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Noida News: दिल्ली में बैठा सरगना चला रहा था ग्रेनो में ड्रग्स फैक्टरी
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- कपड़े के बंडल में ड्रग्स छुपाकर बाइक टैक्सी और निजी कार से पहुंचाते थे दिल्ली के आईएनए मार्केट
- काले धंधे से आए पैसे के स्रोत को सही दिखाने के लिए बना रखीं थीं दो फर्जी कंपनियां
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ओमिक्राॅन-1 के मथुरापुर में चलाई जा रही ड्रग्स फैक्टरी मामले में अहम खुलासा हुआ है। पुलिस पूछताछ में पता चला है कि दिल्ली में बैठा सरगना ग्रेनो में ड्रग्स फैक्टरी चला रहा था। वहीं से ड्रग्स बनाकर सप्लाई करने के निर्देश देता था। ग्रेनो से पकड़े गए चारो आरोपी कपड़े के बंडल में ड्रग्स छुपाकर बाइक टैक्सी और निजी कारों से दिल्ली के आईएनए मार्केट के पास पहुंचाते थे।
जांच में पता चला है कि ड्रग्स की काली कमाई से जुटाए गए पैसे को व्हाइट मनी के तौर पर दिखाने के लिए आरोपियों ने दो फर्जी कंपनियां खोल रखी थीं। इनमें एक फर्टिलाइजर और दूसरी कपड़े के व्यापार से जुड़ी थी। असल में इन कंपनियों में व्यापार नहीं होता था। इनके खातों में काले कारोबार से हासिल रकम जमा कराई जाती थी। पुलिस के मुताबिक ओमिक्रॉन-1 की ड्रग्स फैक्टरी से कुछ फोन नंबर मिले हैं। नंबरों की जांच में पता चला कि आरोपी दिल्ली में बैठे किसी व्यक्ति के लगातार संपर्क में थे। इन नंबरों की जांच चल रही है। अहम है कि बृहस्पतिवार को पुलिस ने थाना ईकोटेक-1 क्षेत्र में एमडीएमए ड्रग्स बनाने की फैक्टरी का खुलासा किया था। मौके से चार नाइजीरियाई को गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों के पास से 26.7 किलो ड्रग्स और ड्रग्स बनाने का कच्चा माल बरामद हुआ था। जिनकी कीमत करीब 150 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
ड्रग्स के काले धंधे में पहले पकड़े गए आरोपियों से जुड़े थे तार
पुलिस जांच में सामने आया है कि ओमिक्राॅन-1 क्षेत्र में ही पिछले एक वर्ष में पकड़े गए ड्रग्स के दो अन्य मामलों से आरोपियों के तार जुड़े थे। पकड़े गए चारों आरोपी उनसे संपर्क में थे। बताया जा रहा है कि इन सभी मामलों का सरगना एक ही था। जो दिल्ली से ऑपरेट कर रहा था। ओमिक्रॉन-1 में ड्रग्स की फैक्ट्री लगाने की वजह भी यही है कि यहां पर नाइजीरियाई नागरिक पहले भी अपना सेट अप बना चुके थे।
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अफगानिस्तान और अफ्रीका तक सप्लाई के सुराग मिले
पुलिस जांच में दिल्ली के आईएनए मार्केट के पास पहुंचाए गए ड्रग्स के बंडल की सप्लाई अफगानिस्तान और अफ्रीका तक करने के सुराग मिले हैं। वहीं देश के अंदर भी कपड़ों के बंडल मुंबई और कोलकाता भेजे जाने के बिल मिले हैं। पुलिस फिलहाल मान रही है कि मुंबई और कोलकाता तक कपड़े के बंडलों में ड्रग्स की सप्लाई की जा रही थी। इसके अलावा अन्य शहरों में भी ट्रेन और बसों से ड्रग्स भेजने की बात पता चली है।
किरायेदारों के सत्यापन का अभियान चलेगा
ओमिक्रान-1 में ड्रग्स फैक्टरी के पकड़े जाने के बाद एक बार फिर ग्रेटर नोएडा में रहने वाले किरायेदारों की पहचान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस अधिकारियों ने तय किया है कि सभी थाना क्षेत्रों में किरायेदारों का सत्यापन किया जाएगा। मकान मालिक को यह जानकारी देनी होगी कि उसके यहां पर कितने दिनों से और कहां के किरायेदार रहते हैं।
नाइजीरिया की भाषा के जानकार की मदद ले रही पुलिस
ड्रग्स फैक्टरी से मिले मोबाइल और दस्तावेज मिले में नाइजीरियाई भाषा का बातचीत दर्ज है। पुलिस ने इन दस्तावेजों के विवरण को अच्छी तरह से जानने के लिए नाइजीरियाई भाषा के जानकार की भी मदद ले रही है।
कोट
चारों नाइजीरियाई नागरिकों से जो दस्तावेज, मोबाइल फोन आदि मिले हैं उसके आधार पर गिरोह के बदमाशों की जानकारी जुटाई जा रही है। मामले में कुछ अहम सुराग मिले हैं जिनसे जांच में मदद मिली है। - साद मियां खान, डीसीपी
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- काले धंधे से आए पैसे के स्रोत को सही दिखाने के लिए बना रखीं थीं दो फर्जी कंपनियां
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ओमिक्राॅन-1 के मथुरापुर में चलाई जा रही ड्रग्स फैक्टरी मामले में अहम खुलासा हुआ है। पुलिस पूछताछ में पता चला है कि दिल्ली में बैठा सरगना ग्रेनो में ड्रग्स फैक्टरी चला रहा था। वहीं से ड्रग्स बनाकर सप्लाई करने के निर्देश देता था। ग्रेनो से पकड़े गए चारो आरोपी कपड़े के बंडल में ड्रग्स छुपाकर बाइक टैक्सी और निजी कारों से दिल्ली के आईएनए मार्केट के पास पहुंचाते थे।
जांच में पता चला है कि ड्रग्स की काली कमाई से जुटाए गए पैसे को व्हाइट मनी के तौर पर दिखाने के लिए आरोपियों ने दो फर्जी कंपनियां खोल रखी थीं। इनमें एक फर्टिलाइजर और दूसरी कपड़े के व्यापार से जुड़ी थी। असल में इन कंपनियों में व्यापार नहीं होता था। इनके खातों में काले कारोबार से हासिल रकम जमा कराई जाती थी। पुलिस के मुताबिक ओमिक्रॉन-1 की ड्रग्स फैक्टरी से कुछ फोन नंबर मिले हैं। नंबरों की जांच में पता चला कि आरोपी दिल्ली में बैठे किसी व्यक्ति के लगातार संपर्क में थे। इन नंबरों की जांच चल रही है। अहम है कि बृहस्पतिवार को पुलिस ने थाना ईकोटेक-1 क्षेत्र में एमडीएमए ड्रग्स बनाने की फैक्टरी का खुलासा किया था। मौके से चार नाइजीरियाई को गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों के पास से 26.7 किलो ड्रग्स और ड्रग्स बनाने का कच्चा माल बरामद हुआ था। जिनकी कीमत करीब 150 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
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ड्रग्स के काले धंधे में पहले पकड़े गए आरोपियों से जुड़े थे तार
पुलिस जांच में सामने आया है कि ओमिक्राॅन-1 क्षेत्र में ही पिछले एक वर्ष में पकड़े गए ड्रग्स के दो अन्य मामलों से आरोपियों के तार जुड़े थे। पकड़े गए चारों आरोपी उनसे संपर्क में थे। बताया जा रहा है कि इन सभी मामलों का सरगना एक ही था। जो दिल्ली से ऑपरेट कर रहा था। ओमिक्रॉन-1 में ड्रग्स की फैक्ट्री लगाने की वजह भी यही है कि यहां पर नाइजीरियाई नागरिक पहले भी अपना सेट अप बना चुके थे।
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अफगानिस्तान और अफ्रीका तक सप्लाई के सुराग मिले
पुलिस जांच में दिल्ली के आईएनए मार्केट के पास पहुंचाए गए ड्रग्स के बंडल की सप्लाई अफगानिस्तान और अफ्रीका तक करने के सुराग मिले हैं। वहीं देश के अंदर भी कपड़ों के बंडल मुंबई और कोलकाता भेजे जाने के बिल मिले हैं। पुलिस फिलहाल मान रही है कि मुंबई और कोलकाता तक कपड़े के बंडलों में ड्रग्स की सप्लाई की जा रही थी। इसके अलावा अन्य शहरों में भी ट्रेन और बसों से ड्रग्स भेजने की बात पता चली है।
किरायेदारों के सत्यापन का अभियान चलेगा
ओमिक्रान-1 में ड्रग्स फैक्टरी के पकड़े जाने के बाद एक बार फिर ग्रेटर नोएडा में रहने वाले किरायेदारों की पहचान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस अधिकारियों ने तय किया है कि सभी थाना क्षेत्रों में किरायेदारों का सत्यापन किया जाएगा। मकान मालिक को यह जानकारी देनी होगी कि उसके यहां पर कितने दिनों से और कहां के किरायेदार रहते हैं।
नाइजीरिया की भाषा के जानकार की मदद ले रही पुलिस
ड्रग्स फैक्टरी से मिले मोबाइल और दस्तावेज मिले में नाइजीरियाई भाषा का बातचीत दर्ज है। पुलिस ने इन दस्तावेजों के विवरण को अच्छी तरह से जानने के लिए नाइजीरियाई भाषा के जानकार की भी मदद ले रही है।
कोट
चारों नाइजीरियाई नागरिकों से जो दस्तावेज, मोबाइल फोन आदि मिले हैं उसके आधार पर गिरोह के बदमाशों की जानकारी जुटाई जा रही है। मामले में कुछ अहम सुराग मिले हैं जिनसे जांच में मदद मिली है। - साद मियां खान, डीसीपी