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Noida News: फैक्टरी-प्लॉट दिलाने के नाम पर 49.47 लाख की धोखाधड़ी
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कोर्ट के आदेश पर बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने कंपनी निदेशक समेत तीन पर दर्ज किया मुकदमा
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। फैक्टरी-प्लॉट दिलाने के नाम पर करीब 49.47 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। दिल्ली के एक व्यक्ति की शिकायत पर बीटा-2 थाना पुलिस ने शुक्रवार को एक कंपनी के निदेशक, एक प्रॉपर्टी डीलर और उसके भतीजे के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मुकदमा कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुआ।
दिल्ली के सुभाष विहार निवासी विनोद कुमार ने तहरीर में बताया कि उन्हें अपने व्यवसाय के लिए फैक्टरी-प्लॉट की तलाश थी। इसके लिए उन्होंने गुरुदेव रियल एस्टेट डेवलपर्स के प्रोपराइटर/डायरेक्टर नरेन्द्र सिंह यादव से संपर्क किया। आरोप है कि नरेन्द्र ने उन्हें ओपुंटिया सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक रविन्द्र कुमार से मिलवाया, जिन्हें यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने सेक्टर-32 में 450 वर्ग मीटर का प्लॉट आवंटित किया था।
जनवरी 2021 में प्लॉट का एग्रीमेंट टू सेल हुआ, जिसमें कीमत केवल 27.60 लाख रुपये दिखाई गई, जबकि सौदा 49,47,388 रुपये में तय हुआ था। उन्होंने बैंक ट्रांसफर और नकद के जरिये पूरी रकम दी। आरोप है कि रविन्द्र ने बताया था कि प्लॉट की केवल दो किस्तें बाकी हैं, लेकिन बाद में पता चला कि 2019 की दो किस्तें जमा ही नहीं हुई थीं। इसके चलते विनोद को सितंबर 2024 में प्राधिकरण को 5,20,321 रुपये अलग से चुकाने पड़े।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। फैक्टरी-प्लॉट दिलाने के नाम पर करीब 49.47 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। दिल्ली के एक व्यक्ति की शिकायत पर बीटा-2 थाना पुलिस ने शुक्रवार को एक कंपनी के निदेशक, एक प्रॉपर्टी डीलर और उसके भतीजे के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मुकदमा कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुआ।
दिल्ली के सुभाष विहार निवासी विनोद कुमार ने तहरीर में बताया कि उन्हें अपने व्यवसाय के लिए फैक्टरी-प्लॉट की तलाश थी। इसके लिए उन्होंने गुरुदेव रियल एस्टेट डेवलपर्स के प्रोपराइटर/डायरेक्टर नरेन्द्र सिंह यादव से संपर्क किया। आरोप है कि नरेन्द्र ने उन्हें ओपुंटिया सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक रविन्द्र कुमार से मिलवाया, जिन्हें यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने सेक्टर-32 में 450 वर्ग मीटर का प्लॉट आवंटित किया था।
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जनवरी 2021 में प्लॉट का एग्रीमेंट टू सेल हुआ, जिसमें कीमत केवल 27.60 लाख रुपये दिखाई गई, जबकि सौदा 49,47,388 रुपये में तय हुआ था। उन्होंने बैंक ट्रांसफर और नकद के जरिये पूरी रकम दी। आरोप है कि रविन्द्र ने बताया था कि प्लॉट की केवल दो किस्तें बाकी हैं, लेकिन बाद में पता चला कि 2019 की दो किस्तें जमा ही नहीं हुई थीं। इसके चलते विनोद को सितंबर 2024 में प्राधिकरण को 5,20,321 रुपये अलग से चुकाने पड़े।
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