{"_id":"6ad8c8cd5041bbc19a0b2246","slug":"thora-phc-in-a-dilapidated-state-grnoida-news-c-491-1-rgh1003-11740-2026-10-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: थोरा पीएचसी बदहाल, प्रसूति केंद्र और ऑपरेशन थिएटर वर्षों से बंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: थोरा पीएचसी बदहाल, प्रसूति केंद्र और ऑपरेशन थिएटर वर्षों से बंद
विज्ञापन
थोरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
फोटो.......
-दीवारों पर दीमक, परिसर में उगी झाड़ियां, सफाई के अभाव में शौचालय भी इस्तेमाल के लायक नहीं
पुनीत कुमार/ फिरदौस
यमुना सिटी। जेवर ब्लॉक के थोरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत लंबे समय से मरम्मत न होने के कारण जर्जर हो चुकी है। अस्पताल परिसर में जगह-जगह बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हुई हैं, जबकि कई कमरों की दीवारों पर दीमक लगी है। प्रसूति केंद्र और ऑपरेशन थियेटर भी सालों से इस्तेमाल नहीं किए गए हैं। सफाई कर्मचारी न होने के कारण अस्पताल में धूल की मोटी परत जम गई है और शौचालय भी इस्तेमाल करने लायक नहीं बचा है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों को मिलने वाली जांच और चिकित्सा सुविधाएं अच्छी हैं, लेकिन भवन की खराब स्थिति के कारण अस्पताल का अधिकांश हिस्सा उपयोग में नहीं आ पा रहा है।
कई कमरे सालों से पड़े हैं बंद
थोरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए अलग-अलग कक्ष बनाए गए थे, लेकिन देखरेख और मरम्मत के अभाव में कई कमरों की हालत खराब हो चुकी है। अस्पताल की दीवारों पर दीमक लगी हुई है। डॉक्टर जिस कमरे में बैठकर मरीजों की जांच करते हैं, वहां भी दीमक का असर दिखाई देता है। डॉक्टरों की सुविधा के लिए बनाए गए चेंजिंग रूम भी जर्जर हो चुके हैं।
प्रसूति केंद्र का नहीं हो रहा इस्तेमाल
अस्पताल में प्रसूति केंद्र और ऑपरेशन थियेटर का निर्माण मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन ये कई सालों से इनका इस्तेमाल में नहीं हो पा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने इन कक्षों को संचालित होते नहीं देखा। लंबे समय से उपयोग नहीं होने और देखरेख के अभाव में इनकी हालत भी खराब हो चुकी है। ऐसे में इन सुविधाओं का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन
- मरीजों के लिए केवल दो बेड की व्यवस्था
स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों के लिए केवल दो बेड उपलब्ध हैं। इनमें से एक बेड हॉल में रखा है, जबकि दूसरा ऐसे कमरे में है जिसकी दीवारों पर दीमक लगी हुई है। ऐसे में किसी मरीज को बेड पर लिटाने की जरूरत पड़ने पर उसे जर्जर कमरे में रखना पड़ सकता है। इससे मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और अस्पताल में साफ-सफाई की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- कर्मचारियों के आवास भी जर्जर
स्वास्थ्य केंद्र परिसर में कर्मचारियों के रहने के लिए बनाए गए आवास भी बदहाल हैं। इन आवासों के आसपास बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं और भवनों की हालत जर्जर हो चुकी है। स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों का कहना है कि ये आवास उनके रहने के लिए बनाए गए थे, लेकिन अब इनकी स्थिति ऐसी है कि यहां रहना संभव नहीं है। आवासों में अब केवल कीड़े-मकोड़े दिखाई देते हैं।
- स्वास्थ्य केंद्र के खाते का केवाईसी न होने के बजट नहीं आ पा रहा है, जिसके चलते भवन की मरम्मत नहीं हो पा रही है।
-डॉ सर्फे जेया, चिकित्सा अधीक्षक, जेवर
विज्ञापन
-दीवारों पर दीमक, परिसर में उगी झाड़ियां, सफाई के अभाव में शौचालय भी इस्तेमाल के लायक नहीं
पुनीत कुमार/ फिरदौस
यमुना सिटी। जेवर ब्लॉक के थोरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत लंबे समय से मरम्मत न होने के कारण जर्जर हो चुकी है। अस्पताल परिसर में जगह-जगह बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हुई हैं, जबकि कई कमरों की दीवारों पर दीमक लगी है। प्रसूति केंद्र और ऑपरेशन थियेटर भी सालों से इस्तेमाल नहीं किए गए हैं। सफाई कर्मचारी न होने के कारण अस्पताल में धूल की मोटी परत जम गई है और शौचालय भी इस्तेमाल करने लायक नहीं बचा है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों को मिलने वाली जांच और चिकित्सा सुविधाएं अच्छी हैं, लेकिन भवन की खराब स्थिति के कारण अस्पताल का अधिकांश हिस्सा उपयोग में नहीं आ पा रहा है।
कई कमरे सालों से पड़े हैं बंद
थोरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए अलग-अलग कक्ष बनाए गए थे, लेकिन देखरेख और मरम्मत के अभाव में कई कमरों की हालत खराब हो चुकी है। अस्पताल की दीवारों पर दीमक लगी हुई है। डॉक्टर जिस कमरे में बैठकर मरीजों की जांच करते हैं, वहां भी दीमक का असर दिखाई देता है। डॉक्टरों की सुविधा के लिए बनाए गए चेंजिंग रूम भी जर्जर हो चुके हैं।
विज्ञापन
प्रसूति केंद्र का नहीं हो रहा इस्तेमाल
अस्पताल में प्रसूति केंद्र और ऑपरेशन थियेटर का निर्माण मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन ये कई सालों से इनका इस्तेमाल में नहीं हो पा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने इन कक्षों को संचालित होते नहीं देखा। लंबे समय से उपयोग नहीं होने और देखरेख के अभाव में इनकी हालत भी खराब हो चुकी है। ऐसे में इन सुविधाओं का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन
- मरीजों के लिए केवल दो बेड की व्यवस्था
स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों के लिए केवल दो बेड उपलब्ध हैं। इनमें से एक बेड हॉल में रखा है, जबकि दूसरा ऐसे कमरे में है जिसकी दीवारों पर दीमक लगी हुई है। ऐसे में किसी मरीज को बेड पर लिटाने की जरूरत पड़ने पर उसे जर्जर कमरे में रखना पड़ सकता है। इससे मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और अस्पताल में साफ-सफाई की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- कर्मचारियों के आवास भी जर्जर
स्वास्थ्य केंद्र परिसर में कर्मचारियों के रहने के लिए बनाए गए आवास भी बदहाल हैं। इन आवासों के आसपास बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं और भवनों की हालत जर्जर हो चुकी है। स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों का कहना है कि ये आवास उनके रहने के लिए बनाए गए थे, लेकिन अब इनकी स्थिति ऐसी है कि यहां रहना संभव नहीं है। आवासों में अब केवल कीड़े-मकोड़े दिखाई देते हैं।
- स्वास्थ्य केंद्र के खाते का केवाईसी न होने के बजट नहीं आ पा रहा है, जिसके चलते भवन की मरम्मत नहीं हो पा रही है।
-डॉ सर्फे जेया, चिकित्सा अधीक्षक, जेवर

थोरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र