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Noida News: शरजील, सफूरा, तन्हा समेत अन्य को आरोप मुक्त करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती

Tue, 07 Feb 2023 07:03 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 07 Feb 2023 07:03 PM IST
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The decision to discharge Sharjeel, Safura, Tanha and others was challenged in the High Court
जामिया हिंसा मामला : पुलिस का तर्क, निचली अदालत ने अहम तथ्यों को किया नजरअंदाज
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने 2019 के जामिया हिंसा मामले में शरजील इमाम, सफूरा जरगर, आसिफ इकबाल तन्हा और आठ अन्य को आरोपमुक्त करने संबंधी निचली अदालत के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। याचिका पर बुधवार को सुनवाई की संभावना है। याचिका में पुलिस ने तर्क रखा कि निचली अदालत ने कई अहम तथ्यों व गवाहों के बयानों को नजरअंदाज किया है। इसके अलावा बिना कारण जांच को लेकर कड़ी टिप्पणियां की हैं और इसे खारिज किया जाए।
शनिवार को साकेत की निचली अदालत ने अपने आदेश में इमाम, तनहा, जरगर, मोहम्मद अबुजर, उमैर अहमद, मोहम्मद शोएब, महमूद अनवर, मोहम्मद कासिम, मोहम्मद बिलाल नदीम, शहजार रजा खान और चंदा यादव को आरोपमुक्त कर दिया था। दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया था कि वे 2019 में विश्वविद्यालय में हुई हिंसा के दौरान दंगा और गैरकानूनी अपराधों में शामिल थे। हालांकि, मामले पर विचार करने के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) अरुल वर्मा ने केवल मोहम्मद इलियास के खिलाफ आरोप तय किए और अन्य को आरोपमुक्त कर दिया। अपने विस्तृत आदेश में न्यायाधीश वर्मा ने दुर्भावनापूर्ण चार्जशीट दायर करने के लिए दिल्ली पुलिस की कड़ी आलोचना करते हुए कहा था कि मामला अपूरणीय सबूतों से रहित है।
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अदालत ने कहा कि हालांकि भीड़ ने उस दिन तबाही और व्यवधान पैदा किया, पुलिस वास्तविक अपराधियों को पकड़ने में विफल रही और इमाम, तन्हा, जरगर और अन्य को बलि का बकरा बनाया। अदालत ने कहा कि पुलिस ने मनमाने ढंग से भीड़ में से कुछ लोगों को आरोपी और अन्य को पुलिस गवाह बनाने के लिए चुना है। यह चेरी-पिकिंग निष्पक्षता के सिद्धांत के लिए हानिकारक है।
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न्यायाधीश वर्मा ने कहा कि असहमति भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अमूल्य मौलिक अधिकार का विस्तार है, जो एक ऐसा अधिकार था जिसे कायम रखने के लिए हम अदालतों ने शपथ ली है। विरोध और विद्रोह के बीच के अंतर को समझने के लिए जांच एजेंसियों के लिए डिसाइडरेटम है। बाद को निर्विवाद रूप से दबाना होगा। हालांकि, पूर्व को स्थान दिया जाना चाहिए, एक मंच, असहमति के लिए शायद कुछ ऐसा है जो एक नागरिक की अंतरात्मा को चुभता है।

वर्तमान मामला दिसंबर 2019 में जामिया मिलिया इस्लामिया में और उसके आसपास हुई हिंसा से संबंधित है, जब कुछ छात्रों और स्थानीय लोगों ने घोषणा की कि वे नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में संसद की ओर चलेंगे। हालांकि, विरोध ने जल्द ही हिंसक रूप ले लिया, और जैसे ही पुलिस ने उन्हें शांत करने के लिए बल प्रयोग किया, कुछ विरोध करने वाले छात्रों ने कथित तौर पर विश्वविद्यालय में प्रवेश किया।
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