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Noida News: तटबंध की जितनी मरम्मत, उतना कटान

Thu, 11 Sep 2025 12:07 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 11 Sep 2025 12:07 AM IST
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The more the embankment is repaired, the more the erosion
- कई जगहों पर बहुत कम बची है तटबंध के ढलान की मिट्टी
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- दोनों ओर से तटबंध के पीछे रास्ता बनाने का काम भी चल रहा
- बुधवार की दोपहर होते होते बढ़ी पानी की रफ्तार, कटान जारी
आंकड़ों में समझें हालात
-100 घंटे से चल रहा तटबंध पर कटान
-800 मीटर तटबंध का ऊपरी हिस्सा गंगा में समाया
-200 मीटर की दूरी में हालात चिंताजनक, पतली परत ही बची
-500 से ज्यादा लोग तटबंध को बचाने में लगे हुए हैं
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। बैराज-रावली तटबंध को बचाने के लिए बुधवार को युद्ध स्तर पर काम होता नजर आया। पर हालात की बात करें तो वो अभी भी चिंता जनक बने हुए हैं। तटबंध में अभी करीब 150 से 200 मीटर हिस्सा ऐसा हैं, जहां पर मिट्टी बहुत कम बची है और कटान तेजी से हो रहा है। उधर तटबंध के पीछे दोनों ओर से नया रास्ता बनाने का काम भी दिनभर चलता रहा।
बैराज-रावली तटबंध पर सोमवार की रात जब पानी का रिसाव शुरू हुआ था, तो बिजनौर शहर तक बाढ़ की आशंका ने सभी की नींद उड़ा दी थी। ढांग गिरने से वह खतरा टला तो मंगलवार को दोबारा यहां काम शुरू हुआ। हालात को देख मजदूरों के साथ-साथ पोकलेन मशीन, जेसीबी लगाई गई। डंफरों से दोनों ओर मिट्टी डालकर तटबंध के पीछे नया रास्ता बनाया गया, ताकि कटान वाले स्थान तक संसाधन आराम से पहुंच सकें।
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बुधवार की दोपहर तक तटबंध के बीच में करीब 200 मीटर हिस्सा ऐसा था, जहां सबसे ज्यादा खतरा बना हुआ था। वहां केवल मजदूर रेत के बोरे ही डाल पा रहे थे।

- तेज बहाव से आगे की ओर बढ़ रहा कटान
बुधवार की सुबह गंगा का जलस्तर कम था। बताया जा रहा है कि सुबह पानी कम हुआ तो कटान भी धीमा हो गया। दोपहर होते होते जलस्तर फिर से 78 हजार के आसपास पहुंच गया। ऐसे में कटान की रफ्तार तेज हो गई। बैराज की ओर तटबंध पर गंगा की सीधे धारा टकरा रही है, जिससे कटान आगे की ओर बढ़ना शुरू हो गया है।
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- तेज भंवर को देख सता रही चिंता
तटबंध के अंदर अब तक 500 से ज्यादा पेड़ काटकर डाले जा चुके हैं। वहीं हजारों बोरे रेत डाला गया है। इतना करने के बावजूद कटान नहीं रुक पा रहा। वहां पर गंगा नदी में भंवर बनते नजर आ रहे हैं, वहीं गंगा का पानी तेज आवाज के साथ आगे बढ़ रहा है। काम कर रहे लोगों के सामने ही उसमें डाले जा रहे पेड़, बोरे, बल्लियां, सब कुछ बहता हुआ दिख रहा है।
- तेज हवा में बह निकली नाव, ड्रेजिंग मशीन को रेस्क्यू किया
बुधवार की सुबह प्रशासन ने एक ड्रेजिंग मशीन मंगवाई। इसे धारा के उस पार ले जाना था, ताकि वहां से गंगा की धारा का रुख बदला जा सके। ऐसा होता तो तटबंध पर कटान रुक जाता। नाव के सहारे पहले कुछ मजदूर धारा के उस पार भेजे गए। इसके बाद करीब पांच टन वजनी मशीन का नाव पर चढ़ाया गया और धारा के उस पार ले जाने की कोशिश शुरू हुई। तेज हवा और पानी के बहाव में यह नाव मशीन को लेकर आगे की तरह बहने लगी। बाद में आगे जाकर मशीन को ही रेस्क्यू करना पड़ा। यह अभियान बीच में ही रोकना पड़ा।
-- बैराज के साथ ही बना था तटबंध
बिजनौर गंगा बैराज का निर्माण 1984 में हुआ था। गंगा की धारा को बैराज तक पहुंचाने और पीछे रुका पानी शहर की ओर न जाए, इसके लिए बैराज से रावली तक करीब आठ किमी लंबे तटबंध का निर्माण भी हुआ। इस तटबंध पर सड़क भी बनाई गई, जो यहां से बैराज जाने के लिए सुलभ रास्ता भी बन गया। अब तब गंगा ने कटान किया तो लोग इस बात को लेकर भी हैरान है कि इसके अंदर गंगा का रेत ही निकल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि तटबंध के अंदर पत्थर होते तो शायद इस तरह कटान नहीं होता।

- अभी भी डर के साए में हैं लोग
भले ही तटबंध को बचाने का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन तटबंध पर मौजूद ग्रामीणों का कहना है कि धारा का रुख नहीं बदला तो यह कटान ऐसे ही होता रहेगा। जहां जगह कमजोर हो गई है, वहां इसे रोक पाना बहुत मुश्किल होगा। वहीं दूसरी ओर धर्मनगरी, बंगाली कॉलोनी, नवलपुर के लोग पहले ही सहमे हुए हैं।

-- तटबंध को बचाने के लिए बढ़ाए संसाधन : डीएम
डीएम जसजीत कौर ने बताया संसाधन बढ़ाए गए हैं। जेसीबी मशीन से नया रास्ता भी बनाया जा रहा है। साथ ही कई डंपर मिट्टी डालने का काम कर रहे हैं। इसके अलावा ग्रामीण और कर्मचारी वहां मरम्मत में लगे हुए हैं। प्रयास किया जा रहा है कि तटबंध को सुरक्षित किया जा सके।
- कब-कब बने रावली क्षेत्र में जलभराव के हालात
- 2010 में रावली से लेकर बेगावाला तक का क्षेत्र में मालन का पानी भर गया
- 2013 में आपदा के समय भी मालन के पानी से यहां जलभराव हुआ और रावली रोड बंद हो गई, मेरठ पौड़ी हाईवे पर भी पानी उतरा।
- 2020-21 में भी मालन का तटबंध टूटने से यहां पानी भर गया, कई गांवों में कई दिन तक पानी रहा था।
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