{"_id":"68ffc874114dfa0da10ec033","slug":"unnao-news-na-news-c-221-1-uno1004-139194-2025-10-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: ओपीडी में हर दूसरे मरीज को लिख रहे बाहर की दवाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: ओपीडी में हर दूसरे मरीज को लिख रहे बाहर की दवाएं
विज्ञापन
फोटो-5- दवा वितरण कक्ष के बाहर लगी मरीजों की भीड़। संवाद
उन्नाव। जिला अस्पताल में डॉक्टर मरीजों को एक रुपये के ओपीडी पर्चे के साथ महंगी दवाओं की पर्ची थमा रहे हैं। हर दूसरे मरीज को मेडिकल स्टोर की दवाएं लिख रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में हर दिन तकरीबन 1200 मरीज आते हैं। एक मरीज को करीब 500 रुपये की दवाएं मेडिकल स्टोर की लिखी जा रही हैं यानी रोजाना तीन लाख की दवाएं बाहर की लिख रहे हैं। अधिकारियों की चेतावनी का भी उन पर असर नहीं है।
जिला अस्पताल में मरीजों को ओपीडी व अन्य स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए एक रुपये का पर्चा बनवाना पड़ता है। इस पर्चे पर डॉक्टर की सलाह, दवाएं और जांच सेवाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इस पर्चे पर डॉक्टर मरीजों को वह दवाएं लिखते हैं जो अस्पताल में उपलब्ध हैं। डॉक्टरों को निर्देश हैं कि वह अस्पताल में उपलब्ध दवाएं ही मरीजों को लिखें।
अस्पताल के दवा वितरण कक्ष से दवाएं लेने की सलाह दी जाती है लेकिन डॉक्टर ओपीडी पर्चे के अलावा मरीजों को एक छोटी पर्ची भी दे रहे हैं। इस पर वह दवाएं लिखी जाती हैं जो अस्पताल से बाहर मेडिकल स्टोर पर मिलती हैं। इन दवाओं का बिल एक हजार रुपये से अधिक का बनता है। जिला अस्पताल की ओपीडी के डॉक्टर लगभग हर दूसरे मरीज को अस्पताल से बाहर की पर्ची थमा रहे हैं। पर्ची पर ब्रांडेड दवाओं के स्थान पर अधिक कमीशन वाली दवाएं लिखी जाती हैं।
विज्ञापन
50 प्रतिशत होता है डॉक्टर का कमीशन
जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को डॉक्टर जो दवाएं लिख रहे हैं उन पर उन्हें 50 प्रतिशत तक कमीशन मिलता है। ये दवाएं सिर्फ कुछ ही मेडिकल स्टोरों पर ही मिलती हैं। ओपीडी से निकलते ही मरीजों को उन मेडिकल स्टोर का नाम भी बता दिया जाता है जहां दवाएं उपलब्ध होती हैं।
मरीजों की बात
फोटो-8-महेंद्र सिंह
बाहर की लिखीं 475 रुपये की दवाएं
मौरावां निवासी महेंद्र सिंह ने बताया कि वह दुर्घटना में घायल हो गए थे। जिला अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने दवाओं की दो पर्ची दी। एक पर्ची से दो दवाएं दवा वितरण कक्ष से मिलीं। दूसरी पर्ची से दो पत्ते टैबलेट और एक जेल मेडिकल स्टोर से 475 रुपये रुपये देकर मिलीं।
फोटो- 9-रावेंद्र
मेडिकल स्टोर से लेनी पड़ी 536 रुपये की दवा
रायपुर गढ़ी के रावेंद्र ने बताया कि उन्हें सीने में दिक्कत है। जिला अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने तीन प्रकार की दवाएं दवा वितरण कक्ष से लिखीं। चार प्रकार की दवाएं मेडिकल स्टोर से लेने की बात कही। जब मेडिकल स्टोर पर इन दवाओं का रेट पूछा तो 536 रुपये बताया गया। मजबूरी में लेनी पड़ी।
वर्जन...
सभी डॉक्टरों को सख्त निर्देश हैं कि वह केवल दवा वितरण कक्ष में उपलब्ध दवाएं ही मरीजों को लिखें। अगर कोई भी डॉक्टर बाहर से दवाएं लिख रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा जाएगा। -डॉ. राजीव गुप्ता- सीएमएस, जिला अस्पताल।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में मरीजों को ओपीडी व अन्य स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए एक रुपये का पर्चा बनवाना पड़ता है। इस पर्चे पर डॉक्टर की सलाह, दवाएं और जांच सेवाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इस पर्चे पर डॉक्टर मरीजों को वह दवाएं लिखते हैं जो अस्पताल में उपलब्ध हैं। डॉक्टरों को निर्देश हैं कि वह अस्पताल में उपलब्ध दवाएं ही मरीजों को लिखें।
विज्ञापन
अस्पताल के दवा वितरण कक्ष से दवाएं लेने की सलाह दी जाती है लेकिन डॉक्टर ओपीडी पर्चे के अलावा मरीजों को एक छोटी पर्ची भी दे रहे हैं। इस पर वह दवाएं लिखी जाती हैं जो अस्पताल से बाहर मेडिकल स्टोर पर मिलती हैं। इन दवाओं का बिल एक हजार रुपये से अधिक का बनता है। जिला अस्पताल की ओपीडी के डॉक्टर लगभग हर दूसरे मरीज को अस्पताल से बाहर की पर्ची थमा रहे हैं। पर्ची पर ब्रांडेड दवाओं के स्थान पर अधिक कमीशन वाली दवाएं लिखी जाती हैं।
विज्ञापन
50 प्रतिशत होता है डॉक्टर का कमीशन
जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को डॉक्टर जो दवाएं लिख रहे हैं उन पर उन्हें 50 प्रतिशत तक कमीशन मिलता है। ये दवाएं सिर्फ कुछ ही मेडिकल स्टोरों पर ही मिलती हैं। ओपीडी से निकलते ही मरीजों को उन मेडिकल स्टोर का नाम भी बता दिया जाता है जहां दवाएं उपलब्ध होती हैं।
मरीजों की बात
फोटो-8-महेंद्र सिंह
बाहर की लिखीं 475 रुपये की दवाएं
मौरावां निवासी महेंद्र सिंह ने बताया कि वह दुर्घटना में घायल हो गए थे। जिला अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने दवाओं की दो पर्ची दी। एक पर्ची से दो दवाएं दवा वितरण कक्ष से मिलीं। दूसरी पर्ची से दो पत्ते टैबलेट और एक जेल मेडिकल स्टोर से 475 रुपये रुपये देकर मिलीं।
फोटो- 9-रावेंद्र
मेडिकल स्टोर से लेनी पड़ी 536 रुपये की दवा
रायपुर गढ़ी के रावेंद्र ने बताया कि उन्हें सीने में दिक्कत है। जिला अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने तीन प्रकार की दवाएं दवा वितरण कक्ष से लिखीं। चार प्रकार की दवाएं मेडिकल स्टोर से लेने की बात कही। जब मेडिकल स्टोर पर इन दवाओं का रेट पूछा तो 536 रुपये बताया गया। मजबूरी में लेनी पड़ी।
वर्जन...
सभी डॉक्टरों को सख्त निर्देश हैं कि वह केवल दवा वितरण कक्ष में उपलब्ध दवाएं ही मरीजों को लिखें। अगर कोई भी डॉक्टर बाहर से दवाएं लिख रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा जाएगा। -डॉ. राजीव गुप्ता- सीएमएस, जिला अस्पताल।

फोटो-5- दवा वितरण कक्ष के बाहर लगी मरीजों की भीड़। संवाद

फोटो-5- दवा वितरण कक्ष के बाहर लगी मरीजों की भीड़। संवाद