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Noida News: जेल में भाइयों को राखी बांधने पहुंची दो हजार बहनें

Fri, 01 Sep 2023 01:27 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 01 Sep 2023 01:27 AM IST
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Two thousand sisters came to tie rakhi to brothers in jail
जेल में भाइयों को राखी बांधने पहुंची दो हजार बहनें
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गेट पर धूप में घंटों किया इंतजार, अंदर जाने के लिए हुई धक्का-मुक्की

संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा।
भाइयों को राखी बांधने के लिए दो हजार से अधिक बहनें गौतमबुद्धनगर जेल पहुंचीं। जेल के मुख्य गेट पर भीड़ होने के बावजूद भी बहनों का उत्साह कम नहीं हुआ। अपने नंबर के लिए घंटों इंतजार करती रहीं। इस बीच धक्का-मुक्की के चलते कई बार अफरा-तफरी का माहौल भी रहा। बहनों को जेल में राखी के अलावा कोई भी सामान लेकर जाने की अनुमति नहीं थी। मिठाई जेल की और से दी गई। व्यवस्था बनाने के लिए ढाई हजार पुलिस कर्मी तैनात रहे।
गौतमबुद्धनगर जेल में 3164 बंदी हैं। कोरोना काल के बाद पहली बार इस रक्षाबंधन पर जेल प्रशासन ने बहनों को भाइयों की कलाई पर राखी बांधने की अनुमति दी थी। इसके लिए केवल बृहस्पतिवार के दिन ही व्यवस्थाएं की गईं। वहीं बहनों के अलावा पहुंचने अन्य परिजनों को जेल प्रशासन ने मुख्य गेट पर ही रोक दिया। अपनी राखी को भाईयों की कलाई तक पहुंचाने के लिए बहनों को करीब किलोमीटर पैदल चलने के बाद जेल के अंदर प्रवेश मिल पाया। वहां टेंट में बंदियों को बुलाकर उनकी बहनों से मुलाकात कराई गई। एक घंटा तक मिलने का समय दिया गया।
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जेल में एक बार में 300 से 400 बहनों को समूह के रूप में अंदर भेजा जा रहा था। इस बीच इंतजार कर रहीं अन्य बहनों को बाहर धूप में पेड़ों का सहारा लेना पड़ा। हालांकि बाहर भी पुलिस ने टेंट की व्यवस्था की थी। एक महिला अपने साथ बच्चों को लेकर सवेरे 9 बजे से 2 बजे तक अपने भाई से मिलने के लिए इंतजार करती रही।
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ऑटो चालकों ने वसूले 50 से 100 रुपये
कासना बस स्टैंड से जेल के बीच ऑटो चालकों ने मौके का जमकर फायदा उठाया। दिनभर बहनों को लाने, लेकर जाने में व्यस्त रहे। एक सवारी से पचास से 100 रुपये तक वसूल किए।

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बंदियों ने देश की मिट्टी से बनाईं राखियां

गौतमबुद्धनगर जेल के बंदियों ने बायो कम्पोस्ट मटेरियल से राखियां बनाई हैं। इन राखियों में मिट्टी, अमरूद की लकड़ी, तुलसी, नीम की लकड़ी का उपयोग किया गया है। इसमें किसी भी मशीन का इस्तेमाल नहीं किया गया। इसके लिए विभिन्न एनजीओ की ने बंदियों को प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षित कैदियों के द्वारा बनाई राखियों को नि:शुल्क रूप से बार्डर पर तैनात सेना के जवानों के लिए भेजा गया है।
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इस बार रक्षाबंधन पर राखी बंधने के लिए करीब 1500 बहनों के आने का अनुमान था। मगर दो हजार से भी अधिक बहनें पहुंच गईं। इसके बाद भी व्यवस्था को संभाले रखा।
अरूण प्रताप सिंह, जेल अधीक्षक, गौतमबुद्धनगर
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