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Noida News: रोजगार का सपना टूटा, हाथ में आ गई चाय की केतली
Mon, 06 Oct 2025 02:08 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
Updated Mon, 06 Oct 2025 02:08 AM IST
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रोजगार का सपना टूटा, हाथ में आ गई चाय की केतली
लखनऊ। सम्मानजनक काम और आत्मनिर्भरता का सपना लेकर रोजगार मेले में पहुंचे दिव्यांग युवा आज हताश हैं। कौशल विकास विभाग ने राजधानी में 172 दिव्यांगजनों को नौकरी देने का दावा तो जरूर किया, लेकिन धरातल पर कहानी कुछ और ही है। रोजगार मेेले में चयनित कई युवाओं को ''स्टॉल संचालक'' बनाकर चाय और नाश्ता बेचने का काम थमा दिया गया। कहीं किराने की दुकान पर ग्राहक संभालने की ड्यूटी, तो कहीं घर का काम करने का प्रस्ताव मिला। युवाओं का आरोप है कि विभाग ने रोजगार देने के बजाय सिर्फ संख्या बढ़ाने की खानापूर्ति की।
एचडीएफसी में मार्केटिंग का वादा, पर फोन तक नहीं आया
जानकीपुरम निवासी श्वेता तिवारी बताती हैं कि रोजगार मेले के दौरान एचडीएफसी बैंक में मार्केटिंग का काम देने का भरोसा दिलाया गया था। कहा गया था कि एक हफ्ते के अंदर कॉल और ईमेल आएगा, पर अब तक न कोई कॉल आया, न नौकरी मिली। यही हाल एक और संस्थान के दावे का भी रहा।
किराने की दुकान पर लगी नौकरी, पर काम मिला चाय बेचने का
गोसाईंगंज के उदल का भी चयन स्नातक योग्यता के आधार पर हुआ। उदल ने बताया कि कंपनी की ओर से फोन आया और इकाना स्टेडियम के पास की एक किराना दुकान पर नौकरी लगाई गई। सोचा था सामान संभालने का काम होगा, पर चाय बेचने को कहा गया। विरोध किया तो 10 दिन बाद निकाल दिया
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घर का काम करने का मिला ऑफर, नौकरी का सपना अधूरा
मोहनलालगंज के विमल कुमार राठौर बताते हैं कि रोजगार मेले में चयन तो हुआ, पर स्टॉल संचालक का काम बोलकर दाल व चावल बेचने का काम दिया गया। एक और साथी का भी वहीं चयन हुआ। उसने बताया कि नौकरी के नाम पर घर का काम करने को बोला जाता था। इसी वजह से नौकरी नहीं कर पाए। अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, पर मामला सिफर रहा।
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सख्ती करने पर छोड़ दिया काम
एम्प्लायर विकास गुप्ता ने बताया कि उदल और विमल को नौकरी पर रखा गया था। शिकायत मिल रही थी कि सामान देकर पैसा लेना भूल जाते थे। इसके अलावा भी काम में अन्य लापरवाही बरत रहे थे। सख्ती करने पर काम छोड़ दिया।
दावे ऊंचे, हकीकत कड़वी
राजधानी में दो महीने पहले कौशल विभाग की ओर से दिव्यांगज रोजगार अभियान के तहत रोजगार मेले का आयोजन किया गया। मिशन निदेशक पुलकित खरे के अनुसार, 25 कंपनियों में 1500 पदों के लिए साक्षात्कार हुए। साक्षात्कार में आईटीआई, डिप्लोमा, स्नातक और परास्नातक की योग्यता रखने वाले युवा शामिल हुए। इस दौरान 325 में से सफल 175 युवाओं को नौकरी के ऑफर भी दिए गए। पर युवाओं के अनुसार, डाटा वेबसाइट पर भले अपडेट हो गया हो, पर रोजगार अब भी अधूरा सपना है।
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एचडीएफसी में मार्केटिंग का वादा, पर फोन तक नहीं आया
जानकीपुरम निवासी श्वेता तिवारी बताती हैं कि रोजगार मेले के दौरान एचडीएफसी बैंक में मार्केटिंग का काम देने का भरोसा दिलाया गया था। कहा गया था कि एक हफ्ते के अंदर कॉल और ईमेल आएगा, पर अब तक न कोई कॉल आया, न नौकरी मिली। यही हाल एक और संस्थान के दावे का भी रहा।
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किराने की दुकान पर लगी नौकरी, पर काम मिला चाय बेचने का
गोसाईंगंज के उदल का भी चयन स्नातक योग्यता के आधार पर हुआ। उदल ने बताया कि कंपनी की ओर से फोन आया और इकाना स्टेडियम के पास की एक किराना दुकान पर नौकरी लगाई गई। सोचा था सामान संभालने का काम होगा, पर चाय बेचने को कहा गया। विरोध किया तो 10 दिन बाद निकाल दिया
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घर का काम करने का मिला ऑफर, नौकरी का सपना अधूरा
मोहनलालगंज के विमल कुमार राठौर बताते हैं कि रोजगार मेले में चयन तो हुआ, पर स्टॉल संचालक का काम बोलकर दाल व चावल बेचने का काम दिया गया। एक और साथी का भी वहीं चयन हुआ। उसने बताया कि नौकरी के नाम पर घर का काम करने को बोला जाता था। इसी वजह से नौकरी नहीं कर पाए। अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, पर मामला सिफर रहा।
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सख्ती करने पर छोड़ दिया काम
एम्प्लायर विकास गुप्ता ने बताया कि उदल और विमल को नौकरी पर रखा गया था। शिकायत मिल रही थी कि सामान देकर पैसा लेना भूल जाते थे। इसके अलावा भी काम में अन्य लापरवाही बरत रहे थे। सख्ती करने पर काम छोड़ दिया।
दावे ऊंचे, हकीकत कड़वी
राजधानी में दो महीने पहले कौशल विभाग की ओर से दिव्यांगज रोजगार अभियान के तहत रोजगार मेले का आयोजन किया गया। मिशन निदेशक पुलकित खरे के अनुसार, 25 कंपनियों में 1500 पदों के लिए साक्षात्कार हुए। साक्षात्कार में आईटीआई, डिप्लोमा, स्नातक और परास्नातक की योग्यता रखने वाले युवा शामिल हुए। इस दौरान 325 में से सफल 175 युवाओं को नौकरी के ऑफर भी दिए गए। पर युवाओं के अनुसार, डाटा वेबसाइट पर भले अपडेट हो गया हो, पर रोजगार अब भी अधूरा सपना है।