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Noida News: छात्रों को समझना होगा प्रकृति संरक्षण और पौधरोपण का महत्व
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फोटो है
-एमिटी विश्वविद्यालय में वनों के बाहर वृक्ष विषय पर कार्यशाला का आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। एमिटी विवि में वन महोत्सव 2025 के तहत वनों के बाहर वृक्ष विषय पर कार्यशाला हुई। इसमें केरल की पूर्व प्रिसिंपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट प्रकृति श्रीवास्तव ने कहा कि हमें प्रकृति का विनाश करके विकास नही करना है। पिछले कुछ समय में बाढ़, अत्यधिक गर्मी आदि समस्या का सामना कर रहे है जो प्रकृति के असंतुलन को दर्शा रहा है। छात्रों को प्रकृति संरक्षण और पौधरोपण के महत्व को समझना होगा।
उन्होंने कहा कि वनों के बाहर के वृक्ष, जो वनों के रूप में वर्गीकृत नहीं किए गए क्षेत्रों में उगते हैं, जिनमें कृषि भूमि, शहरी क्षेत्र और सड़कों और नहरों के किनारे शामिल हैं। ये पेड़ मूल्यवान संसाधन हैं जो विभिन्न पारिस्थितिक और आर्थिक लाभ प्रदान करते हैं। डॉ. डी के त्यागी ने कहा कि वनमहोत्सव, वृक्षों का उत्सव है। हमारे देश कि बड़ी जनसंख्या के अनुरूप अभी भी हर व्यक्ति के लिए काफी वृक्षों की आवश्यकता है। वनों के बाहर वृक्ष अभियान को स्न 1990 में प्रारंभ किया गया था। वनों के बाहर वृक्ष में एग्रो फॉरेस्ट्री, लिनियर प्लानटेशन और अरबन फॉरेस्ट्री का समावेश है। कनाडा में प्रति व्यक्ति पेड़ों की संख्या 8953 है, रशिया में 4491, ब्राजील में 1494, यूएसए में 716, चीन में 102 और भारत में 28 है। भारत में वनों के बाहर वृक्ष के विकास के लिए रणनीती, निती निर्धारण, वित्तीय व्यवस्था, बाजार और तकनीकी का उपयोग करना होगा। कार्यशाला में,एमिटी विवि के नेचुरल रिर्सोस एंड एनवायरमेंटल सांइसेस डोमेन के प्रमुख डॉ. एस पी सिंह, डॉ. रेनू धुप्पर, डॉ. शालिनी शर्मा, डॉ. सुमित्रा सिंह, डॉ. लोलिता प्रधान ने विचार व्यक्त किए।
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-एमिटी विश्वविद्यालय में वनों के बाहर वृक्ष विषय पर कार्यशाला का आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। एमिटी विवि में वन महोत्सव 2025 के तहत वनों के बाहर वृक्ष विषय पर कार्यशाला हुई। इसमें केरल की पूर्व प्रिसिंपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट प्रकृति श्रीवास्तव ने कहा कि हमें प्रकृति का विनाश करके विकास नही करना है। पिछले कुछ समय में बाढ़, अत्यधिक गर्मी आदि समस्या का सामना कर रहे है जो प्रकृति के असंतुलन को दर्शा रहा है। छात्रों को प्रकृति संरक्षण और पौधरोपण के महत्व को समझना होगा।
उन्होंने कहा कि वनों के बाहर के वृक्ष, जो वनों के रूप में वर्गीकृत नहीं किए गए क्षेत्रों में उगते हैं, जिनमें कृषि भूमि, शहरी क्षेत्र और सड़कों और नहरों के किनारे शामिल हैं। ये पेड़ मूल्यवान संसाधन हैं जो विभिन्न पारिस्थितिक और आर्थिक लाभ प्रदान करते हैं। डॉ. डी के त्यागी ने कहा कि वनमहोत्सव, वृक्षों का उत्सव है। हमारे देश कि बड़ी जनसंख्या के अनुरूप अभी भी हर व्यक्ति के लिए काफी वृक्षों की आवश्यकता है। वनों के बाहर वृक्ष अभियान को स्न 1990 में प्रारंभ किया गया था। वनों के बाहर वृक्ष में एग्रो फॉरेस्ट्री, लिनियर प्लानटेशन और अरबन फॉरेस्ट्री का समावेश है। कनाडा में प्रति व्यक्ति पेड़ों की संख्या 8953 है, रशिया में 4491, ब्राजील में 1494, यूएसए में 716, चीन में 102 और भारत में 28 है। भारत में वनों के बाहर वृक्ष के विकास के लिए रणनीती, निती निर्धारण, वित्तीय व्यवस्था, बाजार और तकनीकी का उपयोग करना होगा। कार्यशाला में,एमिटी विवि के नेचुरल रिर्सोस एंड एनवायरमेंटल सांइसेस डोमेन के प्रमुख डॉ. एस पी सिंह, डॉ. रेनू धुप्पर, डॉ. शालिनी शर्मा, डॉ. सुमित्रा सिंह, डॉ. लोलिता प्रधान ने विचार व्यक्त किए।
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