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Noida News: अस्पताल मालिक की डॉक्टर पत्नी से पूछताछ के लिए भेजा समन
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विवेक विहार के बेबी केयर न्यू बॉर्न अस्पताल में आग लगने से सात नवजातों की मौत का मामला
मालिक डॉ. नवीन और ड्यूटी पर तैनात डॉ. आकाश से पुलिस की टीम कर रही पूछताछ
मालिक समेत सभी डॉक्टरों, नर्स और पैरा मेडिकल स्टाफ की डिग्रियां जमा करवाने के लिए कहा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। विवेक विहार के बेबी केयर न्यू बॉर्न अस्पताल में आग लगने के बाद सात नवजातों की मौत के मामले में पुलिस अस्पताल के मालिक डॉ. नवीन और ड्यूटी पर तैनात डॉ. आकाश को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस ने मंगलवार को नवीन की पत्नी डॉ. जागृति को पूछताछ में शामिल होने के लिए समन भेजा है। दांतों की डाॅक्टर जागृति अस्पताल में साझेदार हैं। पुलिस का कहना है कि मामले में नवीन के साथ जागृति की भी जिम्मेदारी बनती है। ऐसे में उनसे बुधवार को पूछताछ हो सकती है।
वहीं, पुलिस की पूछताछ में आकाश ने खुद को बेकसूर बताया है। उनका कहना है कि डॉ. नवीन ने 40 हजार रुपये महीना सैलरी पर रखा था। आग लगने पर वे अस्पताल से भागे नहीं। आखिरी दम तक बच्चों को बचाने और सुरक्षित निकालने में मदद की। इधर, पुलिस ने नोटिस जारी कर अस्पताल के सभी डॉक्टरों, नर्स, पैरा मेडिकल स्टाफ के अलावा दूसरे कर्मचारियों से डिग्रियां मांगी हैं। सभी के मोबाइल और सीडीआर की पड़ताल की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि पति-पत्नी ने अस्पताल में अनुभवी डॉक्टरों की जगह पैसे बचाने के लिए बीएएमएस डॉक्टरों को रखा हुआ था। इसकी भी जांच की जा रही है।
पांच बच्चों के लिए दिया गया था लाइसेंस
जांच अधिकारी ने बताया कि अस्पताल में महज पांच बच्चों के इलाज के लिए लाइसेंस दिया गया था। इसके बावजूद 12 या उससे अधिक बच्चों का इलाज किया जा रहा था। इसके अलावा 31 मार्च को लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद बावजूद अस्पताल चल था। इसे लेकर डीजीएचएस अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी। अस्पताल के सभी स्टाफ से पूछताछ करने के लिए पुलिस ने 15 सवाल तैयार किए हैं। दूरदराज के इलाकों में कमीशन लेकर भी बच्चों को बेबी केयर अस्पताल में भेजा गया था। पुलिस इस मामले की भी पड़ताल कर रही है। इसके पीछे कौन-कौन लोग हैं।
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पंजाबी बाग, फरीदाबाद और गुरुग्राम के अस्पताल की भी होगी जांच
पुलिस को पता चला है कि विवेक विहार के अलावा नवीन और जागृति के पंजाबी बाग, फरीदाबाद और गुरुग्राम में भी बेबी केयर अस्पताल के नाम से शाखाएं हैं। इन अस्पताल में डॉक्टर, नर्स और पेरा मेडिकल स्टाफ की डिग्री से लेकर अस्पताल के लाइसेंस की जांच पुलिस कर सकती है। विवेक विहार में आग लगने के बाद ऑक्सीजन सिलिंडर एक के बाद एक फटने लगे थे। जांच में पता चला है कि क्षमता से ज्यादा सिलिंडर यहां रखे हुए थे। आग लगने पर यह फट गए।
मोबाइल फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे
डॉ. नवीन और डॉ. आकाश को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने मोबाइल कब्जे में लेकर छानबीन शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तारी से पूर्व इन लोगों ने फोन के अलावा व्हाट्सएप और एसएमएस के जरिये एक दूसरे से बातचीत की थी। पुलिस को आशंका है कि गिरफ्तारी से पूर्व इन एसएमएस व मैसेज को डिलीट कर दिया गया। अब फॉरेंसिक एक्सपर्ट इनसे डाटा दोबारा प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस जागृति का मोबाइल भी कब्जे में ले सकती है।
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मालिक डॉ. नवीन और ड्यूटी पर तैनात डॉ. आकाश से पुलिस की टीम कर रही पूछताछ
मालिक समेत सभी डॉक्टरों, नर्स और पैरा मेडिकल स्टाफ की डिग्रियां जमा करवाने के लिए कहा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। विवेक विहार के बेबी केयर न्यू बॉर्न अस्पताल में आग लगने के बाद सात नवजातों की मौत के मामले में पुलिस अस्पताल के मालिक डॉ. नवीन और ड्यूटी पर तैनात डॉ. आकाश को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस ने मंगलवार को नवीन की पत्नी डॉ. जागृति को पूछताछ में शामिल होने के लिए समन भेजा है। दांतों की डाॅक्टर जागृति अस्पताल में साझेदार हैं। पुलिस का कहना है कि मामले में नवीन के साथ जागृति की भी जिम्मेदारी बनती है। ऐसे में उनसे बुधवार को पूछताछ हो सकती है।
वहीं, पुलिस की पूछताछ में आकाश ने खुद को बेकसूर बताया है। उनका कहना है कि डॉ. नवीन ने 40 हजार रुपये महीना सैलरी पर रखा था। आग लगने पर वे अस्पताल से भागे नहीं। आखिरी दम तक बच्चों को बचाने और सुरक्षित निकालने में मदद की। इधर, पुलिस ने नोटिस जारी कर अस्पताल के सभी डॉक्टरों, नर्स, पैरा मेडिकल स्टाफ के अलावा दूसरे कर्मचारियों से डिग्रियां मांगी हैं। सभी के मोबाइल और सीडीआर की पड़ताल की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि पति-पत्नी ने अस्पताल में अनुभवी डॉक्टरों की जगह पैसे बचाने के लिए बीएएमएस डॉक्टरों को रखा हुआ था। इसकी भी जांच की जा रही है।
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पांच बच्चों के लिए दिया गया था लाइसेंस
जांच अधिकारी ने बताया कि अस्पताल में महज पांच बच्चों के इलाज के लिए लाइसेंस दिया गया था। इसके बावजूद 12 या उससे अधिक बच्चों का इलाज किया जा रहा था। इसके अलावा 31 मार्च को लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद बावजूद अस्पताल चल था। इसे लेकर डीजीएचएस अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी। अस्पताल के सभी स्टाफ से पूछताछ करने के लिए पुलिस ने 15 सवाल तैयार किए हैं। दूरदराज के इलाकों में कमीशन लेकर भी बच्चों को बेबी केयर अस्पताल में भेजा गया था। पुलिस इस मामले की भी पड़ताल कर रही है। इसके पीछे कौन-कौन लोग हैं।
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पंजाबी बाग, फरीदाबाद और गुरुग्राम के अस्पताल की भी होगी जांच
पुलिस को पता चला है कि विवेक विहार के अलावा नवीन और जागृति के पंजाबी बाग, फरीदाबाद और गुरुग्राम में भी बेबी केयर अस्पताल के नाम से शाखाएं हैं। इन अस्पताल में डॉक्टर, नर्स और पेरा मेडिकल स्टाफ की डिग्री से लेकर अस्पताल के लाइसेंस की जांच पुलिस कर सकती है। विवेक विहार में आग लगने के बाद ऑक्सीजन सिलिंडर एक के बाद एक फटने लगे थे। जांच में पता चला है कि क्षमता से ज्यादा सिलिंडर यहां रखे हुए थे। आग लगने पर यह फट गए।
मोबाइल फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे
डॉ. नवीन और डॉ. आकाश को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने मोबाइल कब्जे में लेकर छानबीन शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तारी से पूर्व इन लोगों ने फोन के अलावा व्हाट्सएप और एसएमएस के जरिये एक दूसरे से बातचीत की थी। पुलिस को आशंका है कि गिरफ्तारी से पूर्व इन एसएमएस व मैसेज को डिलीट कर दिया गया। अब फॉरेंसिक एक्सपर्ट इनसे डाटा दोबारा प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस जागृति का मोबाइल भी कब्जे में ले सकती है।