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Noida News: तिरथली में बच्चों के अभिनय से जीवंत होते हैं रामायण के प्रसंग
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फोटो
- राम-लक्ष्मण, सीता और हनुमान से लेकर अंगद तक के पात्र निभाते हैं बच्चे
नरेंद्र कुमार यादव
यमुना सिटी। रामायण के प्रसंगों से लोगों को मर्यादा, त्याग, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। जेवर क्षेत्र के तिरथली गांव में आयोजित होने वाली बच्चों की रामलीला इसी धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम है। यहां रामायण के प्रमुख पात्रों का अभिनय बड़े कलाकार नहीं, बल्कि बच्चे करते हैं। उनके अभिनय के जरिये भगवान श्रीराम की कथा मंच पर प्रस्तुत की जाती है।
तिरथली गांव की रामलीला की खास बात यह है कि इसमें भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, माता सीता, हनुमान और अंगद सहित रामायण के लगभग सभी प्रमुख पात्रों की भूमिका बच्चे निभाते हैं। बाल कलाकार अपने अभिनय के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को दर्शकों के सामने प्रस्तुत करते हैं। रामलीला के प्रसंगों में जीवन के महत्वपूर्ण संदेश भी छिपे हैं। भगवान श्रीराम का मर्यादित आचरण, लक्ष्मण का भाई के प्रति समर्पण, भरत का त्याग और हनुमान की प्रभु के प्रति भक्ति रामायण के ऐसे प्रसंग हैं, जो लोगों को प्रेरित करते हैं। वहीं, ग्रामीणों के लिए भी यह रामलीला आस्था और संस्कृति से जुड़ने का माध्यम बनती है।
-भगवान श्रीराम का किरदार निभाकर मुझे बहुत अच्छा लगता है। मैं उनके आदर्शों से प्रेरणा लेता हूं। जब कोई मेरी अभिनय की तारीफ करता है तो और भी अच्छा लगता है। वीरेंद्र- (राम)
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-मुझे रामायण के सभी पात्रों के किरदार अच्छे लगते हैं, लेकिन लक्ष्मण का किरदार मुझे सबसे अच्छा लगता है, सबसे अच्छा लक्ष्मण परशुराम संवाद के समय लगता है। -पुष्पेंद्र (लक्ष्मण)
-मैं अपने गांव की रामलीला में अंगद का किरदार करता हूं और मुझे रावण-अंगद संवाद सबसे अच्छा लगता है। - अभय चौधरी (अंगद)
-मैं रामलीला में माता सीता का किरदार करता हूं और हम लोग पूरे साल गांव में होने वाली रामलीला का इंतजार करते है। मुझे रामलीला में काम करना अच्छा लगता है। राधे (माता सीता)
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- राम-लक्ष्मण, सीता और हनुमान से लेकर अंगद तक के पात्र निभाते हैं बच्चे
नरेंद्र कुमार यादव
यमुना सिटी। रामायण के प्रसंगों से लोगों को मर्यादा, त्याग, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। जेवर क्षेत्र के तिरथली गांव में आयोजित होने वाली बच्चों की रामलीला इसी धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम है। यहां रामायण के प्रमुख पात्रों का अभिनय बड़े कलाकार नहीं, बल्कि बच्चे करते हैं। उनके अभिनय के जरिये भगवान श्रीराम की कथा मंच पर प्रस्तुत की जाती है।
तिरथली गांव की रामलीला की खास बात यह है कि इसमें भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, माता सीता, हनुमान और अंगद सहित रामायण के लगभग सभी प्रमुख पात्रों की भूमिका बच्चे निभाते हैं। बाल कलाकार अपने अभिनय के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को दर्शकों के सामने प्रस्तुत करते हैं। रामलीला के प्रसंगों में जीवन के महत्वपूर्ण संदेश भी छिपे हैं। भगवान श्रीराम का मर्यादित आचरण, लक्ष्मण का भाई के प्रति समर्पण, भरत का त्याग और हनुमान की प्रभु के प्रति भक्ति रामायण के ऐसे प्रसंग हैं, जो लोगों को प्रेरित करते हैं। वहीं, ग्रामीणों के लिए भी यह रामलीला आस्था और संस्कृति से जुड़ने का माध्यम बनती है।
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-भगवान श्रीराम का किरदार निभाकर मुझे बहुत अच्छा लगता है। मैं उनके आदर्शों से प्रेरणा लेता हूं। जब कोई मेरी अभिनय की तारीफ करता है तो और भी अच्छा लगता है। वीरेंद्र- (राम)
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-मुझे रामायण के सभी पात्रों के किरदार अच्छे लगते हैं, लेकिन लक्ष्मण का किरदार मुझे सबसे अच्छा लगता है, सबसे अच्छा लक्ष्मण परशुराम संवाद के समय लगता है। -पुष्पेंद्र (लक्ष्मण)
-मैं अपने गांव की रामलीला में अंगद का किरदार करता हूं और मुझे रावण-अंगद संवाद सबसे अच्छा लगता है। - अभय चौधरी (अंगद)
-मैं रामलीला में माता सीता का किरदार करता हूं और हम लोग पूरे साल गांव में होने वाली रामलीला का इंतजार करते है। मुझे रामलीला में काम करना अच्छा लगता है। राधे (माता सीता)