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Noida News: बाढ़ का पानी उतरने के बाद फसलें खराब होने का खतरा
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- फोटो
-पत्तों में सफेद कीड़ा लगने से फसल हो जाती है खराब
-तैयार फसल खराब होने की आशंका से किसान चिंतित
माई सिटी रिपोर्टर
यमुना सिटी। खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने वाली यमुना नदी से कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया। रबूपुरा, जेवर और दनकौर क्षेत्र में बाढ़ का पानी खेतों में भर गया। हालांकि अब पानी उतर चुका है, लेकिन लगातार कई दिनों तक खेतों में भरे रहने से फसल खराब होने की संभावना बढ़ गई है। इससे किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें हैं।
यमुना नदी के पानी का जलस्तर अब सामान्य हो गया है। जब हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़ा गया था तो यमुना नदी ने विकराल रूप ले लिया था। जिससे काफी नुकसान हुआ। ग्रामीण अंचलों में तैयार खड़ी फसल बाढ़ की जद में आ गई। लंबे समय तक बाढ़ का पानी भरे रहने से फसल बर्बाद होने की स्थिति में है। चंडीगढ़ गांव में पानी उतर तो गया लेकिन फसल में कीड़ा लगना शुरू हो गया है। वहीं दनकौर के लतीफपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय व घरों में बाढ़ का पानी घुस गया था। जलस्तर तो घट गया लेकिन विद्यालय सुचारू नहीं हो सका। किसान अशोक शर्मा ने बताया, खादर के जंगल में किसानों की 1 हजार बीघे से अधिक धान की फसल बाढ़ के पानी में डूब गई थी। किसानों की मांग है कि सरकार किसानों की फसलों में हुए नुकसान की भरपाई करे। जेवर के झुप्पा, कानीगढ़ी, शमश्मनगर, पूरन नगर, छोटा हिप्पा में भी किसानों की खेती प्रभावित हुई।
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-पत्तों में सफेद कीड़ा लगने से फसल हो जाती है खराब
-तैयार फसल खराब होने की आशंका से किसान चिंतित
माई सिटी रिपोर्टर
यमुना सिटी। खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने वाली यमुना नदी से कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया। रबूपुरा, जेवर और दनकौर क्षेत्र में बाढ़ का पानी खेतों में भर गया। हालांकि अब पानी उतर चुका है, लेकिन लगातार कई दिनों तक खेतों में भरे रहने से फसल खराब होने की संभावना बढ़ गई है। इससे किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें हैं।
यमुना नदी के पानी का जलस्तर अब सामान्य हो गया है। जब हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़ा गया था तो यमुना नदी ने विकराल रूप ले लिया था। जिससे काफी नुकसान हुआ। ग्रामीण अंचलों में तैयार खड़ी फसल बाढ़ की जद में आ गई। लंबे समय तक बाढ़ का पानी भरे रहने से फसल बर्बाद होने की स्थिति में है। चंडीगढ़ गांव में पानी उतर तो गया लेकिन फसल में कीड़ा लगना शुरू हो गया है। वहीं दनकौर के लतीफपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय व घरों में बाढ़ का पानी घुस गया था। जलस्तर तो घट गया लेकिन विद्यालय सुचारू नहीं हो सका। किसान अशोक शर्मा ने बताया, खादर के जंगल में किसानों की 1 हजार बीघे से अधिक धान की फसल बाढ़ के पानी में डूब गई थी। किसानों की मांग है कि सरकार किसानों की फसलों में हुए नुकसान की भरपाई करे। जेवर के झुप्पा, कानीगढ़ी, शमश्मनगर, पूरन नगर, छोटा हिप्पा में भी किसानों की खेती प्रभावित हुई।
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