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Noida News: घरों में सप्लाई हो रहे पानी की जांच ठंडे बस्ते में
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-300 से ज्यादा सोसाइटियों के छह लाख से अधिक निवासियों का स्वास्थ्य खतरे में
-स्वास्थ्य विभाग को पानी की जांच लैब के लिए नहीं मिल पाए उपकरण
-15 दिन में लैब शुरू करने का किया था वादा, 5 माह में भी नहीं हुई शुरू
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। स्वास्थ्य विभाग का 300 से ज्यादा सोसाइटी में पानी की सप्लाई की जांच का दावा फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है। विभाग में शुरू होने वाली पानी जांच लैब को पांच महीने के बाद भी उपकरण नहीं मिल पाए हैं। जबकि उस दौरान विभाग ने 15 दिनाें के अंदर लैब शुरू होने का दावा किया था। विभाग ने सोसाइटी में रह रहे छह लाख लोगों के स्वास्थ्य को देखते हुए यह कदम उठाया था। इसके जरिए पानी में बैक्टीरिया की जांच करनी थी।
पिछले दिनों ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित 20 से ज्यादा सोसाइटी के निवासी दूषित पानी पीने से बीमार हो गए थे। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सोसाइटी में शिविर लगाया, जहां कई सोसाइटी में 200 से ज्यादा लोग बीमार पाए गए थे। इस दौरान विभाग की ओर से मरीजों को दवा दी गई थी। साथ ही, विभाग ने पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। जांच में पानी में एस्चेरिचिया कोली (ई कोली) नामक खतरनाक बैक्टीरिया पाया गया।
यह बैक्टीरिया मनुष्यों और जानवरों के पाचन तंत्र में पाया जाता है। यह दूषित पानी या भोजन के माध्यम से फैलता है और दस्त, पेट दर्द व बुखार जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। कुछ ई कोली स्ट्रेन काफी खतरनाक होते हैं और खूनी दस्त या गुर्दे की विफलता जैसी गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकते हैं। लैब शुरू करने के पीछे विभाग का कहना था कि भले ही निवासी सप्लाई के पानी को नहीं पीते हैं, लेकिन ब्रश व कुल्ला करने के दौरान पानी पेट में प्रवेश कर रहा है। इससे यह समस्या हो रही है।
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वर्जन
अभी तक उपकरण नहीं आए हैं। इसको लेकर जल्द मीटिंग की जाएगी।
डॉ. टीकम सिंह, एसीएमओ
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-स्वास्थ्य विभाग को पानी की जांच लैब के लिए नहीं मिल पाए उपकरण
-15 दिन में लैब शुरू करने का किया था वादा, 5 माह में भी नहीं हुई शुरू
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। स्वास्थ्य विभाग का 300 से ज्यादा सोसाइटी में पानी की सप्लाई की जांच का दावा फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है। विभाग में शुरू होने वाली पानी जांच लैब को पांच महीने के बाद भी उपकरण नहीं मिल पाए हैं। जबकि उस दौरान विभाग ने 15 दिनाें के अंदर लैब शुरू होने का दावा किया था। विभाग ने सोसाइटी में रह रहे छह लाख लोगों के स्वास्थ्य को देखते हुए यह कदम उठाया था। इसके जरिए पानी में बैक्टीरिया की जांच करनी थी।
पिछले दिनों ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित 20 से ज्यादा सोसाइटी के निवासी दूषित पानी पीने से बीमार हो गए थे। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सोसाइटी में शिविर लगाया, जहां कई सोसाइटी में 200 से ज्यादा लोग बीमार पाए गए थे। इस दौरान विभाग की ओर से मरीजों को दवा दी गई थी। साथ ही, विभाग ने पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। जांच में पानी में एस्चेरिचिया कोली (ई कोली) नामक खतरनाक बैक्टीरिया पाया गया।
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यह बैक्टीरिया मनुष्यों और जानवरों के पाचन तंत्र में पाया जाता है। यह दूषित पानी या भोजन के माध्यम से फैलता है और दस्त, पेट दर्द व बुखार जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। कुछ ई कोली स्ट्रेन काफी खतरनाक होते हैं और खूनी दस्त या गुर्दे की विफलता जैसी गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकते हैं। लैब शुरू करने के पीछे विभाग का कहना था कि भले ही निवासी सप्लाई के पानी को नहीं पीते हैं, लेकिन ब्रश व कुल्ला करने के दौरान पानी पेट में प्रवेश कर रहा है। इससे यह समस्या हो रही है।
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अभी तक उपकरण नहीं आए हैं। इसको लेकर जल्द मीटिंग की जाएगी।
डॉ. टीकम सिंह, एसीएमओ