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अलर्ट पर स्कूल, अस्पतालों में खास वार्ड और थर्मल स्क्रीनिंग पर जोर
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जिला अस्पताल में कोरोना की जांच करता स्वास्थ्य कर्मी। अमर उजाला
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नोएडा। देश में बढ़ते ओमिक्रॉन के मामलों के मद्देनजर जिले के अधिकारियों में भी चिंता बढ़ गई है। खतरे को देखते स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश जारी किया है। इसके तहत स्कूलों को अलर्ट रहने को कहा गया है। शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर पर आगामी चुनौतियों से निपटने की तैयारी कर रहे हैं। स्कूलों में थर्मल स्क्रीनिंग के बिना प्रवेश रोकने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। वहीं, जिला और कोविड अस्पताल सहित अन्य स्थानों पर बाल चिकित्सा के लिए अलग वार्ड तैयार किए गए हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने हर स्कूल को प्रतिदिन विद्यार्थियों के आने से पहले या छुट्टी के बाद सैनिटाइज करने को कहा है। स्कूल में प्रवेश से पहले सभी विद्यार्थियों की थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी। बिना मास्क विद्यार्थी, शिक्षक और कर्मचारी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। सामान्य और ऑनलाइन कक्षाओं के लिए कई स्कूल छात्रों की राय ले रहे हैं। अभिभावकों की अनुमति के बाद ही विद्यार्थियों को स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा। प्रबंधन को ऑनलाइन कक्षा की सुविधा उपलब्ध करानी होगी। नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई की जाएगी। कोरोना गाइडलाइन के तहत ही प्रार्थना सभा, सांस्कृतिक और खेल आयोजन होंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक धर्मवीर सिंह ने कहा कि सभी स्कूलों को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। छात्रों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।
बुजुर्ग एवं बीमार कर्मियों पर खास नजर
विभिन्न बीमारियों से ग्रसित, गर्भवती, वृद्ध लोगों को कोविड संक्रमण के बाद अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में शिक्षा विभाग ने इस तरह के कर्मियों पर खास नजर रखने की योजना बनाई है। इनको विद्यालय ऐसे कार्यों में शामिल नहीं करेगा, जिनसे विद्यार्थियों का सीधा संपर्क हो। वहीं, यदि किसी भी विद्यार्थी या कर्मचारी को खांसी, जुकाम और बुखार के अलावा अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होगी, उन्हें चिकित्सीय परामर्श के साथ ही विभाग को जानकारी देनी होगी। शिक्षा विभाग ने स्कूलों से हर शिक्षक व कर्मचारियों के टीकाकरण की रिपोर्ट मांगी है। एक सप्ताह में दोनों डोज के संबंध में रिपोर्ट देनी होगी।
संक्रमण से निपटने की तैयारी
जिले में निर्धारित लक्ष्य से अधिक टीकाकरण करने में स्वास्थ्य विभाग सफलता पा चुका है, लेकिन बच्चों का टीकाकरण अब तक नहीं हुआ है। बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर होती है। ऐसे में उनके कोरोना से प्रभावित होने की आशंका अधिक रहती है। ऐसे में विभाग पूरी सावधानी बरत रहा है। इसके तहत जिला एवं कोविड अस्पताल में खास वार्ड बनाए गए हैं। जिले के सरकारी अस्पतालों में करीब 440 बेड की व्यवस्था की गई। वहीं, निजी अस्पतालों को भी अलर्ट पर रखा गया है। तैयारी परखने के लिए दो बार मॉकड्रिल भी हो चुकी है। इसमें ऑक्सीजन, दवाओं सहित अन्य व्यवस्थाओं को परखा गया।
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बुजुर्ग एवं बीमार कर्मियों पर खास नजर
विभिन्न बीमारियों से ग्रसित, गर्भवती, वृद्ध लोगों को कोविड संक्रमण के बाद अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में शिक्षा विभाग ने इस तरह के कर्मियों पर खास नजर रखने की योजना बनाई है। इनको विद्यालय ऐसे कार्यों में शामिल नहीं करेगा, जिनसे विद्यार्थियों का सीधा संपर्क हो। वहीं, यदि किसी भी विद्यार्थी या कर्मचारी को खांसी, जुकाम और बुखार के अलावा अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होगी, उन्हें चिकित्सीय परामर्श के साथ ही विभाग को जानकारी देनी होगी। शिक्षा विभाग ने स्कूलों से हर शिक्षक व कर्मचारियों के टीकाकरण की रिपोर्ट मांगी है। एक सप्ताह में दोनों डोज के संबंध में रिपोर्ट देनी होगी।
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संक्रमण से निपटने की तैयारी
जिले में निर्धारित लक्ष्य से अधिक टीकाकरण करने में स्वास्थ्य विभाग सफलता पा चुका है, लेकिन बच्चों का टीकाकरण अब तक नहीं हुआ है। बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर होती है। ऐसे में उनके कोरोना से प्रभावित होने की आशंका अधिक रहती है। ऐसे में विभाग पूरी सावधानी बरत रहा है। इसके तहत जिला एवं कोविड अस्पताल में खास वार्ड बनाए गए हैं। जिले के सरकारी अस्पतालों में करीब 440 बेड की व्यवस्था की गई। वहीं, निजी अस्पतालों को भी अलर्ट पर रखा गया है। तैयारी परखने के लिए दो बार मॉकड्रिल भी हो चुकी है। इसमें ऑक्सीजन, दवाओं सहित अन्य व्यवस्थाओं को परखा गया।
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