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करोड़ों की ठगी के आरोपियों ने क्रिप्टो करेंसी में बदली रकम

Tue, 10 Aug 2021 01:15 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 10 Aug 2021 01:15 AM IST
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The accused of cheating of crores changed the amount in crypto currency
नोएडा। कॉल सेंटर, अस्पताल व बड़ी कंपनियों में किराए पर वाहनों लगाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह के चार मुख्य आरोपियों की तलाश जारी है। अब तक पांच करोड़ से अधिक की ठगी की बात सामने आई है। जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली है कि आरोपियों ने ठगी की रकम को क्रिप्टो करेंसी यानी बिटक्वाइन में बदल लिया है। पुलिस फर्जीवाड़ा की रकम के बारे में जानकारी प्राप्त कर रही है। इसके लिए पुलिस टीम ने सोमवार को एनसीआर में कई स्थानों पर दबिश भी दी।
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सेक्टर-58 कोतवाली पुलिस ने शनिवार को फर्जी कारजीनिया मल्टी सर्विस कंपनी का खुलासा करते हुए एमडी मलिका कोले को गिरफ्तार किया था। कंपनी की ओर से लोगों से बड़ी कंपनियों, अस्पतालों आदि में किराए पर वाहन लगाने के नाम पर चार से पांच लाख रुपये का निवेश कराया जाता था। इसके लिए लोगों को प्रति माह एक कार का 22 हजार रुपये देने का झांसा दिया जाता था। आरोपियों ने सौ से अधिक लोगों से ठगी की है। एसीपी रजनीश वर्मा ने बताया कि मामले में सुधांशु मिश्रा, मृत्युंजय शुक्ला, उसकी पत्नी अलका पांडेय, सतीश उर्फ रोशन फरार हैं। वहीं एक आरोपी तरुण को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
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उन्होंने बताया कि पुलिस जब मामले की पड़ताल करते हुए रोशन उर्फ सतीश के सेक्टर-75 स्थित फ्लैट पर पहुंची तो वहां इलेक्ट्रॉनिक सेटअप और सर्वर आदि सामान मिला। इस पर दूरसंचार विभाग की टीम ने भी वहां जांच की। अभी दूरसंचार विभाग ने सेटअप के बारे में कुछ अधिकृत जानकारी नहीं दी है। शुरुआती जांच में पता चला कि आरोपियों ने इस फर्जीवाड़े से कमाई की गई रकम को छिपाने के लिए बिटक्वाइन की खरीदारी की है। पुलिस अब इस दिशा में काम कर रही है।
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दफ्तर बदलने की थी तैयारी
एसीपी ने बताया कि जब पुलिस ने कंपनी के सेक्टर-132 स्थित दफ्तर पर छापा मारा तो पता चला कि आरोपी कार्यालय बदलने की तैयारी में जुटे थे। इससे पहले आरोपियों ने कंपनी का नाम बदलकर सेक्टर-142 और सेक्टर-137 में दफ्तर चलाया था। जांच में यह भी पता चला है कि सभी आरोपी अपना असली नाम किसी को नहीं बताते थे। एक दूसरे को अन्य नामों से संबोधित करते थे। पुलिस इनके कागजातों की भी जांच कर रही है, ताकि पता चल सके कि आरोपी फर्जी कागजात तो नहीं बनवाते थे।

यह है बिटक्वाइन
बिटक्वाइन एक आभासी मुद्रा है। इसका कोई भौतिक स्वरूप नहीं होता है। यह डिजिटल करेंसी है। इसे आप न तो देख सकते हैं न ही छू सकते हैं। यह इलेक्ट्रॉनिक तरीके से स्टोर होती है। अगर किसी के पास बिटक्वाइन हो तो वह आम मुद्रा की तरह कोई भी सामान खरीद सकता है।
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