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Noida News: टेंडर प्रक्रिया में ही अटका रह गया मोरना डिपो का कायाकल्प

Wed, 23 Sep 2026 11:41 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2026 11:41 PM IST
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The revamp of Morna Depot remains stalled at the tender stage itself.
- मई में शुरू हुई प्रक्रिया के बाद भी आगे नहीं बढ़ा काम, 170 करोड़ से टर्मिनल विकसित करने की थी योजना
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-35 स्थित मोरना बस डिपो को आधुनिक बस टर्मिनल के रूप में विकसित करने की योजना फिलहाल टेंडर प्रक्रिया से आगे नहीं बढ़ सकी है। करीब 170 करोड़ रुपये की लागत से डिपो का कायाकल्प कर यहां यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित करने और दूसरे राज्यों के लिए बस सेवाओं का विस्तार करने की योजना बनाई गई थी। प्रक्रिया शुरू हुए कई माह बीतने के बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
परियोजना के तहत मोरना डिपो को बस टर्मिनल के रूप में विकसित किया जाना है। यहां यात्रियों के लिए बेहतर प्रतीक्षालय, सुविधाएं और बसों के संचालन के लिए जरूरी व्यवस्थाएं विकसित की जानी हैं। इसके साथ ही हिमाचल, कश्मीर, मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों के लिए लंबी दूरी की बस सेवाएं शुरू करने की योजना भी प्रस्तावित थी। यहां तक की शॉपिंग काम्पलेक्स भी परिसर में विकसित किया जाना था। परिवहन निगम के आरएम मनोज कुमार सिंह ने बताया टर्मिनल की योजना मुख्यालय स्तर से की जा रही है।
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सात कंपनियों ने लगाई थी बोली
टर्मिनल को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने के लिए परिवहन निगम की ओर से टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई थी। उपलब्ध टेंडर रिकॉर्ड के मुताबिक परियोजना की अनुमानित लागत 170 करोड़ रुपये है। टेंडर आठ जून को बंद हुआ और इसमें सात बोलियां प्राप्त हुईं। इसके बाद तकनीकी मूल्यांकन की प्रक्रिया हुई, लेकिन अभी तक परियोजना के लिए काम आवंटित होने की जानकारी दर्ज नहीं है।
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बदहाल व्यवस्था के बीच इंतजार
मोरना डिपो की मौजूदा स्थिति को देखते हुए टर्मिनल के कायाकल्प की दरकार लंबे समय से है। जून में डिपो में चालक-परिचालकों ने भी मूलभूत सुविधाओं की कमी की शिकायत रहती है। प्रतीक्षालय में सीमित बेड, पंखे-कूलर की कमी, शौचालय और पेयजल जैसी समस्याएं भी हैं। डिपो पर बसों की संख्या बढ़ने के साथ सुविधाओं पर दबाव भी बढ़ रहा है।



लंबी दूरी की बसों का भी इंतजार
मोरना डिपो से पहले से ही लखनऊ, आगरा, हापुड़ समेत कई शहरों के लिए बसों का संचालन होता है। आधुनिक टर्मिनल के रूप में विकसित करने से लंबी दूरी के लिए भी बस सेवाएं शुरू होनी थीं। ऐसे में अन्य जिलों और निजी बसों पर यात्रियों को निर्भर नहीं रहना पड़ता।
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