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स्कूल की परिवहन व्यवस्था चरमराई, गुस्साए अभिभावकों ने किया प्रदर्शन
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ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल में सोमवार को परिवहन व्यवस्था चरमरा गई। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल बसों की कमी के कारण सुबह घरों से निकले बच्चे स्कूल शुरू होने के डेढ़ से दो घंटे बाद पहुंचे। वहीं, छुट्टी होने के बाद जहां साढ़े तीन बजे तक बच्चे घर पहुंच जाते थे, वह शाम साढ़े पांच बजे तक पहुंचे। इनमें से कुछ बच्चे अपने स्टॉप पर नहीं उतरे तो परेशान अभिभावकों को स्कूल कैंपस में बच्चे बस के अंदर सवार मिले। ऐसे में मंगलवार को अभिभावकों ने स्कूल गेट पर हंगामा और विरोध किया। आरोप है कि इस दौरान प्रबंधन ने धमकी देकर दुर्व्यवहार किया। हालांकि, स्कूल की ओर से कुछ कक्षाओं के बच्चों को नहीं बुलाया गया, जिसके चलते स्थिति कुछ संभल सकी।
दिल्ली पब्लिक स्कूल में मंगलवार सुबह शिकायत करने पहुंची एक महिला ने स्कूल के गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए पुलिस को फोन कर बुला लिया। महिला का आरोप है कि स्कूल के एक कर्मी ने उन्हें धमकी दी है कि आपके बच्चे की फोटो उनके पास है।
वहीं, स्कूल प्रबंधन की अव्यवस्था के खिलाफ अभिभावकों ने मंगलवार को स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि हाल ही में छोटे बच्चों की भी कक्षाएं शुरू हुई हैं, लेकिन कोरोना के बाद आधी-अधूरी तैयारी से खुले स्कूल में कई अव्यवस्थाएं हैं। अभिभावकों का कहना है कि प्रबंधन की ओर से स्कूल बसों की समुचित व्यवस्था न होने से प्रत्येक बस में डेढ़ से दो गुना तक बच्चे बिठाए जा रहे हैं। प्रबंधन ने विद्यार्थियों के लिए रूट भी निर्धारित नहीं किया है। अव्यवस्थाओं के चलते स्कूल प्रबंधन ने नोटिस जारी कर अभिभावकों को उनके सवालों का जवाब देने के लिए बुधवार सुबह 9 से 11 बजे तक बैठक में बुलाया है।
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स्कूल बस के अंदर बैठी मिली खोई बच्ची
स्कूल में पढ़ने वाली एक बच्ची की मां ने एक व्हाट्सअप ग्रुप पर अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि प्रतिदिन की तरह जब बच्ची को लेने पहुंची तो उसका पता नहीं चला। काफी देर तक स्कूल कैंपस में बच्ची को ढूंढा। काफी समय बाद बच्ची एक बस के अंदर बैठी मिली, जिसमें उसके हाथ पर जे-2 बस रूट की मोहर लगी हुई थी। बच्ची की मां ने बताया कि इस घटना से उनका परिवार बुरी तरह से डर गया है।
एक शिक्षिका संभाल रही 39 बच्चे
कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन कक्षाओं के लिए स्कूल में स्टाफ कम ही भर्ती किया गया था। अब ऑफलाइन कक्षाएं तो शुरू हुईं लेकिन स्टाफ नहीं बढ़ाया गया है। स्टाफ न होने से बच्चों को दूसरी कक्षाओं में बिठाया जा रहा है। बच्चों को स्कूल लेने पहुंच रहे अभिभावक को क्लास रूम में बच्चे नहीं मिल रहे हैं। आलम यह है कि छोटे बच्चों की कक्षा में एक शिक्षिका 39 बच्चों को संभाल रही हैं, जबकि कम से कम से दो शिक्षिकाओं का स्टाफ होना चाहिए। अभिभावकों का कहना है कि तीन दिन से छोटे बच्चों का टिफिन तक खिलाने वाला कोई नहीं है।
बिना तैयारी के ऑफलाइन मोड में स्कूल खोल दिए गए। इससे कम बसों में अधिक बच्चे होने के कारण बच्चे डेढ़ से ढाई घंटे देरी से घर पहुंच रहे हैं। वहीं, स्कूल प्रबंधन कोरोना नियमों का पालन भी नहीं करा रहा है।
-सुखपाल सिंह तूर, शैक्षिक कार्यकर्ता
दो दिन में बहाल हो जाएगी व्यवस्था
मार्च में अभिभावकों को परिवहन को लेकर सर्कुलर भेजा गया था, जिसमें 1000 बच्चों के लिए अभिभावकों ने परिवहन सुविधा मांगी थी। हमने 1500 बच्चों के लिए परिवहन व्यवस्था की थी। अब अभिभावकों की परिवहन को लेकर मांग बढ़ी है। बसों के रूट को स्कूल प्रबंधन और ट्रांसपोर्टरों के साथ बैठक में फिर से तय किया जा रहा है। सुबह स्कूल आए अभिभावकों से बात कर संतुष्ट कर दिया है। दो दिन में सब कुछ व्यवस्थित हो जाएगा।
-डीएस यादव, उप प्रधानाचार्य, डीपीएस, ग्रेटर नोएडा वेस्ट
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दिल्ली पब्लिक स्कूल में मंगलवार सुबह शिकायत करने पहुंची एक महिला ने स्कूल के गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए पुलिस को फोन कर बुला लिया। महिला का आरोप है कि स्कूल के एक कर्मी ने उन्हें धमकी दी है कि आपके बच्चे की फोटो उनके पास है।
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वहीं, स्कूल प्रबंधन की अव्यवस्था के खिलाफ अभिभावकों ने मंगलवार को स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि हाल ही में छोटे बच्चों की भी कक्षाएं शुरू हुई हैं, लेकिन कोरोना के बाद आधी-अधूरी तैयारी से खुले स्कूल में कई अव्यवस्थाएं हैं। अभिभावकों का कहना है कि प्रबंधन की ओर से स्कूल बसों की समुचित व्यवस्था न होने से प्रत्येक बस में डेढ़ से दो गुना तक बच्चे बिठाए जा रहे हैं। प्रबंधन ने विद्यार्थियों के लिए रूट भी निर्धारित नहीं किया है। अव्यवस्थाओं के चलते स्कूल प्रबंधन ने नोटिस जारी कर अभिभावकों को उनके सवालों का जवाब देने के लिए बुधवार सुबह 9 से 11 बजे तक बैठक में बुलाया है।
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स्कूल बस के अंदर बैठी मिली खोई बच्ची
स्कूल में पढ़ने वाली एक बच्ची की मां ने एक व्हाट्सअप ग्रुप पर अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि प्रतिदिन की तरह जब बच्ची को लेने पहुंची तो उसका पता नहीं चला। काफी देर तक स्कूल कैंपस में बच्ची को ढूंढा। काफी समय बाद बच्ची एक बस के अंदर बैठी मिली, जिसमें उसके हाथ पर जे-2 बस रूट की मोहर लगी हुई थी। बच्ची की मां ने बताया कि इस घटना से उनका परिवार बुरी तरह से डर गया है।
एक शिक्षिका संभाल रही 39 बच्चे
कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन कक्षाओं के लिए स्कूल में स्टाफ कम ही भर्ती किया गया था। अब ऑफलाइन कक्षाएं तो शुरू हुईं लेकिन स्टाफ नहीं बढ़ाया गया है। स्टाफ न होने से बच्चों को दूसरी कक्षाओं में बिठाया जा रहा है। बच्चों को स्कूल लेने पहुंच रहे अभिभावक को क्लास रूम में बच्चे नहीं मिल रहे हैं। आलम यह है कि छोटे बच्चों की कक्षा में एक शिक्षिका 39 बच्चों को संभाल रही हैं, जबकि कम से कम से दो शिक्षिकाओं का स्टाफ होना चाहिए। अभिभावकों का कहना है कि तीन दिन से छोटे बच्चों का टिफिन तक खिलाने वाला कोई नहीं है।
बिना तैयारी के ऑफलाइन मोड में स्कूल खोल दिए गए। इससे कम बसों में अधिक बच्चे होने के कारण बच्चे डेढ़ से ढाई घंटे देरी से घर पहुंच रहे हैं। वहीं, स्कूल प्रबंधन कोरोना नियमों का पालन भी नहीं करा रहा है।
-सुखपाल सिंह तूर, शैक्षिक कार्यकर्ता
दो दिन में बहाल हो जाएगी व्यवस्था
मार्च में अभिभावकों को परिवहन को लेकर सर्कुलर भेजा गया था, जिसमें 1000 बच्चों के लिए अभिभावकों ने परिवहन सुविधा मांगी थी। हमने 1500 बच्चों के लिए परिवहन व्यवस्था की थी। अब अभिभावकों की परिवहन को लेकर मांग बढ़ी है। बसों के रूट को स्कूल प्रबंधन और ट्रांसपोर्टरों के साथ बैठक में फिर से तय किया जा रहा है। सुबह स्कूल आए अभिभावकों से बात कर संतुष्ट कर दिया है। दो दिन में सब कुछ व्यवस्थित हो जाएगा।
-डीएस यादव, उप प्रधानाचार्य, डीपीएस, ग्रेटर नोएडा वेस्ट