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बॉर्डर पर बिछड़ी दोनों सगी बहनें अभी तक नहीं मिली
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ग्रेटर नोएडा/बिलासपुर/जेवर। जिले के कई विद्यार्थी यूक्रेन से निकलकर रोमानिया और अन्य पड़ोसी देशों में पहुंच चुके है, लेकिन अभी उनकी घर वापसी का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। वहीं यूक्रेन में रूस का हमला तेज होने की सूचना मिलते ही परिजन परेशान हो जाते हैं। अब सभी बच्चों के आने का इंतजार कर रहे हैं। असतौली गांव की दो सगी बहनें आंचल और मोनिका यूक्रेन से बाहर निकल चुकी हैं। बड़ी बहन आंचल रोमानिया बॉर्डर के पास सुकेवा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 37 किमी दूर एक स्टेडियम में ठहरी है। आंचल ने बताया कि स्टेडियम की व्यवस्था अच्छी है। वहीं छोटी बहन मोनिका रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट में एक शेल्टर होम में है। सभी भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं। यहां 180 बच्चे रुके हुए हैं। मोनिका ने बताया कि अधिकारी नाम लिख कर ले गए हैं, लेकिन अभी तक पता कि वो कब निकलेंगे। उसने बताया कि यहां पर रहने में किसी तरह की दिक्कत नहीं हो रही है। वह अपना सभी सामान यूक्रेन में छोड़ आई थीं। जिसमें लैपटॉप, मोबाइल, चार्जर, टैबलेट व बिस्कुट है। वहां से निकली मोनिका के साथ ओडिसा की यूरेका, महाराष्ट्र की स्वाति भी है। दोनों बहन दो दिन पहले रोमानिया बॉर्डर पर अलग-अलग हो गई थी। तब से अभी तक वो मिली नहीं है। केवल फोन पर एक-दूसरे का हालचाल ले रही हैं।
खौफ के साये में दस रातों से नहीं सोया है तनुज
देवटा गांव निवासी तनुज भाटी 20 बच्चों के साथ एक हॉस्टल में रुका हुआ है। उसने बताया कि यहां से पहले लड़कियों के ग्रुप को भारत भेजा जाएगा। उसके बाद लड़कों को निकाला जाएगा। वह अपनी बारी आने का इंतजार कर रहा है। उसने बताया कि वह दस दिन से सो नहीं सका है। यहां आकर अपने आप को सुरक्षित महसूस कर रहा है। कुछ आराम मिला है। फ्लाइट कब जाएगी, इसका अभी नहीं पता है।
30 घंटे से घर आने का इंतजार कर रहा है कौशल
जेवर निवासी कौशल तालान पिछले 30 घंटे से रोमानिया में शेल्टर होम में है। वो घर वापस आने का इंतजार कर रहा है। शेल्टर होम में 600 और छात्र भारत आने का इंतजार कर रहे हैं। फोन पर बातचीत में कौशल कुमार ने बताया कि 30 घंटे पहले यूक्रेन से निकलकर रोमानिया पहुंच चुका है। एक फुटबॉल स्टेडियम में बने शेल्टर होम में है। बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण मूलभूत सुविधाओं मिलने में परेशानी हो रही है। दूतावास से संपर्क किया जा रहा है, लेकिन फ्लाइट के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल रही है। कौशल की परिवार से लगातार बातचीत हो रही है। परिजनों का कहना है कि वापस आने के बाद ही राहत मिलेगी।
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खौफ के साये में दस रातों से नहीं सोया है तनुज
देवटा गांव निवासी तनुज भाटी 20 बच्चों के साथ एक हॉस्टल में रुका हुआ है। उसने बताया कि यहां से पहले लड़कियों के ग्रुप को भारत भेजा जाएगा। उसके बाद लड़कों को निकाला जाएगा। वह अपनी बारी आने का इंतजार कर रहा है। उसने बताया कि वह दस दिन से सो नहीं सका है। यहां आकर अपने आप को सुरक्षित महसूस कर रहा है। कुछ आराम मिला है। फ्लाइट कब जाएगी, इसका अभी नहीं पता है।
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30 घंटे से घर आने का इंतजार कर रहा है कौशल
जेवर निवासी कौशल तालान पिछले 30 घंटे से रोमानिया में शेल्टर होम में है। वो घर वापस आने का इंतजार कर रहा है। शेल्टर होम में 600 और छात्र भारत आने का इंतजार कर रहे हैं। फोन पर बातचीत में कौशल कुमार ने बताया कि 30 घंटे पहले यूक्रेन से निकलकर रोमानिया पहुंच चुका है। एक फुटबॉल स्टेडियम में बने शेल्टर होम में है। बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण मूलभूत सुविधाओं मिलने में परेशानी हो रही है। दूतावास से संपर्क किया जा रहा है, लेकिन फ्लाइट के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल रही है। कौशल की परिवार से लगातार बातचीत हो रही है। परिजनों का कहना है कि वापस आने के बाद ही राहत मिलेगी।
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