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अस्पताल प्रशासन ने अपनी सुविधा के लिए बढ़ा दी जनता की परेशानी

Mon, 15 Nov 2021 08:27 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 15 Nov 2021 08:27 PM IST
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The hospital administration increased the problems of the public for its convenience
जिला अस्पताल में टीका लगवाने के ​​​लए लाइन में इंतजार करते लोग।
नोएडा। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में चल रहे कोरोनारोधी टीकाकरण अभियान पर फिर अव्यवस्थाओं की मार पड़ी है। अस्पताल प्रशासन ने अपनी सुविधा के लिए महिलाओं का टीकाकरण केंद्र बंद करा दिया। अब एक ही केंद्र पर महिला व पुरुषों को टीके लगाए जा रहे हैं। इससे लोगों की दुविधा बढ़ गई है। महिलाओं के लिए सीएमएस ऑफिस ब्लॉक में केंद्र निर्धारित किया गया था, ताकि अस्पताल में भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि, टीकाकरण के लिए आने वाले लोगों की संख्या में कमी नहीं आई है। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन ने महिलाओं का टीकाकरण केंद्र बंद करा दिया है। फूड कोर्ट में बने केंद्र में पुरुषों की भीड़ जुटती थी, अब यहीं पर महिलाएं भी लंबी कतारों में घंटों नंबर आने का इंतजार करती दिख रही हैं। सोमवार को सुबह से ही टीकाकरण के लिए भीड़ जुटनी शुरू हो गई। स्लॉट बुक कराकर और बिना स्लॉट के आने वालों से लोगों को नियंत्रित कर पाना सुरक्षा कर्मियों के लिए भी परेशानी का सबब बना रहा।
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क्योंकि मैडम को भीड़ पसंद नहीं...
अस्पताल के कुछ सुरक्षा कर्मियों ने बताया कि महिलाओं के टीकाकरण की वजह से सीएमएस कार्यालय के बाहर भीड़ रहती थी, जो सीएमएस मैडम को पसंद नहीं थी। इसलिए यहां टीकाकरण बंद कराकर एक ही जगह पर टीके लगाए जा रहे हैं। दूसरी वजह टीकाकरण स्टाफ की कमी को भी बताया जा रहा है। बहरहाल, वजह चाहें जो भी हो, लेकिन परेशानी आम जनता की ही बढ़ रही है।
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घर-घर बताएंगे बच्चों की देखभाल के तरीके
जिले में राष्ट्रीय नवजात शिशु सप्ताह की शुरुआत सोमवार से हो गई। 21 नवंबर तक आयोजित होने वाले इस सप्ताह के दौरान आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर बच्चों की देखभाल के तरीके बताएंगी। साथ ही, नवजात में जन्मजात दोषों की पहचान कर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी और धात्री महिलाओं को स्तनपान के लाभ के बारे में जानकारी दी जाएगी। शिशु मृत्युदर में कमी लाने की दिशा में काम किया जाएगा। ई-लांच के माध्यम से मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार शर्मा ने कार्यक्रम की शुरुआत की।
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उन्होंने बताया कि 16 व 17 नवंबर को स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू), न्यू बोर्न स्पेशलाइजेशन यूनिट (एनबीएसयू) और प्रसव कक्ष की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए सहयोगी संस्था यूनिसेफ, यूपीटीएसयू व एनआईए के प्रतिनिधियों को साथ दौरा किया जाएगा। इस दौरान मिले सुझावों पर एक रिपोर्ट तैयार कर स्वास्थ्य महानिदेशालय को भेजी जाएगी। उत्तर प्रदेश में शिशु मृत्यु दर प्रति एक हजार पर 41 है। जबकि, राष्ट्रीय स्तर पर यह दर प्रति एक हजार पर 30 है। तीन चौथाई शिशुओं की मृत्यु जन्म के एक माह में हो जाती है। डॉ. भारत भूषण ने बताया कि शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए शिशुओं की देखभाल, स्तनपान को बढ़ावा व बीमार नवजात शिशुओं की पहचान के लिए जागरूकता पर जोर दिया जाएगा।
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