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12 साल से मिल रहा तारीख पर तारीख का दर्द... नहीं मिले फ्लैट
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नोएडा (सुशील पांडेय)। जेपी इंफ्राटेक के विभिन्न प्रोजेक्ट के 22 हजार फ्लैट खरीदार 12 साल से आशियाने का सपना देख रहे हैं। खरीदार सात साल से बिल्डर के पीछे तो पांच साल से अदालत के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर अदालत की राह देख रहे लोगों को अभी तक नहीं पता कि कब निर्माण एजेंसी का चयन होगा और कब अधूरे फ्लैट तैयार किए जाएंगे।
सेक्टर-128 के जेपी विश टाउन क्रीसेंट होम्स में 2010 में रश्मि सिंघल ने फ्लैट की बुकिंग कराई थी तो उनकी बेटी उम्र में काफी छोटी थी। इसके बाद बेटी ने पढ़ाई पूरी की और नौकरी करने के लिए बाहर चली गई। रश्मि बताती हैं कि बेटी के साथ घर में रहने का सपना अधूरा ही रह गया। वह आज भी किराये के मकान में रह रही हैं और बैंक की ईएमआई भर रही हैं। जेपी का प्रोजेक्ट नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की दिवालिया प्रक्रिया में बुरी तरह फंसा है। अगर जल्द समाधान निकले तो अधूरे फ्लैट पूरे करने में चार साल लगेंगे। सभी पांच वर्ष से अदालत के का चक्कर लगा रहे हैं। जेपी इंफ्राटेक के मामले में अगस्त 2017 से दिवालिया प्रक्रिया चल रही है।
पांच साल से अदालत में है मामला
एनसीएलटी की ओर से अनुज जैन को इंटरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) नियुक्त किया गया है। आईआरपी की ओर से ऐसी एजेंसी का चयन करने का काम चल रहा है जो अधूरे निर्माण पूरे कर सके। इसके लिए पांच वर्ष से कवायद चल रही है। इसमें नेशनल बिल्डिंग लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीबीसी) और सुरक्षा रियल्टर्स के बीच सुरक्षा पर कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (सीओसी) ने मुहर लगा दी है, लेकिन अब तक एनसीएलटी ने मुहर नहीं लगाई है। एनसीएलटी की ओर से समाधान योजना पर मुहर लगाने के बाद सुरक्षा रियल्टर्स की ओर से काम शुरू किया जा सकेगा।
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किसानों के पैसे वापसी पर यमुना प्राधिकरण अड़ा
कोर्ट प्रक्रिया में शामिल रहने वाले कुछ खरीदारों का कहना है कि यमुना प्राधिकरण ने जिस जमीन का अधिग्रहण किया था, उस एवज में किसानों का मुआवजा देना है। यह करीब 1690 करोड़ आंका गया है। यमुना प्राधिकरण का कहना है कि जो भी कंपनी अधूरे निर्माण पूरे करने के लिए आएगी। उसे यह पैसे देने होंगे, जबकि सुरक्षा रियल्टर्स इससे मुकर रहा है। अब मामला एनसीएलटी कोर्ट में चल रहा है।
12500 खरीदारों को मिल पाया फ्लैट
जेपी के प्रोजेक्ट एनसीएलटी में जाने से पहले चार हजार फ्लैटों पर कब्जा मिला था। इसके अलावा करीब 8500 फ्लैटों का काम आईआरपी की ओर से कराकर कब्जा दिया गया, लेकिन अब भी 22 हजार फ्लैट खरीदारों घर मिलने बाकी हैं।
यह है जेपी का मामला
जेपी के नोएडा सेक्टर-128, 132, 151, फॉर्मूला वन रेस के पास, टप्पल और आगरा में प्रोजेक्ट हैं। सभी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया चल रही है। इनमें समाधान योजना के तहत काम चल रहा है। एक एजेंसी का चयन करना है जो अधूरे निर्माण पूरे करे और लोगों को फ्लैट दिलाए। अब इसके लिए जो भी एजेंसी आएगी उसे करोड़ों रुपये जेपी की संपत्तियों से जुटाने होंगे। इसके बाद खरीदारों का बकाया भी मिलेगा।
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सेक्टर-128 के जेपी विश टाउन क्रीसेंट होम्स में 2010 में रश्मि सिंघल ने फ्लैट की बुकिंग कराई थी तो उनकी बेटी उम्र में काफी छोटी थी। इसके बाद बेटी ने पढ़ाई पूरी की और नौकरी करने के लिए बाहर चली गई। रश्मि बताती हैं कि बेटी के साथ घर में रहने का सपना अधूरा ही रह गया। वह आज भी किराये के मकान में रह रही हैं और बैंक की ईएमआई भर रही हैं। जेपी का प्रोजेक्ट नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की दिवालिया प्रक्रिया में बुरी तरह फंसा है। अगर जल्द समाधान निकले तो अधूरे फ्लैट पूरे करने में चार साल लगेंगे। सभी पांच वर्ष से अदालत के का चक्कर लगा रहे हैं। जेपी इंफ्राटेक के मामले में अगस्त 2017 से दिवालिया प्रक्रिया चल रही है।
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पांच साल से अदालत में है मामला
एनसीएलटी की ओर से अनुज जैन को इंटरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) नियुक्त किया गया है। आईआरपी की ओर से ऐसी एजेंसी का चयन करने का काम चल रहा है जो अधूरे निर्माण पूरे कर सके। इसके लिए पांच वर्ष से कवायद चल रही है। इसमें नेशनल बिल्डिंग लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीबीसी) और सुरक्षा रियल्टर्स के बीच सुरक्षा पर कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (सीओसी) ने मुहर लगा दी है, लेकिन अब तक एनसीएलटी ने मुहर नहीं लगाई है। एनसीएलटी की ओर से समाधान योजना पर मुहर लगाने के बाद सुरक्षा रियल्टर्स की ओर से काम शुरू किया जा सकेगा।
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किसानों के पैसे वापसी पर यमुना प्राधिकरण अड़ा
कोर्ट प्रक्रिया में शामिल रहने वाले कुछ खरीदारों का कहना है कि यमुना प्राधिकरण ने जिस जमीन का अधिग्रहण किया था, उस एवज में किसानों का मुआवजा देना है। यह करीब 1690 करोड़ आंका गया है। यमुना प्राधिकरण का कहना है कि जो भी कंपनी अधूरे निर्माण पूरे करने के लिए आएगी। उसे यह पैसे देने होंगे, जबकि सुरक्षा रियल्टर्स इससे मुकर रहा है। अब मामला एनसीएलटी कोर्ट में चल रहा है।
12500 खरीदारों को मिल पाया फ्लैट
जेपी के प्रोजेक्ट एनसीएलटी में जाने से पहले चार हजार फ्लैटों पर कब्जा मिला था। इसके अलावा करीब 8500 फ्लैटों का काम आईआरपी की ओर से कराकर कब्जा दिया गया, लेकिन अब भी 22 हजार फ्लैट खरीदारों घर मिलने बाकी हैं।
यह है जेपी का मामला
जेपी के नोएडा सेक्टर-128, 132, 151, फॉर्मूला वन रेस के पास, टप्पल और आगरा में प्रोजेक्ट हैं। सभी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया चल रही है। इनमें समाधान योजना के तहत काम चल रहा है। एक एजेंसी का चयन करना है जो अधूरे निर्माण पूरे करे और लोगों को फ्लैट दिलाए। अब इसके लिए जो भी एजेंसी आएगी उसे करोड़ों रुपये जेपी की संपत्तियों से जुटाने होंगे। इसके बाद खरीदारों का बकाया भी मिलेगा।