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Noida News: दूर हुई राहत की मंज़िल, टैक्स चोरी में चालक की जमानत अर्जी खारिज
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-कर चोरी प्रकरण में चालक की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज
(अदालत से)माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोेएडा। कर चोरी से जुड़े एक प्रकरण में सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी चालक विकास सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामला थाना दादरी के से संबंधित है। अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी सुगंधा सिंह सहायक आयुक्त ने 17 जुलाई 2025 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 14 जुलाई की रात लुहारली टोल प्लाजा पर एक ट्रक को जांच के लिए रोका गया था।
पूछताछ में चालक ने अपना नाम विकास मालाकार बताया। वाहन में कोई माल नहीं था। जबकि उसी वाहन के नाम पर 13, 14 और 15 जुलाई की तिथियों के फर्जी ई-वे बिल जारी किए गए थे। जांच में पाया गया कि ई-वे बिल केवल कर चोरी और फर्जी लेन-देन को छिपाने के लिए तैयार किए गए थे। आरोपी की ओर से अधिवक्ता संदीप कुमार ने दलील दी कि विकास सिंह ट्रक चालक है। उसे जानबूझकर फंसाया गया है। वह घटना में नामजद नहीं था और उसके विरुद्ध कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। वहीं अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी और अन्य लोगों ने मिलकर फर्जी ई-वे बिल तैयार किए और बिना माल के ट्रक चलाकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया। अदालत ने दस्तावेजों और प्रस्तुत तर्कों के देखने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला जीएसटी कर चोरी का है। ऐसे में आरोपी की अग्रिम जमानत का कोई ठोस आधार नहीं बनता।
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(अदालत से)माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोेएडा। कर चोरी से जुड़े एक प्रकरण में सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी चालक विकास सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामला थाना दादरी के से संबंधित है। अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी सुगंधा सिंह सहायक आयुक्त ने 17 जुलाई 2025 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 14 जुलाई की रात लुहारली टोल प्लाजा पर एक ट्रक को जांच के लिए रोका गया था।
पूछताछ में चालक ने अपना नाम विकास मालाकार बताया। वाहन में कोई माल नहीं था। जबकि उसी वाहन के नाम पर 13, 14 और 15 जुलाई की तिथियों के फर्जी ई-वे बिल जारी किए गए थे। जांच में पाया गया कि ई-वे बिल केवल कर चोरी और फर्जी लेन-देन को छिपाने के लिए तैयार किए गए थे। आरोपी की ओर से अधिवक्ता संदीप कुमार ने दलील दी कि विकास सिंह ट्रक चालक है। उसे जानबूझकर फंसाया गया है। वह घटना में नामजद नहीं था और उसके विरुद्ध कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। वहीं अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी और अन्य लोगों ने मिलकर फर्जी ई-वे बिल तैयार किए और बिना माल के ट्रक चलाकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया। अदालत ने दस्तावेजों और प्रस्तुत तर्कों के देखने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला जीएसटी कर चोरी का है। ऐसे में आरोपी की अग्रिम जमानत का कोई ठोस आधार नहीं बनता।
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