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एसटीएफ ने शुरू की सरकारी भूमि घोटाले की जांच
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ग्रेटर नोएडा। दादरी तहसील के चिटहेरा गांव में करोड़ों रुपये की सरकारी (ग्राम समाज) जमीन कर्मचारियों व अफसरों की मिलीभगत से हड़पने और घोटाले के मामले की जांच नोएडा एसटीएफ ने शुरू कर दी है। आरोप है कि दलितों और किसानों के पट्टों से जुड़े तहसील के राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर यह घोटाला किया गया है। इस भूमि पर प्राधिकरण से मुआवजा भी उठाया गया। पूर्व में इस मामले की कई बार शिकायत की गई, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं की गई। डीजीपी को शिकायत करने के बाद जांच नोएडा एसटीएफ के डीएसपी को सौंपी गई।
बताया गया है कि एक ग्रामीण ने डीजीपी समेत अन्य अधिकारियों को चिटहेरा गांव की करोड़ों रुपये की जमीन भूमाफिया के द्वारा हड़पने की शिकायत की थी। आरोप है कि दलितों और भूमिहीनों के नाम किए जाने वाले पट्टे में खेल किया गया। ये पट्टे दूसरे जिलों के नाम कर दिए गए। फिर इन लोगों से एग्रीमेंट-पॉवर ऑफ अटॉर्नी के जरिए बेशकीमती जमीन की बिक्री की गई। जब तक यह जमीन चिटहेरा गांव के दलितों के नाम थी, उन्हें तहसील प्रशासन ने संक्रमणीय भूमिधर घोषित नहीं किया। जैसे ही जमीन बाहरी लोगों के नाम दर्ज हुई, उन्हें संक्रमणीय भूमिधर घोषित कर दिया गया। इसके साथ ही सरकारी जमीन का ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से करोड़ों रुपए का मुआवजा उठा लिया।
विरोध और शिकायत करने वाले लोगों को भेजा जेल
इस मामले की शिकायत और घोटाले का पूर्व में कुछ लोगों ने विरोध किया था। आरोप है कि इन्हें झूठे मामले में फंसाकर जेल भेज दिया गया। इसके चलते बाद में कोई शिकायत व विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया, लेकिन एक शिकायत पर संज्ञान लेते हुए डीजीपी ने नोएडा एसटीएफ के डीएसपी देवेंद्र सिंह को मामले की जांच सौंपी है। सूत्रों ने जानकारी दी है कि एसटीएफ ने मामले में साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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आलाधिकारियों से चिटहेरा गांव के भूमि घोटाले के संबंध में शिकायत की गई थी। इसकी जांच नोएडा एसटीएफ के डीएसपी को दी है। जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- राजकुमार मिश्रा, एएसपी एसटीएफ नोएडा।
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बताया गया है कि एक ग्रामीण ने डीजीपी समेत अन्य अधिकारियों को चिटहेरा गांव की करोड़ों रुपये की जमीन भूमाफिया के द्वारा हड़पने की शिकायत की थी। आरोप है कि दलितों और भूमिहीनों के नाम किए जाने वाले पट्टे में खेल किया गया। ये पट्टे दूसरे जिलों के नाम कर दिए गए। फिर इन लोगों से एग्रीमेंट-पॉवर ऑफ अटॉर्नी के जरिए बेशकीमती जमीन की बिक्री की गई। जब तक यह जमीन चिटहेरा गांव के दलितों के नाम थी, उन्हें तहसील प्रशासन ने संक्रमणीय भूमिधर घोषित नहीं किया। जैसे ही जमीन बाहरी लोगों के नाम दर्ज हुई, उन्हें संक्रमणीय भूमिधर घोषित कर दिया गया। इसके साथ ही सरकारी जमीन का ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से करोड़ों रुपए का मुआवजा उठा लिया।
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विरोध और शिकायत करने वाले लोगों को भेजा जेल
इस मामले की शिकायत और घोटाले का पूर्व में कुछ लोगों ने विरोध किया था। आरोप है कि इन्हें झूठे मामले में फंसाकर जेल भेज दिया गया। इसके चलते बाद में कोई शिकायत व विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया, लेकिन एक शिकायत पर संज्ञान लेते हुए डीजीपी ने नोएडा एसटीएफ के डीएसपी देवेंद्र सिंह को मामले की जांच सौंपी है। सूत्रों ने जानकारी दी है कि एसटीएफ ने मामले में साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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आलाधिकारियों से चिटहेरा गांव के भूमि घोटाले के संबंध में शिकायत की गई थी। इसकी जांच नोएडा एसटीएफ के डीएसपी को दी है। जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- राजकुमार मिश्रा, एएसपी एसटीएफ नोएडा।