UP: यहां 200 परिषदीय स्कूलों में दिव्यांगों के लिए शौचालय नहीं, 2018 से 'ऑपरेशन कायाकल्प' चला रही यूपी सरकार
दनकौर और दादरी के परिषदीय स्कूलों में 645 दिव्यांग छात्र नामांकित है। इसके बावजूद इन ब्लॉक के स्कूलों में दिव्यांग शौचालय नहीं बन पाए हैं, जिससे छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार इन स्कूलों के शिक्षकों की ओर से भी दिव्यांग शौचालय बनवाने की मांग की गई है।
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परिषदीय स्कूलों में छात्रों को निजी स्कूलों की तर्ज पर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्रदेश सरकार 2018 से ऑपरेशन कायाकल्प चला रही है। इसके तहत 19 पैरामीटर पर स्कूलों में करीब सात साल से काम कराए जा रहे हैं। हालांकि जिले के 200 स्कूलों में अब तक दिव्यांग शौचालय और किचन सेट नहीं बने हैं। हर साल जनपद में 100 करोड़ रुपये से अधिक सीएसआर के माध्यम से कार्य कराए जाते हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दनकौर और दादरी ब्लॉक के कुछ स्कूलों में दिव्यांग शौचालय और किचन सेट अब तक नहीं बन पाए हैं। इसके अलावा सभी ब्लॉक में कार्य करा दिए गए हैं। उनका कहना है कि इन स्कूलों में अभी दिव्यांग छात्र पंजीकृत नहीं है जिसके कारण दिव्यांग शौचालय नहीं बन पाए हैं। विभाग की ओर से ऐसे स्कूलों को चिह्नत किया जा चुका है। इस सत्र में सभी स्कूलों में दिव्यांग शौचालय बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिससे हर छात्र को सभी सुविधाएं स्कूलों में मिल सके।
दनकौर और दादरी में 645 दिव्यांग छात्र
दनकौर और दादरी के परिषदीय स्कूलों में 645 दिव्यांग छात्र नामांकित है। इसके बावजूद इन ब्लॉक के स्कूलों में दिव्यांग शौचालय नहीं बन पाए हैं, जिससे छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार इन स्कूलों के शिक्षकों की ओर से भी दिव्यांग शौचालय बनवाने की मांग की गई है। दादरी के अधिकतर स्कूलों में दिव्यांग छात्र है।
एनजीओ बांट रहे मिड डे मिल
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जनपद के चारों ब्लॉक में एनजीओ की ओर से छात्रों को मिड डे मिल वितरित किया जाता है। दादरी, दनकौर और जेवर में सात से आठ एनजीओ काम कर रहे हैं।
जनपद में दिव्यांग छात्रों की संख्या
क्षेत्र छात्रों की संख्या
बिसरख - 401
दादरी - 364
जेवर - 347
दनकौर - 281
95 प्रतिशत स्कूलों में कायाकल्प के कार्य करा दिए गए है। तीनों प्राधिकरण की मदद से तेजी से कार्य हो रहा है। 19 पैरामीटर में एक दो बिंदुओं पर कार्य बचे हैं, जो जल्द पूरे हो जाएंगे। -राहुल पंवार, बेसिक शिक्षा अधिकारी