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Noida News: डॉक्टर की सलाह
सार
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने महिलाओं को स्तन कैंसर की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर नियमित सेल्फ एग्जामिनेशन की सलाह दी है। समय पर जांच से बीमारी का जल्दी पता लगना और इलाज आसान बनता है।
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विस्तार
डॉक्टर की सलाह
नियमित सेल्फ एग्जामिनेशन जरूरी
स्तन कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह बीमारी स्तन की कोशिकाओं के अनियंत्रित रूप से बढ़ने के कारण होती है। आजकल व्यस्त दफ्तर दिनचर्या, बढ़ता तनाव और जागरूकता की कमी के कारण कई महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देती हैं। कुछ जीवनशैली से जुड़ी आदतें जैसे कि धूम्रपान, शराब का सेवन, मोटापा, हार्मोन प्रतिस्थापन थेरेपी, देर से शादी (30 वर्ष की उम्र के बाद) या बच्चे को स्तनपान न कराना ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
इसलिए नियमित सेल्फ एग्जामिनेशन (स्व-परीक्षण) महिलाओं के लिए अपने स्तनों की निगरानी करने का सबसे सरल और प्रभावी तरीका है। मासिक जांच के दौरान असामान्य बदलाव जैसे कि गांठ, सूजन, निप्पल से स्राव, त्वचा में गड्ढे या स्तन के आकार व रंग में बदलाव को आसानी से पहचाना जा सकता है। समय पर पहचान होने से चिकित्सकीय हस्तक्षेप आसान हो जाता है, जिससे इलाज के परिणाम बेहतर होते हैं और जटिलताएं कम की जा सकती हैं।
रोकथाम के उपाय ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसमें शराब का सेवन सीमित करना, स्वस्थ वजन बनाए रखना, तंबाकू का उपयोग न करना भी रोकथाम में योगदान देता है। सेल्फ चेक के अलावा, क्लिनिकल स्क्रीनिंग और मैमोग्राफी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, विशेष रूप से 40 से अधिक आयु की महिलाओं या जिनके परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास हो।
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डॉ. पल्लवी रेड्हू, कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट
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नियमित सेल्फ एग्जामिनेशन जरूरी
स्तन कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह बीमारी स्तन की कोशिकाओं के अनियंत्रित रूप से बढ़ने के कारण होती है। आजकल व्यस्त दफ्तर दिनचर्या, बढ़ता तनाव और जागरूकता की कमी के कारण कई महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देती हैं। कुछ जीवनशैली से जुड़ी आदतें जैसे कि धूम्रपान, शराब का सेवन, मोटापा, हार्मोन प्रतिस्थापन थेरेपी, देर से शादी (30 वर्ष की उम्र के बाद) या बच्चे को स्तनपान न कराना ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
इसलिए नियमित सेल्फ एग्जामिनेशन (स्व-परीक्षण) महिलाओं के लिए अपने स्तनों की निगरानी करने का सबसे सरल और प्रभावी तरीका है। मासिक जांच के दौरान असामान्य बदलाव जैसे कि गांठ, सूजन, निप्पल से स्राव, त्वचा में गड्ढे या स्तन के आकार व रंग में बदलाव को आसानी से पहचाना जा सकता है। समय पर पहचान होने से चिकित्सकीय हस्तक्षेप आसान हो जाता है, जिससे इलाज के परिणाम बेहतर होते हैं और जटिलताएं कम की जा सकती हैं।
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रोकथाम के उपाय ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसमें शराब का सेवन सीमित करना, स्वस्थ वजन बनाए रखना, तंबाकू का उपयोग न करना भी रोकथाम में योगदान देता है। सेल्फ चेक के अलावा, क्लिनिकल स्क्रीनिंग और मैमोग्राफी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, विशेष रूप से 40 से अधिक आयु की महिलाओं या जिनके परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास हो।
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डॉ. पल्लवी रेड्हू, कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट