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लजीज चिकन बिरयानी में 'जहर': कहीं आप भी तो यहां जाकर चाव से नहीं खाते? लगाया जाता है इसका तड़का
Thu, 30 Nov 2023 10:12 AM IST
शाहरुख खान
नवीन कुमार, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
नवीन कुमार, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 30 Nov 2023 10:12 AM IST
सार
गौतमबुद्धनगर के रेस्तरां में चिकन बिरयानी को लजीज बनाने के लिए सिंथेटिक रंग का तड़का लग रहा है। खाद्य विभाग की टीम ने सितंबर में सेक्टर-62 स्थित समा चिकन कॉर्नर से चिकन बिरयानी का नमूना लिया था। जांच में नमूना असुरक्षित निकाला है। चिकन बिरयानी में पीले रंग के सिंथेटिक रंग का प्रयोग पाया गया।
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फाइल फोटो
- फोटो : Social Media
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विस्तार
नोएडा के सेक्टर-62 स्थित रेस्तरां की चिकन बिरयानी में सिंथेटिक रंग परोसने का खुलासा हुआ है। स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताए जाने वाले सिंथेटिक रंग का इस्तेमाल चिकन बिरयानी को लजीज दिखने के लिए किया जा रहा था। खाद्य विभाग जल्द ही रेस्तरां संचालक के खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज कराएगा।
साथ ही अन्य शहर के अन्य रेस्तरां में सिथेंटिक रंग के इस्तेमाल की जांच की जाएगी। उधर कई और दुकानों से लिए गए पनीर और खोया में वसा की मात्रा कम पाई गई है। खाद्य विभाग की टीम ने सितंबर में सेक्टर-62 स्थित समा चिकन कॉर्नर से चिकन बिरयानी का नमूना लिया था।
जांच में नमूना असुरक्षित निकाला है। चिकन बिरयानी में पीले रंग के सिंथेटिक रंग का प्रयोग पाया गया। वहीं खाद्य विभाग ने नॉलेज पार्क तीन स्थित टर्क मेरिडियन बैंकेट हॉल से बेसन का नमूना लिया गया था। जांच में बेसन के मिलावटी होने की बात सामने आई है। नमूने में आटा और मटर की मिलावट मिली है। नमूना मानकों पर खरा नहीं उतर सका।
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वहीं बिसाहड़ा की एक दुकान से आइसक्रीम के नमूने में वसा कम मिली है। वहीं सेक्टर बीटा वन स्थित बिलिंक कॉमर्शियल की मलाई पनीर, सेक्टर-135 स्थित वीवीएस सिग्नेचर के खोया, रामपुर जांगीर स्थित अग्रवाल स्वीट्स से खोया, सेक्टर-51 स्थित स्टोर से पनीर, सेक्टर डेल्टा वन स्थित दिव्य आनंद डेयरी से पनीर और दादरी के डेयरीवाला से लिए गए खोया का नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे है। इनमें वसा की मात्रा 20 से 40 फीसदी पाई गई है। जो 50 फीसदी से ज्यादा होनी चाहिए। जल्द ही एडीएम कोर्ट के माध्यम से इन सभी पर जुर्माना लगाया जएगा।
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साथ ही अन्य शहर के अन्य रेस्तरां में सिथेंटिक रंग के इस्तेमाल की जांच की जाएगी। उधर कई और दुकानों से लिए गए पनीर और खोया में वसा की मात्रा कम पाई गई है। खाद्य विभाग की टीम ने सितंबर में सेक्टर-62 स्थित समा चिकन कॉर्नर से चिकन बिरयानी का नमूना लिया था।
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जांच में नमूना असुरक्षित निकाला है। चिकन बिरयानी में पीले रंग के सिंथेटिक रंग का प्रयोग पाया गया। वहीं खाद्य विभाग ने नॉलेज पार्क तीन स्थित टर्क मेरिडियन बैंकेट हॉल से बेसन का नमूना लिया गया था। जांच में बेसन के मिलावटी होने की बात सामने आई है। नमूने में आटा और मटर की मिलावट मिली है। नमूना मानकों पर खरा नहीं उतर सका।
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वहीं बिसाहड़ा की एक दुकान से आइसक्रीम के नमूने में वसा कम मिली है। वहीं सेक्टर बीटा वन स्थित बिलिंक कॉमर्शियल की मलाई पनीर, सेक्टर-135 स्थित वीवीएस सिग्नेचर के खोया, रामपुर जांगीर स्थित अग्रवाल स्वीट्स से खोया, सेक्टर-51 स्थित स्टोर से पनीर, सेक्टर डेल्टा वन स्थित दिव्य आनंद डेयरी से पनीर और दादरी के डेयरीवाला से लिए गए खोया का नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे है। इनमें वसा की मात्रा 20 से 40 फीसदी पाई गई है। जो 50 फीसदी से ज्यादा होनी चाहिए। जल्द ही एडीएम कोर्ट के माध्यम से इन सभी पर जुर्माना लगाया जएगा।
सिंथेटिक रंग हो सकता है खतरनाक
खाद्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सिंथेटिक रंग से स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंच सकता है। इसके सेवन से एलर्जी की समस्या, सांस फूलना, पेट में दर्द, ऐंठन, सूजन, इम्यूनिटी सिस्टम पर असर, लीवर पर असर पड़ सकता है।
खाद्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सिंथेटिक रंग से स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंच सकता है। इसके सेवन से एलर्जी की समस्या, सांस फूलना, पेट में दर्द, ऐंठन, सूजन, इम्यूनिटी सिस्टम पर असर, लीवर पर असर पड़ सकता है।
नोएडा के रेस्तरां से लिया गया चिकन बिरयानी का नमूना असुरक्षित निकाला है। रेस्तरां पर मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। अन्य रेस्तरां की जांच कर खाने में सिंथेटिक रंग के प्रयोग को रोका जाएगा। संचालकों को इसके प्रति जागरूक भी किया जाएगा। -अक्षय गोयल, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी गौतमबुद्ध नगर