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Noida News: बर्न यूनिट नर्सों के हवाले, तीन साल से प्लास्टिक सर्जन की तैनाती नहीं
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इटावा। जिले के बर्न यूनिट में तीन साल बाद भी स्थायी सर्जन की तैनाती नहीं हो सकी है। 2022 से चल रहे बर्न यूनिट अब भी नर्सों के भरोसे है। जलने और झुलसने के केस आने पर डॉक्टर ऑन कॉल रहकर ड्यूटी करते हैं। स्थायी सर्जन की तैनाती को लेकर सीएमएस की ओर से चार बार पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन अभी तक प्लास्टिक सर्जन की तैनाती नहीं हो सकी है।
डॉ. बीआर आंबेडकर संयुक्त जिला अस्पताल में करीब एक दशक से बर्न यूनिट का संचालन हो रहा है। तीन साल पहले बर्न यूनिट में प्लास्टिक सर्जन डॉ. प्रशांत मिश्रा की तैनाती थी। उनका गैरजनपद स्थानांतरण होने के बाद अभी तक प्लास्टिक सर्जन की तैनाती नहीं हो सकी है। इस दौरान बर्न यूनिट नर्सों के भरोसे संचालन होने के कारण यह शोपीस बन कर रह गया था। आग से जलने व झुलसने के मरीज आने पर सामान्य सर्जन को ऑन कॉल ड्यूटी पर बुलाकर इलाज करवाया जाता है। इस दौरान मरीज के 30 प्रतिशत से अधिक जले होने पर सैफई रेफर कर दिया जाता है। यही वजह है कि एक माह में जिला अस्पताल में गंभीर रूप से झुलसे 18 मरीजों को सैफई रेफर किया गया है।
मौके पर नदारद, कागज पर नर्स की तैनाती
बर्न यूनिट पर रोस्टर वाइज चार नर्सों की ड्यूटी लगाई गई है, लेकिन लोगों ने नर्सें मन मुताबिक ड्यूटी करने का आरोप लगाया है। तीमारदारों का कहना है कि नर्सें निरंतर ड्यूटी से गायब रहतीं हैं। हालांकि इनकी ड्यूटी कागजों पर पूरी रहतीं हैं। मजे की बात है कि सबकुछ जानकर भी स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी अनजान बने बैठे हुए हैं।
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बर्न यूनिट में दो लोगों का चल रहा इलाज
वर्तमान समय में बर्न यूनिट में दो लोगों को इलाज चल रहा है। बढ़पुरा निवासी धर्मेंद्र कुमार और पछायगांव निवासी चार साल का आशू है। इन मरीजों का नर्सों के भरोसे इलाज चल रहा है।
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डॉ. बीआर आंबेडकर संयुक्त जिला अस्पताल में करीब एक दशक से बर्न यूनिट का संचालन हो रहा है। तीन साल पहले बर्न यूनिट में प्लास्टिक सर्जन डॉ. प्रशांत मिश्रा की तैनाती थी। उनका गैरजनपद स्थानांतरण होने के बाद अभी तक प्लास्टिक सर्जन की तैनाती नहीं हो सकी है। इस दौरान बर्न यूनिट नर्सों के भरोसे संचालन होने के कारण यह शोपीस बन कर रह गया था। आग से जलने व झुलसने के मरीज आने पर सामान्य सर्जन को ऑन कॉल ड्यूटी पर बुलाकर इलाज करवाया जाता है। इस दौरान मरीज के 30 प्रतिशत से अधिक जले होने पर सैफई रेफर कर दिया जाता है। यही वजह है कि एक माह में जिला अस्पताल में गंभीर रूप से झुलसे 18 मरीजों को सैफई रेफर किया गया है।
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मौके पर नदारद, कागज पर नर्स की तैनाती
बर्न यूनिट पर रोस्टर वाइज चार नर्सों की ड्यूटी लगाई गई है, लेकिन लोगों ने नर्सें मन मुताबिक ड्यूटी करने का आरोप लगाया है। तीमारदारों का कहना है कि नर्सें निरंतर ड्यूटी से गायब रहतीं हैं। हालांकि इनकी ड्यूटी कागजों पर पूरी रहतीं हैं। मजे की बात है कि सबकुछ जानकर भी स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी अनजान बने बैठे हुए हैं।
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बर्न यूनिट में दो लोगों का चल रहा इलाज
वर्तमान समय में बर्न यूनिट में दो लोगों को इलाज चल रहा है। बढ़पुरा निवासी धर्मेंद्र कुमार और पछायगांव निवासी चार साल का आशू है। इन मरीजों का नर्सों के भरोसे इलाज चल रहा है।