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‘बिना टीका प्रवेश नहीं’ वाले आदेश को दो डॉक्टरों ने दी चुनौती
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नई दिल्ली। 15 अक्तूबर तक कोरोना वैक्सीन की पहली खुराक न लेने वाले कर्मियों के कार्यालयों में आने पर रोक लगाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। यह याचिका डॉ. नीतू चौधरी व एक अन्य डॉक्टर की ओर से दाखिल की गई है।
उन स्वास्थ्य कर्मियों, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं और शिक्षकों के कार्यालयों में आने पर रोक लगा दी गई है जिन्होंने कोरोना के टीके की पहली खुराक नहीं ली है।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने याचिका पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। हालांकि न्यायालय ने ये भी कहा कि याचिकाकर्ता डॉक्टर हैं और यदि वे ऐसा कहेंगे तो आधी आबादी आगे आकर कहेगी कि वे टीका नहीं लेना चाहती। उन्होंने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील से कहा कि आपके मुवक्किल डॉक्टर हैं, उन्हें इस बात को और भी अधिक समझना चाहिए।
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यह टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने मामले की सुनवाई तीन फरवरी 2022 तय कर दी। सरकारी अस्पताल में कार्यरत डॉक्टरों ने कहा है कि जबरन टीका लगाना उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है क्योंकि यह आजीविका कमाने के उनके अधिकार और कार्यालय जाने के अधिकार का उल्लंघन है।
दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने आठ अक्तूबर को जारी आदेश के अनुसार सरकारी कर्मचारी/कोरोना संक्रमण से लड़ाई में अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता, स्वास्थ्य कर्मी, शिक्षक और स्कूल, कॉलेज में काम करने वाले अन्य कर्मचारियों को 15 अक्तूबर तक टीकाकरण (कम से कम पहली खुराक) लेने का निर्देश दिया था।
साथ ही कहा कि यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो 16 अक्तूबर से अपने संबंधित कार्यालयों/स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों में उन्हें पहली खुराक लेने तक प्रवेश नहीं मिलेगा। ड्यूटी से अनुपस्थिति की इस अवधि को टीकाकरण की पहली खुराक लेने तक छुट्टी पर माना जाएगा।
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उन स्वास्थ्य कर्मियों, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं और शिक्षकों के कार्यालयों में आने पर रोक लगा दी गई है जिन्होंने कोरोना के टीके की पहली खुराक नहीं ली है।
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न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने याचिका पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। हालांकि न्यायालय ने ये भी कहा कि याचिकाकर्ता डॉक्टर हैं और यदि वे ऐसा कहेंगे तो आधी आबादी आगे आकर कहेगी कि वे टीका नहीं लेना चाहती। उन्होंने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील से कहा कि आपके मुवक्किल डॉक्टर हैं, उन्हें इस बात को और भी अधिक समझना चाहिए।
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यह टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने मामले की सुनवाई तीन फरवरी 2022 तय कर दी। सरकारी अस्पताल में कार्यरत डॉक्टरों ने कहा है कि जबरन टीका लगाना उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है क्योंकि यह आजीविका कमाने के उनके अधिकार और कार्यालय जाने के अधिकार का उल्लंघन है।
दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने आठ अक्तूबर को जारी आदेश के अनुसार सरकारी कर्मचारी/कोरोना संक्रमण से लड़ाई में अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता, स्वास्थ्य कर्मी, शिक्षक और स्कूल, कॉलेज में काम करने वाले अन्य कर्मचारियों को 15 अक्तूबर तक टीकाकरण (कम से कम पहली खुराक) लेने का निर्देश दिया था।
साथ ही कहा कि यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो 16 अक्तूबर से अपने संबंधित कार्यालयों/स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों में उन्हें पहली खुराक लेने तक प्रवेश नहीं मिलेगा। ड्यूटी से अनुपस्थिति की इस अवधि को टीकाकरण की पहली खुराक लेने तक छुट्टी पर माना जाएगा।