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Noida News: हरियाणवी बोली को भाषा बनाने की मुहिम को बढ़ाएगा रत्नावली महोत्सव

Sun, 26 Oct 2025 01:56 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा Updated Sun, 26 Oct 2025 01:56 AM IST
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Ratnavali Festival will promote the campaign to make Haryanvi dialect a language.
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय रत्नावली के माध्यम से हरियाणवी बोली को भाषा बनाने की मुहिम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। इसकी उद्घोषणा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने की। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय हरियाणवी बोली को भाषा के रूप में स्थापित करने के लिए रत्नावली के मंच से उसको और अधिक लोकप्रिय बनाने का प्रयास किया जाएगा।
डॉ. महासिंह पूनिया ने बताया कि हरियाणवी बोली का इतिहास हजारों साल से पुराना है। वैदिक संस्कृत, व्याकरण, संस्कृत, प्राकृत, पालि, अपभ्रंश, उर्दू, फारसी, टर्किस, उज्बेक, अफगानी, मुलतानी, झंग, हिन्दी आदि भाषाओं में हरियाणवी के हजारों शब्द समाहित है। हरियाणा बोली में एक हजार से अधिक पुस्तकें लिखी गई हैं। एक हजार से अधिक विषयों पर शोध भी हुए हैं। हरियाणवी भाषा का दायरा काफी व्यापक है। पाकिस्तान के पंजाब सहित अनेक राज्यों में हरियाणवी बोली का बोलबाला है। पाकिस्तान में आज भी हरियाणवी बोली के मुशायरे आयोजित किए जाते हैं। वहां पर स्थापित नोहरा संस्था निरंतर हरियाणवी के विकास के लिए कार्य कर रही है। हरियाणवी बोली की अनेक उप-बोलियां हैं जिनमें कौरवी, बागड़ी, बांगरू, अहीरवाटी, अम्बालवी, ब्रज, मेवाती, रोहतकी आदि का प्रचलन अत्यंत लोकप्रिय है।
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संस्थान के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि रत्नावली समारोह में हरियाणवी बोली को पॉडकास्टिंग के माध्यम से जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान और अधिक लोकप्रिय बनाएगा। इसके साथ ही संस्थान के विद्यार्थी हरियाणवी में केयू न्यूज लैटर रत्नावली विशेषांक निकालकर इसको और अधिक लोकप्रिय बनाएंगे। समाचार पत्र निकालने के लिए डॉ. अभिनव एवं केयू न्यूज लैटर की पूरी टीम व 20 से अधिक मीडिया के छात्रों का दल रत्नावली के दौरान 28 से 31 अक्टूबर तक हर रोज हरियाणवी बोली में समाचार पत्र निकालकर युवाओं को हरियाणवी बोल्ली की विविध बानगियों का परिचय देगा।
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इसके साथ ही मंच संचालन हरियाणवी बोली में किया जाएगा। हरियाणा की गायन शैलियों की प्रस्तुति, लोक गायकों की रागनियां, हरियाणवी नाटक, हरियाणवी लोक परिधान, हरियाणवी रीति-रिवाज, हरियाणवी चौपाल, हरियाणवी लोक-विनोद, हरियाणवी भाषण, सांग की प्रस्तृति, हरियाणवी भजन, हरियाणवी गजल, हरियाणवी हास्य नाटिका, हरियाणवी पगड़ी आदि के माध्यम से हरियाणवी बोली को और अधिक लोकप्रिय बनाया जाएगा।
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