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UP: पहेली बोर्ड और कार्ड की मदद से जटिल सवालों को हल कर रहे छात्र, बिना पेन के सुलझ रहे कठिन प्रश्न
Sun, 22 Dec 2024 01:54 PM IST
विजय पुंडीर
अंकुर त्रिपाठी, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
अंकुर त्रिपाठी, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Published by: विजय पुंडीर
Updated Sun, 22 Dec 2024 01:54 PM IST
सार
आदर्श कंपोजिट विद्यालय सेक्टर-12 की शिक्षिका अनीता पाठक पुराने कबाड़ का उपयोग कर छात्रों में गणित के प्रति रुचि उत्पन्न कर रही हैं। इसका नतीजा यह निकला है कि गणित से बचने वाले बच्चे भी अब हर सवाल का जवाब दे रहे हैं।
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राष्ट्रीय गणित दिवस
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गणित के गुणा भाग से बचने वाले छात्र अब खेल-खेल में सवालों को हल करना सीख रहे हैं। शिक्षक पहेली बोर्ड व कार्ड की मदद से जटिल से जटिल सवालों को उंगलियों पर ही हल कर रहे हैं। छात्रों को पहले सबसे कठिन विषय गणित लगता था, लेकिन अब ऐसा नहीं हैं। गणित किट व थर्माकोल, गत्ते व प्लास्टिक की रद्दी से बने मॉडल उनके लिए सहायक की भूमिका निभा रहे हैं। परिषदीय स्कूलों के शिक्षक कई तरीके अपनाकर छात्रों को गणित सिखा रहे हैं। पुरानी पद्धति को छोड़ अब नए तरीकों से छात्रों को गुणा भाग की गुत्थी से बाहर निकाल रहे हैं।
आदर्श कंपोजिट विद्यालय सेक्टर-12 की शिक्षिका अनीता पाठक पुराने कबाड़ का उपयोग कर छात्रों में गणित के प्रति रुचि उत्पन्न कर रही हैं। इसका नतीजा यह निकला है कि गणित से बचने वाले बच्चे भी अब हर सवाल का जवाब दे रहे हैं। बिना सूत्रों को रटे और पेन उठाए जटिल समीकरणों को हल कर रहे हैं। उनके बनाए मॉडल से छठी से आठवीं तक करीब 80 प्रतिशत पाठ्यक्रम को पढ़ाया जा सकता है। इसमें वृत्त व त्रिभुज के सभी गुण को समझना व सवालों को हल करना, कोणों की माप व प्राकृतिक, अप्राकृतिक संख्याओं को समझना, धन, ऋण के चिह्नों को समझना शामिल है।
नोट, ब्लॉक की मदद से सिखा रहे जोड़-घटाना
एकेडमिक रिर्सोस पर्सन (एआरपी) प्रमोद कुमार छात्रों को नोट, ब्लॉक की मदद से जोड़, घटाना सिखा रहे हैं। उन्होंने बताया, वह स्वयं चित्रकारी कर बच्चों को आसानी से जोड़-घटाना, त्रिकोण, चतुर्भुज जैसी आकृति समझाते हैं। ताकि प्राथमिक स्तर से ही बच्चों को गणित के आसान तरीके सिखाए जा सके।
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डायट में शिक्षकों को दिया गया प्रशिक्षण
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के लगभग 800 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. प्रताप सिंह ने बताया कि अब रटाने वाला समय चला गया है। रोचक तरीके से शिक्षकों को भी ट्रेनिंग दी जा रही है। उन्हें गणित की अवधारणा समझाई जा रही है। जिसका नतीजा है कि हाल ही में एक रिपोर्ट जारी हुई थी,जिसमें प्रदेश में सबसे अधिक गौतमबुद्ध नगर के छात्र गुणा और भाग करने में सक्षम पाए गए थे।
क्या है पहेली बोर्ड
पहेली बोर्ड एक तरह का लकड़ी का खिलौना होता है। जिसमें बच्चों को जानवरों, संख्या, आकार, वाहनों और फलों के बारे में सिखाने में मदद मिलती है। यह बच्चों के लिए एक शैक्षिक उपकरण है। जो हाथ-आंख समन्वय, ठीक मोटर कौशल और समस्या को सुलझाने के कौशल को बढ़ाता हैं।
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आदर्श कंपोजिट विद्यालय सेक्टर-12 की शिक्षिका अनीता पाठक पुराने कबाड़ का उपयोग कर छात्रों में गणित के प्रति रुचि उत्पन्न कर रही हैं। इसका नतीजा यह निकला है कि गणित से बचने वाले बच्चे भी अब हर सवाल का जवाब दे रहे हैं। बिना सूत्रों को रटे और पेन उठाए जटिल समीकरणों को हल कर रहे हैं। उनके बनाए मॉडल से छठी से आठवीं तक करीब 80 प्रतिशत पाठ्यक्रम को पढ़ाया जा सकता है। इसमें वृत्त व त्रिभुज के सभी गुण को समझना व सवालों को हल करना, कोणों की माप व प्राकृतिक, अप्राकृतिक संख्याओं को समझना, धन, ऋण के चिह्नों को समझना शामिल है।
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नोट, ब्लॉक की मदद से सिखा रहे जोड़-घटाना
एकेडमिक रिर्सोस पर्सन (एआरपी) प्रमोद कुमार छात्रों को नोट, ब्लॉक की मदद से जोड़, घटाना सिखा रहे हैं। उन्होंने बताया, वह स्वयं चित्रकारी कर बच्चों को आसानी से जोड़-घटाना, त्रिकोण, चतुर्भुज जैसी आकृति समझाते हैं। ताकि प्राथमिक स्तर से ही बच्चों को गणित के आसान तरीके सिखाए जा सके।
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डायट में शिक्षकों को दिया गया प्रशिक्षण
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के लगभग 800 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. प्रताप सिंह ने बताया कि अब रटाने वाला समय चला गया है। रोचक तरीके से शिक्षकों को भी ट्रेनिंग दी जा रही है। उन्हें गणित की अवधारणा समझाई जा रही है। जिसका नतीजा है कि हाल ही में एक रिपोर्ट जारी हुई थी,जिसमें प्रदेश में सबसे अधिक गौतमबुद्ध नगर के छात्र गुणा और भाग करने में सक्षम पाए गए थे।
क्या है पहेली बोर्ड
पहेली बोर्ड एक तरह का लकड़ी का खिलौना होता है। जिसमें बच्चों को जानवरों, संख्या, आकार, वाहनों और फलों के बारे में सिखाने में मदद मिलती है। यह बच्चों के लिए एक शैक्षिक उपकरण है। जो हाथ-आंख समन्वय, ठीक मोटर कौशल और समस्या को सुलझाने के कौशल को बढ़ाता हैं।