Ukraine vs Russia: चार दिन बाद दिल्ली में मिलीं बिछड़ी बहनें, मां भी हो गईं भावुक
मोनिका ने बताया कि 15 फरवरी को भारतीय दूतावास की ओर से पहली चेतावनी दी गई थी कि जिनको रुकना जरूरी नहीं है वह यूक्रेन से निकल जाएं। उनकी यूनिवर्सिटी में ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा नहीं थी। इसी वजह से उन्हें पढ़ाई के लिए रुकना पड़ा।
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दनकौर के अस्तौली गांव निवासी दो सगी बहनें आंचल व मोनिका 28 मार्च को रोमानिया बॉर्डर पर बिछड़ गई थीं। चार दिन बाद शुक्रवार सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पर दोनों बहनें दोबारा मिलीं। दोनों एक दूसरे से लिपट कर रो पड़ीं।
यह नजारा देख कर एयरपोर्ट पर पहुंची मां सुदेश भी खुद को नहीं रोक पाईं। दोनों बच्चियों को साथ देखकर वह राहत महसूस कर रही थीं। इससे पहले दिल्ली एयरपोर्ट पर छोटी बहन पहले पहुंच गई थी। बड़ी बहन से मिलने के लिए वह एयरपोर्ट पर 12 घंटे तक इंतजार करती रही। दिल्ली एयरपोर्ट से दोनों एकसाथ घर लौटीं। दोनों बहनों के अलावा कई अन्य विद्यार्थी भी एयरपोर्ट पहुंचे, जहां से वह परिजन के साथ अपने घर पहुंच गए। अस्तौली पहुंची दोनों बहनों की झलक देखने के लिए गांव व परिवार के लोग इकट्ठा थे।
दादाजी दोबारा यूक्रेन नहीं भेजना चाहते
मोनिका ने बताया कि 15 फरवरी को भारतीय दूतावास की ओर से पहली चेतावनी दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि जिनको रुकना जरूरी नहीं है वह यूक्रेन से निकल जाएं। उनकी यूनिवर्सिटी में ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा नहीं थी। इसी वजह से उन्हें पढ़ाई के लिए रुकना पड़ा। दोबारा यूक्रेन जाने की बात पर पिता ने कहा कि माहौल ठीक होने पर पढ़ाई पूरी कराएंगे। वहीं दादा ने श्रीचंद अब दोबारा यूक्रेन भेजने के पक्ष में नहीं हैं।