कारण पूछा गया तो उन लोगों ने आक्रोशित होकर हंगामा करना प्रारंभ कर दिया। - योगेश शर्मा, सचिव फोनरवा
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फ ोनरवा बैठक में बुलाकर वरिष्ठ सदस्यों का अपमान किया गया और माफी भी नहीं मांगी। पुलिस द्वारा बार-बार सभी से परमीशन मांगना बहुत दुखद रहा फ ोनरवा की छवि धूमिल हुई है। - एनपी सिंह पूर्व अध्यक्ष फोनरवा
फोनरवा की वार्षिक आम सभा सकुशल संपन्न हुई। कुछ लोग फ ोनरवा को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं और अपनी निजी संस्था को आगे बढ़ाना चाह रहे है।
- योगेंद्र शर्मा, अध्यक्ष, फ ोनरवा
फ ोनरवा सचिव योगेश शर्मा के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जिससे पुलिस को सूचना देकर तुरंत बुलाया गया। पुलिस के आने पर हंगामा करने वाले वहां से गायब हो गए। इससे फि र शांति का माहौल बन गया।
- टीसी गौड़, सचिव लीगल, फोनरवा