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Noida News: दवाओं की कमी से टीबी मरीजों पर एमडीआर का खतरा

Mon, 19 Aug 2024 07:39 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 19 Aug 2024 07:39 PM IST
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TB patients at risk of MDR due to lack of medicines
दवाओं की कमी से टीबी मरीजों पर एमडीआर का खतरा
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नौ महीने से संकट, अधिकारियों का दावा, पहले की तुलना में दो की जगह अब पांच दिन तक की दे रहे दवाएं



माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। दवाओं की कमी से जिले में टीबी के मरीजों के ऊपर मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस (एमडीआर) का खतरा बना हुआ है। करीब नौ महीने से संकट बरकरार है। आपूर्ति सामान्य नहीं हो पाने से जिले में अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों पर तीन से पांच दिन की दवा ही मरीजों को मिल पा रही है। दवा लेने के लिए मरीजों को अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक टीबी के मरीजों को 3-एफडीसी, 4-एफडीसी दवा दी जाती है। इन दोनों ही दवाओं का संकट बना हुआ है। कई बार मांग के बाद दवा की आपूर्ति हो पाती है। कुछ दवाएं लोकल परचेज से भी खरीदी जाती हैं। पहले मरीजों को दवा एक साथ छह से आठ महीने तक के लिए दे दी जाती थीं। कुछ दिन पहले तक मरीजों को एक या दो दिन की दवा स्वास्थ्य विभाग दे पा रहा था। अब इसमें मामूली सुधार हुआ है। इसके बाद भी अधिकतम पांच दिन की दवा मरीजों को मिल पा रही है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि एमडीआर टीबी के लिए जरूरी सेकंड लाइन दवा की दिक्कत करीब एक साल से बनी हुई थी। अब पिछले दो महीने से टीबी के मरीजों की फर्स्ट लाइन दवा की भी कमी हो गई है।
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गौतमबुद्ध नगर में करीब 8000 मरीज टीबी की बीमारी के इलाज के लिए पंजीकृत हैं। इनके सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज चल रह रहा है। करीब 2200 मरीजों का इलाज निजी अस्पतालों में होता है। सरकारी जिला अस्पताल और सीएमओ के लोकल परचेज शुरू करने के बाद निजी अस्पतालों के लिए भी दवा आपूर्ति में दिक्कतें शुरू हो गई हैं। वर्तमान व्यवस्था यह है कि न्यूनतम सात दिन की दवा मरीज को एक साथ दे दी जाए, जबकि मरीज की पूरे छह महीने की दवा डॉट्स कार्यकर्ता के पास रहनी चाहिए। इसके लिए एक मरीज की दवाओं का अलग बॉक्स बनाकर दिया जाता है। इसी में से मरीज की दवा निकालकर उसको नियमित फाॅलोअप के बाद दी जाती है।
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इनसेट-

2025 के अंत तक भारत को बनाया जाना है टीबी मुक्त
2025 के अंत तक पूरे भारत को टीबी मुक्त बनाया जाना है। 13 मार्च 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद टीबी की बीमारी को 2025 तक जड़ से खत्म करने की अपील कर चुके हैं। दवा आपूर्ति का संकट होने के बाद अब सवाल यह है कि क्या टीबी मुक्त जनपद या टीबी मुक्त भारत बनाने का लक्ष्य पूरा हो पाएगा।



इनसेट--

खतरनाक होती है एमडीआर टीबी

जिला अस्पताल के डॉक्टर का कहना है कि अगर टीबी की फर्स्ट लाइन की दवा छूटी तो ऐसे में मरीज को मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस (एमडीआर) विकसित हो जाता है। तब एमडीआर टीबी का इलाज छह महीने की जगह 20 महीने तक खिंचेगा। वहीं, दवा ठीक से नहीं ली गई तो जान भी जा सकती है।


टीबी के मरीजों को दवा मिलती रहे। इसके लिए स्थानीय स्तर पर भी दवा की खरीद की जा रही है। अब दो दिन की जगह पांच दिन तक की दवाएं मरीजों को दे पा रहे हैं। कोशिश है कि दवा आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो जाए।

- डॉ. आरपी सिंह, जिला टीबी अधिकारी।


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