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ट्विन टावर गिराने में सुपरटेक को वक्त देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

Fri, 29 Oct 2021 11:55 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 29 Oct 2021 11:55 PM IST
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Supreme Court refuses to give time to Supertech in demolition of twin towers
नई दिल्ली/नोएडा। सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक को नोएडा के एमराल्ड कोर्ट में ट्विन टावर गिराने तथा घर खरीदारों को पैसे चुकाने के लिए और मोहलत देने से इनकार कर दिया है। इस संबंध में सुपरटेक द्वारा दी गई नई याचिका को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि एक बार फैसला दे देने के बाद पीठ अलग-अलग तरह की अपीलों का नहीं सुन सकती और किसी तरह की रियायत नहीं दे सकती।
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पीठ ने कहा, आपको उन्हें पैसे देने होंगे। इस मामले में फैसला हो जाने के बाद हम अलग-अलग तरह की अपीलें नहीं सुन सकते। सुपरटेक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पराग त्रिपाठी ने कहा कि वो खुद भी याचिका तैयार किए जाने से संतुष्ट नहीं हैं इसलिए कोर्ट चाहे तो दिवाली अवकाश के बाद इस मुद्दे को सुन ले। उन्होंने कहा कि टावरों को गिराने और खरीदारों को भुगतान करने संबंधी कोर्ट आदेश का पालन करने के लिए उन्हें कुछ समय की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी राहत, फैसले की समीक्षा जैसी बात होगी और विविध अनुरोध में कंपनी को ऐसे प्रयास की अनुमति नहीं दी जा सकती।
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एजेंसियां बोलीं- ट्विन टावर गिराने में लगेंगे पांच माह
नोएडा। सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट के ट्विन टावर गिराने में कम से कम पांच माह लगेंगे। इसमें दो माह कार्ययोजना तैयार करने और तीन माह सुरक्षित तरीके से टावर गिराने में लगेंगे। सुपरटेक के संपर्क में आईं एजेंसियों ने यह राय दी है। इसके बाद प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी को सुपरटेक ने रिपोर्ट सौंपी है। इसमें सुप्रीम कोर्ट की ओर से आए फैसले के बाद अब तक किए गए कार्यों का जिक्र है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि सुपरटेक की ओर से अब तक एक्सपर्ट डेमोलिशन एसोसिएशन के प्रेसिडेंट मोहन रामनाथन, ब्रोक के कंट्री हेड मनमोहन कृष्णा, एग्जिक्यूड प्राइवेट लिमिटेड के हेड आनंद शर्मा, जेनेसिस इंजीनियरिंग के हेड पीयूष गांधी और एडिफिस इंजीनियरिंग के पार्टनर उत्कर्ष मेहता से ट्विन टावर गिराने को लेकर चर्चा हुई है। इसी कड़ी में आनंद शर्मा और पीयूष गांधी के साथ उनके विदेशी विशेष विलियम सिन्क्लेयर के साथ 18 अक्तूबर को ऑनलाइन बैठक हुई। इसके अलावा सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) के निदेशक डॉ. गोपाल कृष्णन, नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) के सीएमडी एके मित्तल भी इस काम में सहयोग कर रहे हैं।
निवासियों की सुरक्षा को ध्यान में रखना सबसे अहम
सुपरटेक के मुताबिक एक्सपर्ट मोहन रामनाथन ने भी कहा कि इसका स्ट्रक्चर बेहद यूनिक है और सुरक्षित तरीके से इसे गिराने के लिए कम से कम दो माह कार्य योजना बनाने में लगेंगे। इसमें आसपास के निवासियों की सुरक्षा का ध्यान रखना सबसे अहम है। इसमें साइट प्लान देखना होगा। यह भी देखना होगा कि यह इमारतें कितनी मजबूत हैं। यहां केवल स्ट्रक्चरल डिजाइन ही नहीं देखा जाएगा, बल्कि आसपास की एक-एक सोसाइटियों के एक-एक पिलर की मजबूती परखी जाएगी, ताकि ट्विन टावर गिराते समय कोई खतरा न हो। इसमें ट्विन टावर के आसपास की एटीएस सोसाइटी के अलावा एमराल्ड कोर्ट के अन्य टावर बेहद अहम हैं। इन सब में कम से कम तीन माह लगेंगे। दुनिया की कोई भी ऐसी एजेंसी नहीं है जो एक माह में इसे सुरक्षित तरीके से गिरा दे।
ट्विन टावर गिराने को तकनीक पर नहीं बनी एक राय
ट्विन टावर गिराने की तकनीकी के इस्तेमाल अब तक एक राय नहीं बन पाई है। शुक्रवार को सुपरटेक की ओर से बुलाई गई एजेंसियों ने ट्विन टावर का निरीक्षण किया। इसके बाद सुपरटेक के साथ मंथन भी किया, लेकिन कोई फैसला नहीं हो पाया। शनिवार को भी एजेंसियां निरीक्षण करेंगी।
एडिफिस इंजीनियरिंग के पार्टनर उत्कर्ष मेहता और दक्षिण अफ्रीका की कंपनी जेट डेमोलिशन पीटीवाई लिमिटेड से जुड़े ब्रिंकमेन, जेनेसिस के अधिकारी, दिल्ली के एक्सपर्ट बीआर चावला, सलाहकार मोहन रामनाथन आदि ट्विन टावर पर पहुंचे। यहां उन्होंने भूतल से लेकर चार-पांच तल तक एक-एक बिंदु पर निरीक्षण किया। उन्हें बताया गया कि वहां से एक गैस पाइप लाइन निकली है। इसके अलावा आसपास इमारतें हैं। सड़क की ओर बिजली की लाइनें हैं। उन्होंने इन सभी बिंदुओं पर विचार किया और आसपास की इमारतों का निरीक्षण करने की बात कही। उन्होंने कई प्रकार की रिपोर्ट मांगी है, जिसका वह अध्ययन करेंगे। इसके बाद वह किसी राय पर पहुंचेंगे। इससे पहले कई प्रकार की एनओसी भी लेनी होगी। सुरक्षित तरीके से इसे गिराया जा सकता है या नहीं, इस पर अभी कोई फैसला नहीं होने की बात बताई गई।

प्राधिकरण ने सुपरटेक के चार अनसोल्ड फ्लैट किए सील
सेक्टर-137 में सुपरटेक ईको सिटी के चार अनसोल्ड फ्लैट प्राधिकरण ने सील कर दिए हैं। सीलिंग के दौरान ग्रुप हाउसिंग, नियोजन विभाग के अलावा वर्क सर्किल-8 की टीम शामिल रही। दरअसल, पूरी कार्रवाई नियोजन विभाग की ओर से तय की गई थी। सोसाइटी में कई तरह की अनियमितताओं को लेकर प्राधिकरण ने सुपरटेक पर कार्रवाई की है। 2019 में सोसाइटी के लोगों ने प्राधिकरण से शिकयत की थी यहां लिफ्ट, पार्किंग सहित कई प्रकार के संसाधनों में कई तरह की समस्याएं हैं। इनका बिल्डर समाधान नहीं कर रहा है। इस बारे में प्राधिकरण की ओर से जांच भी की गई थी। बिल्डर की ओर से कई बार आगाह करने के बाद भी कमियां ठीक नहीं की गई तो सीलिंग का फैसला लिया गया। कमियां दूर करने के बाद ही सीलिंग हटेगी।
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