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फर्जी दस्तावेजों पर अपना फोटो लगाकर करते थे फर्जीवाड़ा

Fri, 27 Dec 2019 01:36 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 27 Dec 2019 01:36 AM IST
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Two accused used to fake their photo by putting their photo on other's documents
दूसरे के दस्तावेज पर अपना फोटो लगाकर करते थे फर्जीवाड़ा, दो आरोपी गिरफ्तार
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ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में दूसरे के दस्तावेज से वाहन फाइनेंस कराने के फर्जीवाड़े का ‘अमर उजाला’ ने 25 दिसंबर को खुलासा किया था। मामले में बिसरख कोतवाली पुलिस ने दो बदमाशों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चार नई कार, चार बाइक, स्कूटी, फर्जी दस्तावेज आदि सामान बरामद किया है। आरोपी दूसरों के दस्तावेज पर अपना फोटो लगाकर फर्जीवाड़ा करते थे। इससे पहले भी वह फर्जीवाड़ा कर फाइनेंस कराए गए वाहनों को बेच चुके हैं।
एसपी देहात रणविजय सिंह ने बताया कि एक कंपनी के अधिकारी ने बिसरख कोतवाली में केस दर्ज कराया था। आरोप है कि आरोपी फर्जी दस्तावेज पर अपना फोटो लगाकर कई बैंक व कंपनियों से वाहन फाइनेंस कराकर बेच चुके हैं। केस दर्ज करने के बाद बिसरख कोतवाली प्रभारी मनोज पाठक की टीम बदमाशों की तलाश में जुट गई। पुलिस ने मूलरूप से बुलंदशहर निवासी अजहर खान और एटा निवासी साजिद अली को गिरफ्तार किया। अजहर निराला स्टेट व साजिद अली गौड़ सिटी में फ्लैट लेकर किराए पर रह रहा था। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि साजिद अली दो साल पहले एक मोटर कंपनी के सेल्स विभाग में काम करता था। वहीं से उसने वाहन फाइनेंस की औपचारिकताएं आदि सीखकर फर्जीवाड़ा करने की योजना बनाई थी। आरोपियों से पुलिस ने वर्ना, क्रेटा, आई-20, आई-10 कार, चार बाइक और एक स्कूटी बरामद की है। कोतवाली प्रभारी मनोज पाठक ने बताया कि आरोपियों ने क्रेटा दो लाख रुपये में बेच दी थी। जिस व्यक्ति को कार बेची गई थी वह अभी फरार है। आरोपी दुपहिया वाहन मात्र 20 हजार रुपये में बेच देते थे।
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फ्लैट मालिक से पूछताछ में हुआ खुलासा
आरोपी साजिद अली ने गाजियाबाद की एक कंपनी से कार लोन कराने के लिए आवेदन कर रखा था। कंपनी का कर्मचारी सत्यापन के लिए उसके फ्लैट पर पहुंचा तो वहां मालिक मिल गया। पूछताछ में कंपनी कर्मी ने दस्तावेज व फोटो आदि दिखाए तो उसने बताया कि ये उनका किराएदार अनवर खान है। आरोपी साजिद ने मालिक को अपना यही नाम बताया था और किरायानामा भी इसी नाम से फर्जी दस्तावेज देकर बनवाया था। इससे कर्मी को शक हो गया और उसने अन्य अधिकारियों को शिकायत देकर रिपोर्ट दर्ज करा दी। पड़ताल करने पर मामले का खुलासा हुआ। आरोपी ने किसी अन्य व्यक्ति के दस्तावेज पर फोटोशॉप की मदद से फोटो लगाकर फर्जी पहचान पत्र बना रखा था।
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