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Noida News: पद सहायक लेखाकार का, मानदेय लेखाकार का मिल रहा
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- दो माह पूर्व डीएम ने जांच के दिए थे निर्देश, मातहतों ने मामला ठंडे बस्ते में डाला
- बेसिक शिक्षा विभाग में करीब सात साल पहले आउटसोर्स पर हुई थी भर्ती
संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग में अजब-गजब खेल हैं। अधिकारियों की मेहरबानी पर सहायक लेखाकार पद पर भर्ती हुए कर्मचारी को लेखाकार का मानदेय दिया जा रहा है। दो माह पूर्व जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी के संज्ञान में मामला आने पर उन्होंने जांच के निर्देश दिए थे। जांच कमेटी भी बनी, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अधिकारी मामले में गोलमोल जवाब देकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग में करीब सात साल पहले आउटसोर्स पर सहायक लेखाकार, कंप्यूटर ऑपरेटर आदि पदों पर भर्तियां हुई थीं। राजेपुर ब्लॉक में सहायक लेखाकार के पद पर एक कर्मचारी की नियुक्ति हुई थी। विभागीय सूत्रों ने बताया कि नियुक्ति के बाद सेटिंग-गेटिंग कर कर्मचारी एसएसए (सर्व शिक्षा अभियान) कार्यालय में लेखाकार के पद पर काम करने लगा।
उसे मानदेय लेखाकार पद का मिला रहा है। इसकी शिकायत जिलाधिकारी से कई बार की गईं। डीएम ने जांच के आदेश भी दिए, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। सूत्रों ने बताया कि लेखाकार पद पर कार्य कर रहे कर्मचारी को नियुक्ति पत्र भी जारी नहीं हुआ है। शैक्षिक अभिलेख भी फर्जी लगे हैं। करीब दो माह पहले डीएम ने मामले की जांच करने के निर्देश भी दिए थे, लेकिन ऊंची पहुंच के चलते मामला दबा दिया गया। इस मामले की जांच गहनता से कराई जाए तो कई परतें खुलकर सामने आएंगी।
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जिम्मेदार बोले-मामले की जांच
‘इस मामले के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। कार्यभार संभालने भी ज्यादा दिन नहीं हुए हैं। अब मामला संज्ञान में आया है। इसकी गहनता से जांच कराई जाएगी। दिखवाया जाएगा कि कर्मचारी की नियुक्ति कब और किस पद पर हुई थी। नियुक्ति पत्र की भी जानकारी की जाएगी। अगर फर्जीवाड़ा निकला तो कार्रवाई की जाएगी।’- डॉ. अनुपम अवस्थी, प्रभारी बीएसए।
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- बेसिक शिक्षा विभाग में करीब सात साल पहले आउटसोर्स पर हुई थी भर्ती
संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग में अजब-गजब खेल हैं। अधिकारियों की मेहरबानी पर सहायक लेखाकार पद पर भर्ती हुए कर्मचारी को लेखाकार का मानदेय दिया जा रहा है। दो माह पूर्व जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी के संज्ञान में मामला आने पर उन्होंने जांच के निर्देश दिए थे। जांच कमेटी भी बनी, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अधिकारी मामले में गोलमोल जवाब देकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग में करीब सात साल पहले आउटसोर्स पर सहायक लेखाकार, कंप्यूटर ऑपरेटर आदि पदों पर भर्तियां हुई थीं। राजेपुर ब्लॉक में सहायक लेखाकार के पद पर एक कर्मचारी की नियुक्ति हुई थी। विभागीय सूत्रों ने बताया कि नियुक्ति के बाद सेटिंग-गेटिंग कर कर्मचारी एसएसए (सर्व शिक्षा अभियान) कार्यालय में लेखाकार के पद पर काम करने लगा।
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उसे मानदेय लेखाकार पद का मिला रहा है। इसकी शिकायत जिलाधिकारी से कई बार की गईं। डीएम ने जांच के आदेश भी दिए, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। सूत्रों ने बताया कि लेखाकार पद पर कार्य कर रहे कर्मचारी को नियुक्ति पत्र भी जारी नहीं हुआ है। शैक्षिक अभिलेख भी फर्जी लगे हैं। करीब दो माह पहले डीएम ने मामले की जांच करने के निर्देश भी दिए थे, लेकिन ऊंची पहुंच के चलते मामला दबा दिया गया। इस मामले की जांच गहनता से कराई जाए तो कई परतें खुलकर सामने आएंगी।
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जिम्मेदार बोले-मामले की जांच
‘इस मामले के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। कार्यभार संभालने भी ज्यादा दिन नहीं हुए हैं। अब मामला संज्ञान में आया है। इसकी गहनता से जांच कराई जाएगी। दिखवाया जाएगा कि कर्मचारी की नियुक्ति कब और किस पद पर हुई थी। नियुक्ति पत्र की भी जानकारी की जाएगी। अगर फर्जीवाड़ा निकला तो कार्रवाई की जाएगी।’- डॉ. अनुपम अवस्थी, प्रभारी बीएसए।