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Noida News: वित्तीय लापरवाही पर 43 प्रधानाध्यापकों का वेतन रुका, 29 को नोटिस
Fri, 14 Nov 2025 02:42 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
Updated Fri, 14 Nov 2025 02:42 AM IST
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वित्तीय व्यवस्था में लापरवाही बरतने पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कड़ी कार्रवाई की है। बुधवार को पीएफएमएस पोर्टल पर इस साल मिले बजट की समीक्षा हुई। इसमें कई शिक्षकों की लापरवाही सामने आई। इस पर बीएसए ने 43 प्रधानाध्यापकों का वेतन रोका है। साथ ही 29 को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
बीएसए डॉ. कमलेंद्र कुशवाहा ने बताया कि कार्यों की समीक्षा में यह प्रकाश में आया कि 43 एसएमसी विद्यालयों के प्रधानाध्यापक व इंचार्ज प्रधानाध्यापकों ने अब तक खाते में पड़ी धनराशि से एक भी रुपये का व्यय नहीं किया है। इस गंभीर लापरवाही पर सभी का वेतन अगले आदेश तक रोक दिया गया है।
वहीं 29 एसएमसी विद्यालयों के प्रधानाध्यापक व इंचार्ज प्रधानाध्यापकों ने 50 फीसदी से भी कम धन का उपयोग किया है। उन्हें नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। यह वित्तीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है। बीएसए ने सभी प्रधानाध्यापकों को 20 नवंबर तक धनराशि नियमानुसार खर्च करने का निर्देश दिया है। बताया कि यदि समय से धनराशि खर्च होती है तो राज्य परियोजना कार्यालय से फिर से धनराशि मिल सकेगी। ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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विद्यालय की स्थित में सुधार के लिए है धनराशि
बीएसए ने बताया कि जो धनराशि खाते में पड़ी है, उसे स्कूल के जरूरी कार्यों में खर्च किया जाना है। यह धनराशि 50 से 60 हजार प्रति विद्यालय की दर से दी गई है। शासन की समीक्षा में सामने आया है कि स्कूलों की लापरवाही के कारण जिले की रैंकिंग प्रभावित हो रही है।
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बीएसए डॉ. कमलेंद्र कुशवाहा ने बताया कि कार्यों की समीक्षा में यह प्रकाश में आया कि 43 एसएमसी विद्यालयों के प्रधानाध्यापक व इंचार्ज प्रधानाध्यापकों ने अब तक खाते में पड़ी धनराशि से एक भी रुपये का व्यय नहीं किया है। इस गंभीर लापरवाही पर सभी का वेतन अगले आदेश तक रोक दिया गया है।
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वहीं 29 एसएमसी विद्यालयों के प्रधानाध्यापक व इंचार्ज प्रधानाध्यापकों ने 50 फीसदी से भी कम धन का उपयोग किया है। उन्हें नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। यह वित्तीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है। बीएसए ने सभी प्रधानाध्यापकों को 20 नवंबर तक धनराशि नियमानुसार खर्च करने का निर्देश दिया है। बताया कि यदि समय से धनराशि खर्च होती है तो राज्य परियोजना कार्यालय से फिर से धनराशि मिल सकेगी। ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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विद्यालय की स्थित में सुधार के लिए है धनराशि
बीएसए ने बताया कि जो धनराशि खाते में पड़ी है, उसे स्कूल के जरूरी कार्यों में खर्च किया जाना है। यह धनराशि 50 से 60 हजार प्रति विद्यालय की दर से दी गई है। शासन की समीक्षा में सामने आया है कि स्कूलों की लापरवाही के कारण जिले की रैंकिंग प्रभावित हो रही है।