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Noida News: शादी का वादा कर महिला से दुष्कर्म के आरोपी को नहीं मिली अग्रिम जमानत
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अदालत ने कहा, आरोपी ने कभी शादी का इरादा नहीं दिखाया व महिला को गलत मंशा से धोखे में रखा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने शादी के बहाने एक महिला का यौन उत्पीड़न करने और गर्भपात कराने के आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि उसने कभी शादी करने का इरादा नहीं दिखाया और महिला को गलत मंशा से धोखे में रखा। इस वजह से याचिकाकर्ता की याचिका खारिज की जाती है।
न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने आरोपी के वकील के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उनके बीच मनमुटाव के कारण उनके मुवक्किल ने युवती से शादी करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि तथ्य बताते हैं कि उसने कभी शादी की दिशा में कदम उठाने की कोशिश नहीं की। वह तब तक शादी से परहेज करता रहा, जब तक कि उनके रिश्ते में खटास नहीं आ गई और उसका गर्भपात नहीं करा दिया गया। आरोपी ने महिला को हमेशा इस भ्रम में रखा कि वह उससे शादी करेगा, जबकि उसने ऐसा कभी नहीं किया। अदालत ने आदेश में कहा कि उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के साथ याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत देने के लिए कोई मामला नहीं बनता है। इस वजह से याचिका खारिज की जाती है।
महिला ने अपनी शिकायत में कहा है कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसका शारीरिक शोषण किया और जब उसने इसका विरोध किया तो उसने वादा किया कि वह उससे शादी करेगा।
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शिकायत के मुताबिक, इस वादे पर उसने कई बार शारीरिक संबंध बनाए, जिससे वह गर्भवती हो गई। उसने उसे कुछ गोलियां दीं, जिसके बाद उसका गर्भपात हो गया। महिला ने यह भी कहा है कि न केवल आरोपी ने उसे धोखा दिया, बल्कि उसे भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल भी किया। अतिरिक्त लोक अभियोजक अमित साहनी ने दलील दी कि पीड़िता ने एक सीडी प्रदान की है, जिसमें आरोपी द्वारा फोन पर दी गई धमकियों की रिकॉर्डिंग है। साहनी ने कहा कि उसने अपने और आरोपी के बीच मोबाइल चैट भी उपलब्ध कराई और इस चैट में उसने उससे शादी करने का वादा किया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने शादी के बहाने एक महिला का यौन उत्पीड़न करने और गर्भपात कराने के आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि उसने कभी शादी करने का इरादा नहीं दिखाया और महिला को गलत मंशा से धोखे में रखा। इस वजह से याचिकाकर्ता की याचिका खारिज की जाती है।
न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने आरोपी के वकील के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उनके बीच मनमुटाव के कारण उनके मुवक्किल ने युवती से शादी करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि तथ्य बताते हैं कि उसने कभी शादी की दिशा में कदम उठाने की कोशिश नहीं की। वह तब तक शादी से परहेज करता रहा, जब तक कि उनके रिश्ते में खटास नहीं आ गई और उसका गर्भपात नहीं करा दिया गया। आरोपी ने महिला को हमेशा इस भ्रम में रखा कि वह उससे शादी करेगा, जबकि उसने ऐसा कभी नहीं किया। अदालत ने आदेश में कहा कि उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के साथ याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत देने के लिए कोई मामला नहीं बनता है। इस वजह से याचिका खारिज की जाती है।
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महिला ने अपनी शिकायत में कहा है कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसका शारीरिक शोषण किया और जब उसने इसका विरोध किया तो उसने वादा किया कि वह उससे शादी करेगा।
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शिकायत के मुताबिक, इस वादे पर उसने कई बार शारीरिक संबंध बनाए, जिससे वह गर्भवती हो गई। उसने उसे कुछ गोलियां दीं, जिसके बाद उसका गर्भपात हो गया। महिला ने यह भी कहा है कि न केवल आरोपी ने उसे धोखा दिया, बल्कि उसे भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल भी किया। अतिरिक्त लोक अभियोजक अमित साहनी ने दलील दी कि पीड़िता ने एक सीडी प्रदान की है, जिसमें आरोपी द्वारा फोन पर दी गई धमकियों की रिकॉर्डिंग है। साहनी ने कहा कि उसने अपने और आरोपी के बीच मोबाइल चैट भी उपलब्ध कराई और इस चैट में उसने उससे शादी करने का वादा किया।