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Noida News: कोल्हौरा के जंगल की ओर मिली बाघ की लोकेशन
Thu, 11 Sep 2025 12:20 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
Updated Thu, 11 Sep 2025 12:20 AM IST
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कटिघरा गांव से 900 मीटर दूर बरगद के निकट लगाया गया पिंजरा।
महोली (सीतापुर)। इलाके में लगातार बाघ की चहलकदमी होने से ग्रामीणों में दहशत है। आए दिन ग्रामीण कहीं न कहीं बाघ देखे जाने का दावा कर रहे हैं। वन विभाग भी इलाके में बाघ की मौजूदगी बता रहा है। डीएफओ नवीन खंडेलवाल के मुताबिक कोल्हौरा के जंगल की ओर बाघ के ताजा पगचिह्न मिले हैं। ट्रैप कैमरे में भी बाघ की तस्वीरें कैद हुई हैं।
गत माह नरनी निवासी सौरभ को बाघ ने निवाला बनाया था। इसके बाद से दुधवा टाइगर रिजर्व तथा वन विभाग के 40 कर्मियों की टीमें क्षेत्र में कॉम्बिंग कर रही हैं। यही नहीं बाघ की लोकेशन ट्रेस करने के लिए पिंजरा लगाने के साथ अलग-अलग स्थानों पर पड़वा भी बांधे गए हैं। इतनी कवायद के बावजूद वन विभाग बाघ को पकड़ने में अभी तक नाकामयाब रहा है। नरनी कटिघरा इलाके के ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग बाघ पकड़ने के बजाय खानापूर्ति कर रहा है। किसानों की फसलें बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं। फसलों में इन दिनों खाद की आवश्यकता है, लेकिन बाघ के खौफ से किसान खेतों में खाद नहीं डाल पा रहे हैं।
महोली तहसील क्षेत्र के बद्दापुर गांव में मंगलवार को खेतों की तरफ मवेशियों के लिए चारा लेने गए ग्रामीण अहिबरन सिंह व ईशपाल ने गांव के ही अमरपाल के गन्ने के खेत में बाघ को जाते हुए देखने का दावा किया है। वहीं विभाग के अधिकारी कर्मचारी अपनी नाकामी छिपाने के लिए फोन तक रिसीव नहीं कर रहे हैं। विभाग की कार्यशैली ग्रामीणों को जागरूकता का पाठ पढ़ाने तक सिमट गई है। बाघ के हमले की घटना के 18 दिन बाद भी वन विभाग बाघ तक नहीं पहुंच पाया है।
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पिंजरे में बंधी बकरी खा गया बाघ
बीते दिनों वन विभाग की ओर से सीएचसी के करीब से पिंजरा हटाकर बरगद के पेड़ के निकट लगाया गया था। ग्रामीणों ने बताया कि मंगलवार रात पिंजरे में बांधी गई बकरी सुबह नदारद मिली। ग्रामीणों के मुताबिक बाघ पिंजरे से बकरी को उठा ले गया, लेकिन पिंजरा बंद न होने से बाघ उसमें कैद नहीं हो सका। सुबह करीब 3:00 बजे पिंजरे का जायजा लेने पहुंची वन विभाग की टीम को उसमें बकरी नहीं मिली। इसकी भनक लगते ही जिम्मेदार अधिकारियों ने फोन उठाना ही बंद कर दिया है। इस संबंध में डीएफओ ने बताया कि बकरी शाम को बांधी जाती है, सुबह खोल ली जाती है।
कोट--
ट्रैप कैमरे में बाघ की फोटो कैद हुई है, बाघ की लोकेशन कोल्हौरा गांव के जंगल की तरफ है, इसी तरफ पड़वा बांधा गया है।
-नवीन खंडेलवाल, डीएफओ सीतापुर
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गत माह नरनी निवासी सौरभ को बाघ ने निवाला बनाया था। इसके बाद से दुधवा टाइगर रिजर्व तथा वन विभाग के 40 कर्मियों की टीमें क्षेत्र में कॉम्बिंग कर रही हैं। यही नहीं बाघ की लोकेशन ट्रेस करने के लिए पिंजरा लगाने के साथ अलग-अलग स्थानों पर पड़वा भी बांधे गए हैं। इतनी कवायद के बावजूद वन विभाग बाघ को पकड़ने में अभी तक नाकामयाब रहा है। नरनी कटिघरा इलाके के ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग बाघ पकड़ने के बजाय खानापूर्ति कर रहा है। किसानों की फसलें बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं। फसलों में इन दिनों खाद की आवश्यकता है, लेकिन बाघ के खौफ से किसान खेतों में खाद नहीं डाल पा रहे हैं।
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महोली तहसील क्षेत्र के बद्दापुर गांव में मंगलवार को खेतों की तरफ मवेशियों के लिए चारा लेने गए ग्रामीण अहिबरन सिंह व ईशपाल ने गांव के ही अमरपाल के गन्ने के खेत में बाघ को जाते हुए देखने का दावा किया है। वहीं विभाग के अधिकारी कर्मचारी अपनी नाकामी छिपाने के लिए फोन तक रिसीव नहीं कर रहे हैं। विभाग की कार्यशैली ग्रामीणों को जागरूकता का पाठ पढ़ाने तक सिमट गई है। बाघ के हमले की घटना के 18 दिन बाद भी वन विभाग बाघ तक नहीं पहुंच पाया है।
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पिंजरे में बंधी बकरी खा गया बाघ
बीते दिनों वन विभाग की ओर से सीएचसी के करीब से पिंजरा हटाकर बरगद के पेड़ के निकट लगाया गया था। ग्रामीणों ने बताया कि मंगलवार रात पिंजरे में बांधी गई बकरी सुबह नदारद मिली। ग्रामीणों के मुताबिक बाघ पिंजरे से बकरी को उठा ले गया, लेकिन पिंजरा बंद न होने से बाघ उसमें कैद नहीं हो सका। सुबह करीब 3:00 बजे पिंजरे का जायजा लेने पहुंची वन विभाग की टीम को उसमें बकरी नहीं मिली। इसकी भनक लगते ही जिम्मेदार अधिकारियों ने फोन उठाना ही बंद कर दिया है। इस संबंध में डीएफओ ने बताया कि बकरी शाम को बांधी जाती है, सुबह खोल ली जाती है।
कोट
ट्रैप कैमरे में बाघ की फोटो कैद हुई है, बाघ की लोकेशन कोल्हौरा गांव के जंगल की तरफ है, इसी तरफ पड़वा बांधा गया है।
-नवीन खंडेलवाल, डीएफओ सीतापुर