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जीएसआई की सर्वे रिपोर्ट से खुलासा: गोंडा, बस्ती व सोनभद्र के 20 गांवों में नहीं मिला पीने योग्य पानी
Sat, 05 Jun 2021 12:08 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 05 Jun 2021 12:08 AM IST
सार
निदेशक (जियोलॉजी) अभिनंदन श्रीवास्तव के नेतृत्व में पांच अधिकारियों की टीम ने तीनों जिलों में सर्वे किया था। इन जिलों में फ्लोराइड व आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने के कारण लोगों को गंभीर बीमारियां हो रही हैं।
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फाइल फोटो
- फोटो : pixabay
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विस्तार
जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) की सर्वे में गोंडा, बस्ती और सोनभद्र के 20 गांवों में पीने योग्य पानी नहीं मिला है। इन जिलों में लगभग 200 सैंपल की जांच की गई, जिसमें फ्लोराइड व आर्सेनिक की मात्रा मानक से बहुत ज्यादा है। आर्सेनिक की मात्रा तो 2 से 20 गुने तक है। इस संबंध में जीएसआई उत्तर भारत क्षेत्र की टीम ने कोलकाता स्थित मुख्यालय को रिपोर्ट सौंप दी है।
निदेशक (जियोलॉजी) अभिनंदन श्रीवास्तव के नेतृत्व में पांच अधिकारियों की टीम ने तीनों जिलों में सर्वे किया था। इन जिलों में फ्लोराइड व आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने के कारण लोगों को गंभीर बीमारियां हो रही हैं। सर्वे टीम के मुताबिक दूषित पानी पीने से लोगों की दांतों में सड़न व पीलापन होना, बहरापन, चर्म रोग, जोड़ों में दर्द आदि हो रहे हैं। टीम ने इन क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन का बढ़ावा देने और उस पानी को घरेलू काम में लेने की सलाह दी है।
इन गांवों में मिला दूषित पानी
सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक सोनभद्र के झापर, सिसवा, बिछियारी और पिंडारी के पानी में फ्लोराइड तीन मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया। जबकि मानक 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर है। वहीं अन्य तीन गांव पिपरी, धौरहवा और सोनवानी में फ्लोराइड की मात्रा पांच मिलीग्राम प्रति लीटर मिली है।
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गोंडा के नवाबगंज, तरबगंज, परसापुर, हलदरमऊ और कटरा बाजार में आर्सेनिक की मात्रा मानक से 20 से 25 गुना मिली है। गोकुला, भिहानपुर कलां मंदिर और गोसाईंपुरवा में आर्सेनिक की मात्रा 250 पीपीबी मिली है। जबकि उसकी स्वीकृत मात्रा 10 पीपीबी है। इसी प्रकार बस्ती के कप्तानगंज, बहादुरपुर और कुदराहा ब्लॉक के पानी में आर्सेनिक की मात्रा तय मानक से बहुत ज्यादा है। अगौना गांव में 250 पीपीबी मिली है।
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निदेशक (जियोलॉजी) अभिनंदन श्रीवास्तव के नेतृत्व में पांच अधिकारियों की टीम ने तीनों जिलों में सर्वे किया था। इन जिलों में फ्लोराइड व आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने के कारण लोगों को गंभीर बीमारियां हो रही हैं। सर्वे टीम के मुताबिक दूषित पानी पीने से लोगों की दांतों में सड़न व पीलापन होना, बहरापन, चर्म रोग, जोड़ों में दर्द आदि हो रहे हैं। टीम ने इन क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन का बढ़ावा देने और उस पानी को घरेलू काम में लेने की सलाह दी है।
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इन गांवों में मिला दूषित पानी
सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक सोनभद्र के झापर, सिसवा, बिछियारी और पिंडारी के पानी में फ्लोराइड तीन मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया। जबकि मानक 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर है। वहीं अन्य तीन गांव पिपरी, धौरहवा और सोनवानी में फ्लोराइड की मात्रा पांच मिलीग्राम प्रति लीटर मिली है।
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गोंडा के नवाबगंज, तरबगंज, परसापुर, हलदरमऊ और कटरा बाजार में आर्सेनिक की मात्रा मानक से 20 से 25 गुना मिली है। गोकुला, भिहानपुर कलां मंदिर और गोसाईंपुरवा में आर्सेनिक की मात्रा 250 पीपीबी मिली है। जबकि उसकी स्वीकृत मात्रा 10 पीपीबी है। इसी प्रकार बस्ती के कप्तानगंज, बहादुरपुर और कुदराहा ब्लॉक के पानी में आर्सेनिक की मात्रा तय मानक से बहुत ज्यादा है। अगौना गांव में 250 पीपीबी मिली है।