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Noida News: पांचवें प्रयास में बदली बाजी, सुवर्णा ने जीता एशियाई स्वर्ण

Thu, 22 Oct 2026 08:34 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 22 Oct 2026 08:34 PM IST
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Tides turned on the fifth attempt; Suvarna wins Asian gold
पति व बेटे के साथ एशियन पैरा गेम्स 2026 के डिस्कस थ्रो स्पर्धा में स्वर्ण पदक विजेता ग्रेटर नोए
- बचपन में पोलियो से प्रभावित हुईं ग्रेटर नोएडा की 44 वर्षीय पैरा एथलीट, 15.66 मीटर के थ्रो से जापान में रचा इतिहास
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। रात नहीं, ख्वाब बदलता है… जज्बा रखो जीतने का क्योंकि, किस्मत बदले न बदले, पर वक्त जरूर बदलता है। इन पंक्तियों को ग्रेटर नोएडा की 44 वर्षीय पैरा एथलीट सुवर्णा राज ने अपने संघर्ष और सफलता से सच कर दिखाया है। बचपन में पोलियो के कारण शारीरिक चुनौतियों का सामना करने वाली सुवर्णा ने जापान में आयोजित एशियन पैरा गेम्स-2026 में महिला डिस्कस थ्रो एफ-54 स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। शुरुआती चार प्रयासों में अपेक्षित दूरी हासिल नहीं कर पाने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। पांचवें प्रयास में 15.66 मीटर चक्का फेंककर उन्होंने बाजी अपने नाम कर ली।
जापान के आइची-नागोया में 18 से 24 अक्टूबर तक आयोजित पांचवें एशियन पैरा गेम्स में सुवर्णा का प्रदर्शन धैर्य और दृढ़ संकल्प की मिसाल बना। उन्होंने छह प्रयासों में क्रमशः 13.68, 15.09, 15.05, 14.57, 15.66 और 15.19 मीटर की दूरी हासिल की। उनका पांचवां प्रयास निर्णायक साबित हुआ। ईरान की शाहला हदीदी ने 15.45 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता। दोनों खिलाड़ियों के बीच महज 21 सेंटीमीटर का अंतर रहा।
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दो साल की उम्र से व्हीलचेयर पर, संघर्ष को बनाया ताकत : उत्तर प्रदेश पैरा एसोसिएशन के टेक्निकल चेयरमैन मोनू कुमार ने बताया कि सुवर्णा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर जिले और देश का नाम रोशन किया है। उनके पति प्रदीप राज के मुताबिक, बचपन में पोलियो होने के कारण सुवर्णा दो साल की उम्र से व्हीलचेयर का इस्तेमाल कर रही हैं। बीमारी से उनके दोनों पैर और कमर के नीचे का हिस्सा प्रभावित हुआ। करीब 90 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद उन्होंने आगे बढ़ने का हौसला नहीं छोड़ा। शुरुआती जीवन में चुनौतियों के बीच उन्होंने छात्रावास में रहकर पढ़ाई पूरी की और खेलों में अपनी पहचान बनाई।
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पावरलिफ्टिंग से डिस्कस थ्रो तक का सफर :
सुवर्णा ने 2002 से 2008 तक पावरलिफ्टिंग में हिस्सा लिया और राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते। इसके बाद उन्होंने शॉटपुट और डिस्कस थ्रो में अपनी प्रतिभा दिखाई। एशियन पैरा गेम्स में यह उनकी चौथी भागीदारी है। वर्षों के अभ्यास और मेहनत के बाद इस बार स्वर्ण पदक जीतना उनके खेल करियर की बड़ी उपलब्धि है।

मैदान के बाहर भी दिव्यांगों की आवाज :
सुवर्णा दिव्यांगजनों के अधिकारों और सुविधाओं के लिए भी सक्रिय हैं। वह अब तक 500 से अधिक इमारतों का एक्सेसिबिलिटी ऑडिट कर चुकी हैं, ताकि दिव्यांगों के अनुकूल सुविधाओं की उपलब्धता का आकलन किया जा सके। रेलवे और एयरलाइंस में दिव्यांग यात्रियों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार के मामलों में भी वह आवाज उठाती रही हैं। उनकी उपलब्धि बताती है कि मजबूत इरादों और निरंतर मेहनत से चुनौतियों को सफलता में बदला जा सकता है।
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