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शिक्षक दिवस स्पेशल: कमजोर छात्रों को संभाला, छिपी प्रतिभा पहचानी और मुश्किल हालात में थामा हाथ

Sat, 05 Sep 2026 12:22 PM IST
Vijay Singh Pundir अंकुर त्रिपाठी, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
अंकुर त्रिपाठी, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Published by: Vijay Singh Pundir Updated Sat, 05 Sep 2026 12:22 PM IST
सार

गौतम बुद्ध नगर जिले में शिक्षकों की भूमिका केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि वे बच्चों की कमजोरियों को समझने, उनकी प्रतिभा को निखारने और मुश्किल समय में उनका सहारा बनने का भी कार्य कर रहे हैं। जिले के विभिन्न स्कूलों में ऐसे शिक्षकों की पहल सामने आई है, जिन्होंने विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं।

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Teachers in Gautam Buddha Nagar have transformed the lives of many students
शिक्षक दिवस स्पेशल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शिक्षक की भूमिका सिर्फ किताबों का पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं है। सही मायने में शिक्षक वह है, जो बच्चे की कमजोरी को समझे, उसकी प्रतिभा को पहचाने और जरूरत पड़ने पर मुश्किल समय में उसका हाथ थामे। जिले के अलग-अलग स्कूलों में ऐसे शिक्षकों की पहल सामने आई है, जिन्होंने विद्यार्थियों की जिंदगी में बदलाव लाने का काम किया। किसी ने पढ़ाई में पिछड़ रहे बच्चों के लिए अतिरिक्त समय निकाला तो किसी ने कक्षा में शांत रहने वाली छात्रा के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे मंच तक पहुंचाया। एक शिक्षक ने आर्थिक परेशानी से जूझ रहे छात्रों को स्कूल छोड़ने से बचाया तो दूसरे ने मैदान में छिपे खिलाड़ी को पहचानकर प्रतियोगिताओं तक पहुंचाया।

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कमजोर बच्चों को मिला अतिरिक्त सहारा 
उच्च प्राथमिक स्कूल डेरी मच्छछा की शिक्षिका अवंतिका ने पढ़ाई में कमजोर छात्रों की अलग पहचान कर उनके लिए अतिरिक्त समय देना शुरू किया। कठिन विषयों को आसान भाषा, गतिविधियों और रोजमर्रा के उदाहरणों से समझाया गया। इसका असर यह हुआ कि जो बच्चे पहले सवालों से घबराते थे, वे अब कक्षा में जवाब देने लगे। उनके अंकों के साथ आत्मविश्वास में भी सुधार आया।

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कॉपी में दिखी प्रतिभा, मिला मंच
जूनियर हाईस्कूल गुलावठी खुर्द की शिक्षिका कोमल चावला ने छात्रों की कॉपी में बने चित्रों को देखकर उसकी चित्रकारी की प्रतिभा पहचानी। शुरुआत में छात्र प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से झिझकते थे। उन्होंने लगातार प्रोत्साहित किया और स्कूल के बाद अभ्यास कराया। पहली कोशिश में सफलता नहीं मिली, लेकिन हौसला नहीं टूटने दिया गया। बाद में छात्रों ने प्रतियोगिताओं में पुरस्कार हासिल किए और अब कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देख रही है।

मजबूरी के कारण छूट रही पढ़ाई बचाई
कंपोजिट विद्यालय लुहारली के शिक्षक जितेंद्र कुमार ने छात्रों की लगातार गैरहाजिरी पर कारण जानने की कोशिश की। घर पहुंचने पर पता चला कि परिवार आर्थिक परेशानी से गुजर रहा है और छात्रों को भी जिम्मेदारियों में हाथ बंटाना पड़ रहा है। शिक्षक ने परिवार से बातचीत की, उपलब्ध सहायता की जानकारी दी और छात्र को दोबारा पढ़ाई से जोड़ा। अतिरिक्त समय देकर छूटा पाठ पूरा कराया गया। धीरे-धीरे उसकी उपस्थिति और परीक्षा परिणाम दोनों सुधरने लगे।

मैदान में पहचाना हुनर
प्राथमिक विद्यालय दुजाना एक के शिक्षक आशीष नागर की नजर छात्रों की खेल प्रतिभा पर पड़ी। पढ़ाई में सामान्य प्रदर्शन करने वाले छात्र खेल के मैदान में सबसे अलग नजर आ रहे थे। उन्होंने छात्रों को नियमित अभ्यास कराना शुरु किया। सीमित संसाधनों के बावजूद छात्रों ने ब्लॉक और फिर जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन किया। अब वह खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देख रहा है।

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