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Noida News: सडक़ बनी नहीं और 346 करोड़ रुपये बढ़ गई लागत
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सडक़ बनी नहीं और 346 करोड़ रुपये बढ़ गई लागत
- सरकारी सिस्टम की लापरवाही का खेल, सिग्नल फ्री सफर का दावा फेल
- चिल्ला और भंगेल एलिवेटेड रोड परियोजनाओं पर लगातार देरी की मार
योगेश शर्मा
नोएडा। सरकारी सिस्टम की लापरवाही किस तरह आम जनता और सरकारी खजाने पर भारी पड़ती है, इसका नमूना नोएडा में देखा जा सकता है। शहर को जाम और सिग्नल फ्री बनाने वाली चिल्ला और भंगेल एलिवेटेड रोड पर लगातार देरी की मार पड़ रही है। शहर के लिए बेहद जरूरी भंगेल एलिवेटेड रोड अभी आधी भी नहीं बनीं और लागत 150 करोड़ रुपये बढ़ाने की तैयारी है। इसी तरह चिल्ला एलिवेटेड रोड का काम अभी शुरू नहीं हो सका है और इसे बनाने का खर्च 196 करोड़ रुपये बढ़ गया है। दोनों ही परियोजनाओं की सुस्त गति के कारण सरकारी खजाने पर 346 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ा है।
सड़क नहीं चुनावी एजेंडा कहिए जनाब
चिल्ला एलिवेटेड रोड परियोजना का शिलान्यास 25 जनवरी 2019 को लोकसभा चुनाव से ठीक पहले किया गया। जल्दबाजी ऐसी कि अधूरी तैयारियों के बीच ही शिलान्या कराया गया। कुछ समय तक काम चला और 74 करोड़ खर्च करने के बाद बंद हो गया। जुलाई 2022 तक 605 करोड़ रुपये की लागत से जुलाई 2022 तक निर्माण कार्य पूरा होना था। समयसीमा बीते भी एक साल होने जा रहा है। अब 2024 के चुनाव से लगभग सालभर पहले एक बार फिर परियोजना सुर्खियों में है। यूपी कैबिनेट से परियोजना को मंजूरी मिल गई है। चार साल पहले इसका बजट 605 करोड़ रुपये निर्धारित था जो अब 801 करोड़ रुपये पहुंच गया है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि काम शुरू होने में तीन से चार महीने लग सकते हैं। यानि एक बार फिर यह परियोजना चुनावी एजेंडे में शामिल होगी।
गलत प्लानिंग के फेर में फंसी भंगेल रोड
दादरी-सूरजपुर-छलैरा (डीएससी) मार्ग पर भंगेल एलिवेटेड रोड का निर्माण अगस्त 2020 में शुरू हुआ था। निर्माण कार्य अभी आधा ही हो पाया है और इसका बजट 468 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 618 करोड़ रुपये करने की दलील दी जा रही है। उत्तर प्रदेश सेतु निगम ने निर्माण सामग्री व अन्य वजह से अतिरिक्त 150 करोड़ रुपये की मांग कर डाली है। नई अड़चन इस रोड की राह में इमारतें बन गई हैं। ऐसे में सवाल नोएडा प्राधिकरण की प्लानिंग पर उठ रहा है। परियोजना के रूट का सर्वे और डिजाइन तैयार करते समय राह में आने वाली इमारतों पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया। मार्च 2022 में 5.5 किमी लंबी भंगेल एलिवेटेड रोड बनकर तैयार होनी थी, लेकिन जून 2023 आ गया है। अगले एक साल में भी यह परियोजना पूरी होने की कोई गारंटी नहीं है।
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जाम से बेहाल दिल्ली-नोएडा लिंक रोड
दिल्ली के अक्षरधाम से नोएडा-ग्रेनो और यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते आवाजाही करने वाले वाहनों की गति पर चिल्ला बॉर्डर का सिग्नल ब्रेक लगाता है। चिल्ला बॉर्डर से महामाया फ्लाईओवर तक दिल्ली-नोएडा लिंक जाम से बेहाल हो रहा है। रोजाना वाहन चालकों को जाम में फंसना पड़ रहा है। एलिवेटेड रोड बनने से 10 लाख लोगों को राहत मिलेगी।
दोनों परियोजनाएं एक नजर में
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परियोजना
पुरानी लागत
नई लागत समय सीमा (पुरानी)
भंगेल एलिवेटेड
468 करोड़ 618 करोड़ मार्च 2022
चिल्ला एलिवेटेड
605 करोड़ 801 करोड़ जुलाई 2022
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- सरकारी सिस्टम की लापरवाही का खेल, सिग्नल फ्री सफर का दावा फेल
- चिल्ला और भंगेल एलिवेटेड रोड परियोजनाओं पर लगातार देरी की मार
योगेश शर्मा
नोएडा। सरकारी सिस्टम की लापरवाही किस तरह आम जनता और सरकारी खजाने पर भारी पड़ती है, इसका नमूना नोएडा में देखा जा सकता है। शहर को जाम और सिग्नल फ्री बनाने वाली चिल्ला और भंगेल एलिवेटेड रोड पर लगातार देरी की मार पड़ रही है। शहर के लिए बेहद जरूरी भंगेल एलिवेटेड रोड अभी आधी भी नहीं बनीं और लागत 150 करोड़ रुपये बढ़ाने की तैयारी है। इसी तरह चिल्ला एलिवेटेड रोड का काम अभी शुरू नहीं हो सका है और इसे बनाने का खर्च 196 करोड़ रुपये बढ़ गया है। दोनों ही परियोजनाओं की सुस्त गति के कारण सरकारी खजाने पर 346 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ा है।
सड़क नहीं चुनावी एजेंडा कहिए जनाब
चिल्ला एलिवेटेड रोड परियोजना का शिलान्यास 25 जनवरी 2019 को लोकसभा चुनाव से ठीक पहले किया गया। जल्दबाजी ऐसी कि अधूरी तैयारियों के बीच ही शिलान्या कराया गया। कुछ समय तक काम चला और 74 करोड़ खर्च करने के बाद बंद हो गया। जुलाई 2022 तक 605 करोड़ रुपये की लागत से जुलाई 2022 तक निर्माण कार्य पूरा होना था। समयसीमा बीते भी एक साल होने जा रहा है। अब 2024 के चुनाव से लगभग सालभर पहले एक बार फिर परियोजना सुर्खियों में है। यूपी कैबिनेट से परियोजना को मंजूरी मिल गई है। चार साल पहले इसका बजट 605 करोड़ रुपये निर्धारित था जो अब 801 करोड़ रुपये पहुंच गया है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि काम शुरू होने में तीन से चार महीने लग सकते हैं। यानि एक बार फिर यह परियोजना चुनावी एजेंडे में शामिल होगी।
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गलत प्लानिंग के फेर में फंसी भंगेल रोड
दादरी-सूरजपुर-छलैरा (डीएससी) मार्ग पर भंगेल एलिवेटेड रोड का निर्माण अगस्त 2020 में शुरू हुआ था। निर्माण कार्य अभी आधा ही हो पाया है और इसका बजट 468 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 618 करोड़ रुपये करने की दलील दी जा रही है। उत्तर प्रदेश सेतु निगम ने निर्माण सामग्री व अन्य वजह से अतिरिक्त 150 करोड़ रुपये की मांग कर डाली है। नई अड़चन इस रोड की राह में इमारतें बन गई हैं। ऐसे में सवाल नोएडा प्राधिकरण की प्लानिंग पर उठ रहा है। परियोजना के रूट का सर्वे और डिजाइन तैयार करते समय राह में आने वाली इमारतों पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया। मार्च 2022 में 5.5 किमी लंबी भंगेल एलिवेटेड रोड बनकर तैयार होनी थी, लेकिन जून 2023 आ गया है। अगले एक साल में भी यह परियोजना पूरी होने की कोई गारंटी नहीं है।
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जाम से बेहाल दिल्ली-नोएडा लिंक रोड
दिल्ली के अक्षरधाम से नोएडा-ग्रेनो और यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते आवाजाही करने वाले वाहनों की गति पर चिल्ला बॉर्डर का सिग्नल ब्रेक लगाता है। चिल्ला बॉर्डर से महामाया फ्लाईओवर तक दिल्ली-नोएडा लिंक जाम से बेहाल हो रहा है। रोजाना वाहन चालकों को जाम में फंसना पड़ रहा है। एलिवेटेड रोड बनने से 10 लाख लोगों को राहत मिलेगी।
दोनों परियोजनाएं एक नजर में
परियोजना
पुरानी लागत
नई लागत समय सीमा (पुरानी)
भंगेल एलिवेटेड
468 करोड़ 618 करोड़ मार्च 2022
चिल्ला एलिवेटेड
605 करोड़ 801 करोड़ जुलाई 2022