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UP: बांस और प्लास्टिक से बने स्टाइलिश कपड़े मचा रहे धमाल, यूएस,ऑस्ट्रेलिया और नॉर्थ कोरिया में हो रही डिमांड

Fri, 27 Sep 2024 09:24 AM IST
विजय पुंडीर अंकुर त्रिपाठी, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
अंकुर त्रिपाठी, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Published by: विजय पुंडीर Updated Fri, 27 Sep 2024 09:24 AM IST
सार

अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में एमआईईटी से बीटेक करने वाले योगेश सिंह ने बांस और प्लास्टिक की बोतल से बने कपड़ों की प्रदर्शनी लगाई है। उन्होंने बताया कि एक टी शर्ट बनाने में चार से पांच सौ रुपये का खर्च आ रहा है। यही टी शर्ट एक से 2 हजार रूपये की बाजार में बिक रही है। 

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UP International Trade Show Stylish clothes made of bamboo and plastic are creating a sensation
बांस और प्लास्टिक से बनीं टी शर्ट को दिखाते योगेश सिंह(दाएं)और कनव गुप्ता (बाएं) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नॉलेज पार्क स्थित इंडिया एक्सपो एंड मार्ट में आयोजित अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में एमआईईटी से बीटेक करने वाले योगेश सिंह ने बांस और प्लास्टिक की बोतल से बने कपड़ों की प्रदर्शनी लगाई है। उनके द्वारा बनाए गए कपड़े यूएस, ऑस्ट्रेलिया और नॉर्थ कोरिया एशिया में धमाल मचा रहे है।

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योगेश सिंह ने बताया कि बीटेक करने के बाद उनकी नौकरी अमेरिका में छह लाख रुपये सालाना पर लगी थी। वहां वह नौकरी के लिए भी चले गए, लेकिन वहां जाने के बाद उन्हें आभास हुआ कि जिस देश ने उन्हें इस काबिल बनाया उस जगह को छोड़कर वह दूसरे देश की सेवा क्यों कर रहे हैं। योगेश ने बताया कि उन्होंने ठाना कि अब वह यहां काम नहीं करेंगे बल्कि स्टार्टअप शुरू करके देश के विकास में योगदान देंगे। 

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उन्होंने बताया कि पर्यावरण के साथ हो रहे खिलवाड़ से प्राकृतिक आपदा के दुष्प्रभाव बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने पर्यावरण की रक्षा करने के लिए एक अनोखा विचार विकसित किया। योगेश में बताया कि एक किलो कपास के उत्पादन में करीब 20 हजार लीटर पानी का उपयोग होता है। इसके साथ ही कपास की प्रोसेसिंग, टी शर्ट बनाने और रंगाई की प्रकिया में भी पानी की जरूरत होती है। इससे जल प्रदूषण के साथ ही भूजल दोहन भी अधिक हो रहा है। इसको कम करने के लिए कुछ नया सोचने की जरूरत है। इसके लिए कई काफी रिसर्च की। रिसर्च के बाद उन्होंने बांस से कपड़े बनाने की सोची। बांस के पेड़ को लगाने में पानी की जरूरत भी नहीं होती। इसके साथ ही बांस का पेड़ भी आसानी से लग जाता है। इससे पानी का दोहन भी कम होगा। एक टी शर्ट बनाने में चार से पांच सौ रुपये का खर्च आ रहा है। यही टी शर्ट एक से 2 हजार रूपये की बाजार में बिक रही है। 

बांस और प्लास्टिक के धागे से तैयार किया कपड़ा
योगेश के साथी कनव गुप्ता ने बताया कि कपड़े और प्लास्टिक की बोतलें जमा करनी शुरू कीं और उनसे धागा निकाला। इस धागे को बांस,प्लास्टिक और सूती धागे के साथ मिलाकर एक नया, पर्यावरण-अनुकूल कपड़ा तैयार किया। उन्होंने बताया कि कचरे से प्राप्त कपड़े, जैसे कि पुन उपयोग की गई प्लास्टिक की बोतलें और पुन उपयोग करने योग्य कपास से बने कपड़ों का उपयोग किया है। ये सामग्रियां, जिन्हें अक्सर लैंडफिल में फेंक दिया जाता है और पर्यावरण के लिए हानिकारक होती हैं, उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले कपड़ों में पुन निर्मित किया जाता है, जो स्टाइलिश और टिकाऊ दोनों होते हैं। योगेश सिंह की यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, बल्कि फैशन उद्योग में एक स्थायी और नवाचारी बदलाव की ओर भी संकेत करती है।

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15 लाख रूपये का सालाना टर्नओवर 
योगेश ने बताया कि छह लाख रूपये की नौकरी छोड़ 15 लाख रूपये का सालाना टर्नओवर का व्यापार खड़ा कर लिया है। फिब्रा क्लॉथिंग प्राइवेट लिमिटेड न केवल फैशन के प्रति जागरूकता बढ़ा रहा है, बल्कि एक हरित भविष्य की दिशा में भी काम कर रहा है। ब्रांड की खासियत यह है कि जो भी ग्राहक इस फैब्रिक से बनी टी- शर्ट या शर्ट खरीदते हैं, उन्हें पर्यावरण फ्रेंडली का सर्टिफिकेट भी दिया जाता है।

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