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थैलेसीमिया दिवस आज:

Tue, 07 May 2024 07:47 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 07 May 2024 07:47 PM IST
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Thalassemia Day today: Delay in bone marrow transplant will increase the problems of Thalassemia patients.
थैलेसीमिया दिवस आज: बोनमैरो ट्रांसप्लांट में देरी बढ़ाएगी थैलेसीमिया मरीज की मुश्किलें
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- चाइल्ड पीजीआई में हर महीने आ रहे दो से तीन नए मरीज
- थैलेसीमिया से पीड़ित करीब 355 बच्चों का चल रहा इलाज
- हर महीने मरीजों के ब्लड ट्रांसफ्यूजन की होती जरूरत, आयरन की अधिकता बनी मुश्किल

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों में बोनमैरो ट्रांसप्लांट में देरी मुश्किलें बढ़ा सकती है। ऐसा बच्चे में लगातार ब्लड ट्रांसफ़्यूजन होने की वजह से होता है। ऐसे में थैलेसीमिया की बीमारी का पता चलने के एक साल के अंदर बोनमैरो ट्रांसप्लांट जरूरी हो जाता है। नोएडा में चाइल्ड पीजीआई में यह सुविधा निशुल्क दी जा रही है। यहां हर महीने दो से तीन नए मरीज रजिस्टर किए जा रहे हैं। वहीं करीब 355 मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
चाइल्ड पीजीआई की हेमेटोलाॅजी-आंकोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. नीता राधाकृष्णन ने बताया कि थैलेसीमिया के मामले अभी औसतन छह महीने की उम्र में चिह्नित कर लिए जाते हैं। यह अच्छी खबर है कि अब समय से इलाज भी शुरू हो जाता है। लेकिन, इतने से दिक्कतें दूर नहीं होंगीं। थैलेसीमिया से पीड़ित मरीज को अधिकांश मामलों में हर महीने खून चढ़ाने की जरूरत होती है। ऐसे मरीजों में लगातार ब्लड ट्रांसफ्यूजन से आयरन की मात्रा खून में बढ़ने लगती है। इसका असर इंडोक्राइन, लिवर और हार्ट पर शुरू हो जाता है। ऐसे में मल्टीऑर्गन फेल होने का खतरा बढ़ जाता है। सात साल की उम्र से पहले हुआ बोनमैरो ट्रांसप्लांट सफल रहता है। ट्रांसप्लांट से बिल्कुल भी डरने की जरूरत नहीं है।
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चाइल्ड पीजीआई में बोनमैरो ट्रांसप्लांट के प्रभारी डॉ. अनुज सिंह ने बताया कि परिवार में ही अगर बोनमैरो डोनर मिल जाए। इससे 85 से 90 फीसदी सफल परिणाम मिलते हैं। भाई-बहन में बोनमैरो ट्रांसप्लांट के लिए ह्यूमैन ल्यूकोसाइट एंटीजन मैच होने की संभावना सबसे अधिक होती है। ट्रांसप्लांट का खर्च भी बहुत अधिक होता है। ऐसे में एनजीओ और सरकार की आर्थिक मदद से इसे कराए जाने की कोशिश चाइल्ड पीजीआई में की जाती है। एक ट्रांसप्लांट में करीब 21 दिन से 100 दिन का समय लगता है। पहले 21 दिन मरीज को किसी भी संक्रमण से बचाने के लिए खासतौर पर तैयार बोनमैरो ट्रांसप्लांट चैंबर में विशेष निगरानी में रखा जाता है।
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इनसेट--

नैट जांच के बाद ही चढ़ सकता खून
थैलेसीमिया के मरीजों में सामान्य रूप से ब्लड बैंक से खून लेकर नहीं चढ़ा सकते हैं। चाइल्ड पीजीआई में इसके लिए अलग से न्यूक्यिक एसिड टेस्टिंग फेसिलिटी तैयार की गई है। इस जांच और जरूरी शोधन के बाद ही मरीज को खून चढ़ाया जाता है। ऐसा नहीं होने पर हेपेटाइटिस संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। निजी अस्पतालों में इसके लिए करीब 12 हजार रुपये का खर्च एक बार में आता है। इसके अलावा आयरन डिपोजिट को खत्म करने के लिए भी कीलेशन थैरेपी करनी होती है। इसका खर्च भी करीब 3000 रुपये है। चाइल्ड पीजीआई में यह अलग-अलग संस्थाओं की मदद से निशुल्क हो जाता है।


ट्रांसप्लांट के लिए बन रही नई यूनिट
चाइल्ड पीजीआई में बोनमैरो ट्रांसप्लांट के लिए आठ चेंबर की नई यूनिट तैयार हो रही है। इसी महीने के अंत तक इसका काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद ट्रांसप्लांट की क्षमता बढ़ने से वेटिंग भी बहुत कम हो जाएगी। यहां मरीजों के परिजनों की विशेष काउंसलिंग कर जल्दी से जल्दी ट्रांसप्लांट के लिए तैयार भी किया जाएगा।


इनसेट--
कुंडली संग शादी के लिए खून की जांच भी जरूरी
डॉ. नीता ने बताया कि हमने सरकार से मांग की है कि संभावित थैलेेसीमिया कैरियर को देखते हुए सभी गर्भवती की अनिवार्य स्क्रीनिंग, कैरियर स्टेटस मां बाप का पता होना चाहिए। एचसीए1सी जांच से यह संभव है जोकि हर जगह उपलब्ध है। शादी से पहले ही पति और पत्नी दोनों की भी स्क्रीनिंग होनी चाहिए। इसकी वजह यह है कि दोनों के थैलेेसीमिया कैरियर होने पर बच्चे के लिए खतरा दो गुना बढ़ जाता है। 100 में से छह लोगों के थैलेेसीमिया कैरियर होने की संभावना अलग-अलग रिसर्च से सामने आई है। बच्चे के भविष्य के लिए इसे जरूर कराएं।
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