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सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट मामला : छह कानूनों के उल्लंघन की जांच से खुलेंगी भ्रष्टाचार की परतें
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सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट मामला : छह कानूनों के उल्लंघन की जांच से खुलेंगी भ्रष्टाचार की परतें
नोएडा। किसी भी ऊंची इमारत के निर्माण की अनुमति देते समय औद्योगिक विकास प्राधिकरण अलग-अलग अधिनियमों व कानूनों के आधार पर फैसला लेते हैं। यहां आवंटन से लेकर नक्शा पास करने के अलावा फ्लोर एरिया रेशियो सहित अलग से दूसरी अन्य अनुमति देते समय प्राधिकरण यह देखते हैं कि किसी कानून का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है। अगर ऐसा होता है तो यह नियम के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट के मामले में फैसले में इन सभी कानूनों की चर्चा की है। लिहाजा, एसआईटी की टीम एमराल्ड कोर्ट मामले में छह अधिनियमों व कानूनों के इर्दगिर्द भी जांच का घेरा कसेगी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से इन कानूनों के उल्लंघन की बात कही गई है। अब इनकी जांच के दौरान यह पता लगेगा कि कौन दोषी है।
सूत्रों के मुताबिक, इन छह अधिनियमों व कानूनों में नेशनल बिल्डिंग रेगुलेशंस (एनबीआर) 2006, नेशनल बिल्डिंग रेगुलेशंस 2010, नेशनल बिल्डिंग कोड ऑफ इंडिया (एनबीसी) 2005, यूपी 1975 एक्ट, यूपी अपार्टमेंट एक्ट 2010 और फायर सेफ्टी के नियम शामिल हैं। इसमें से कुछ अधिनियम व कानून पहले के बने हैं। कुछ कानून 2010 में आए। इनमें से कुछ अधिनियमों व कानूनों के आधार पर वर्तमान में प्राधिकरण का नियोजन विभाग काम करता है। कुछ कानूनों के माध्यम से फ्लैट खरीदारों के हितों की रक्षा होती है, इन्हीं पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। संभावना जताई जा रही है कि एमराल्ड कोर्ट मामले की जांच के दौरान एसआईटी टीम इन कानूनों के मानकों पर प्रोजेक्ट में दी गई संस्तुति की जांच करेगी और सच्चाई का पता लगाएगी।
मंगलवार को एसआईटी की जांच के दौरान भी नियोजन विभाग के अधिकारी ऐसे कानूनों की प्रतियां लेकर घूम रहे थे और जरूरत के हिसाब से एसआईटी के सामने प्रस्तुत कर रहे थे। कोर्ट ने साफ कहा है कि 26 नवंबर 2009 और 2 मार्च 2012 को प्राधिकरण की ओर से सैंक्शन किए गए बिल्डिंग प्लान दो इमारतों के बीच दूरी के मानक को लेकर एनबीआर 2006, एनबीआर 2010 और एनबीसी 2005 के नियमों का उल्लंघन है। इसके अलावा ग्रीन एरिया और दूसरे मसले पर यूपी अपार्टमेंट एक्ट 2010 के उल्लंघन की बात भी कही गई है। ऐसे में संभावना है कि इनको आधार बनाकर दोषियों की पहचान की जा रही हो।
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नोएडा। किसी भी ऊंची इमारत के निर्माण की अनुमति देते समय औद्योगिक विकास प्राधिकरण अलग-अलग अधिनियमों व कानूनों के आधार पर फैसला लेते हैं। यहां आवंटन से लेकर नक्शा पास करने के अलावा फ्लोर एरिया रेशियो सहित अलग से दूसरी अन्य अनुमति देते समय प्राधिकरण यह देखते हैं कि किसी कानून का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है। अगर ऐसा होता है तो यह नियम के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट के मामले में फैसले में इन सभी कानूनों की चर्चा की है। लिहाजा, एसआईटी की टीम एमराल्ड कोर्ट मामले में छह अधिनियमों व कानूनों के इर्दगिर्द भी जांच का घेरा कसेगी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से इन कानूनों के उल्लंघन की बात कही गई है। अब इनकी जांच के दौरान यह पता लगेगा कि कौन दोषी है।
सूत्रों के मुताबिक, इन छह अधिनियमों व कानूनों में नेशनल बिल्डिंग रेगुलेशंस (एनबीआर) 2006, नेशनल बिल्डिंग रेगुलेशंस 2010, नेशनल बिल्डिंग कोड ऑफ इंडिया (एनबीसी) 2005, यूपी 1975 एक्ट, यूपी अपार्टमेंट एक्ट 2010 और फायर सेफ्टी के नियम शामिल हैं। इसमें से कुछ अधिनियम व कानून पहले के बने हैं। कुछ कानून 2010 में आए। इनमें से कुछ अधिनियमों व कानूनों के आधार पर वर्तमान में प्राधिकरण का नियोजन विभाग काम करता है। कुछ कानूनों के माध्यम से फ्लैट खरीदारों के हितों की रक्षा होती है, इन्हीं पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। संभावना जताई जा रही है कि एमराल्ड कोर्ट मामले की जांच के दौरान एसआईटी टीम इन कानूनों के मानकों पर प्रोजेक्ट में दी गई संस्तुति की जांच करेगी और सच्चाई का पता लगाएगी।
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मंगलवार को एसआईटी की जांच के दौरान भी नियोजन विभाग के अधिकारी ऐसे कानूनों की प्रतियां लेकर घूम रहे थे और जरूरत के हिसाब से एसआईटी के सामने प्रस्तुत कर रहे थे। कोर्ट ने साफ कहा है कि 26 नवंबर 2009 और 2 मार्च 2012 को प्राधिकरण की ओर से सैंक्शन किए गए बिल्डिंग प्लान दो इमारतों के बीच दूरी के मानक को लेकर एनबीआर 2006, एनबीआर 2010 और एनबीसी 2005 के नियमों का उल्लंघन है। इसके अलावा ग्रीन एरिया और दूसरे मसले पर यूपी अपार्टमेंट एक्ट 2010 के उल्लंघन की बात भी कही गई है। ऐसे में संभावना है कि इनको आधार बनाकर दोषियों की पहचान की जा रही हो।
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