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एक्सईएन पीडब्ल्यूडी करेंगे 4 अफसरों के घोटाले की जांच
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एक्सईएन पीडब्ल्यूडी करेंगे 4 अफसरों के घोटाले की जांच
ग्रेटर नोएडा। जिला पंचायत में हुए घोटाले और चार अफसरों के निपटने का मामला अभी शांत नहीं हुआ है। सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने घोटाले की जांच अपने स्तर से एक्सईएन पीडब्ल्यूडी से कराने की बात कही है।
जेवर विधानसभा क्षेत्र से विधायक ठाकुर धीरेंद्र सिंह ने शासन से जिला पंचायत के विकास कार्यों में घपले की शिकायत की थी। इस पर सात सदस्यीय टीम डेढ़ माह पहले लखनऊ से आई थी। जांच में अनियमितता उजागर हुई। आरोप है कि 15 विकास कार्यों में भारी अनियमितता मिली। ठेकेदारों को लाभ देने के लिए अनुमानित लागत को बढ़ाकर एस्टीमेट बनाए गए। उनकी अनुमानित दरों पर ही ठेके दिए गए थे। जबकि इस दौरान 15 से 22 फीसदी कम अनुमानित दरों पर ठेके हो रहे थे। वहीं, विकास कार्यों में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया था और अन्य कई आरोप लगाए गए। मामले में प्रभारी अपर मुख्य अधिकारी धर्मेंद्र कुमार, अभियंता आलोक चंद्र गौड़, जूनियर इंजीनियर विनीत त्यागी और ऋतुनम को निलंबित कर दिया गया। अफसरों के कारनामों को जमीनी स्तर पर उजागर करने के लिए मुख्य विकास अधिकारी अपने स्तर से दस्तावेज की गहनता से तफ्तीश कराएंगे। सीडीओ ने जांच पीडब्ल्यूडी एक्सईएन को सौंपी है। प्रत्येक आरोपों की जांच वही करेंगे।
लखनऊ की जांच से नहीं कोई वास्ता
सीडीओ भले ही अपने स्तर से एक्सईएन पीडब्ल्यूडी से जांच करा रहे हो, लेकिन इसका वास्ता लखनऊ टीम की जांच से नहीं है। हालांकि, अफसरों ने इतना अवश्य कहा है कि गड़बड़ी में तथ्य अधिक या कम आते हैं। उससे लखनऊ टीम को अवश्य अवगत कराया जाएगा, ताकि मजबूत तरीके से कार्रवाई हो सके।
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लखनऊ की टीम की रिपोर्ट के आधार पर प्रभारी अपर मुख्य अधिकारी समेत चार अफसर निलंबित हुए थे। प्रकरण की जांच निजी स्तर से पीडब्ल्यूडी एक्सईएन से कराएंगे। उसकी भी वृहद रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
- अनिल कुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी
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ग्रेटर नोएडा। जिला पंचायत में हुए घोटाले और चार अफसरों के निपटने का मामला अभी शांत नहीं हुआ है। सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने घोटाले की जांच अपने स्तर से एक्सईएन पीडब्ल्यूडी से कराने की बात कही है।
जेवर विधानसभा क्षेत्र से विधायक ठाकुर धीरेंद्र सिंह ने शासन से जिला पंचायत के विकास कार्यों में घपले की शिकायत की थी। इस पर सात सदस्यीय टीम डेढ़ माह पहले लखनऊ से आई थी। जांच में अनियमितता उजागर हुई। आरोप है कि 15 विकास कार्यों में भारी अनियमितता मिली। ठेकेदारों को लाभ देने के लिए अनुमानित लागत को बढ़ाकर एस्टीमेट बनाए गए। उनकी अनुमानित दरों पर ही ठेके दिए गए थे। जबकि इस दौरान 15 से 22 फीसदी कम अनुमानित दरों पर ठेके हो रहे थे। वहीं, विकास कार्यों में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया था और अन्य कई आरोप लगाए गए। मामले में प्रभारी अपर मुख्य अधिकारी धर्मेंद्र कुमार, अभियंता आलोक चंद्र गौड़, जूनियर इंजीनियर विनीत त्यागी और ऋतुनम को निलंबित कर दिया गया। अफसरों के कारनामों को जमीनी स्तर पर उजागर करने के लिए मुख्य विकास अधिकारी अपने स्तर से दस्तावेज की गहनता से तफ्तीश कराएंगे। सीडीओ ने जांच पीडब्ल्यूडी एक्सईएन को सौंपी है। प्रत्येक आरोपों की जांच वही करेंगे।
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लखनऊ की जांच से नहीं कोई वास्ता
सीडीओ भले ही अपने स्तर से एक्सईएन पीडब्ल्यूडी से जांच करा रहे हो, लेकिन इसका वास्ता लखनऊ टीम की जांच से नहीं है। हालांकि, अफसरों ने इतना अवश्य कहा है कि गड़बड़ी में तथ्य अधिक या कम आते हैं। उससे लखनऊ टीम को अवश्य अवगत कराया जाएगा, ताकि मजबूत तरीके से कार्रवाई हो सके।
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लखनऊ की टीम की रिपोर्ट के आधार पर प्रभारी अपर मुख्य अधिकारी समेत चार अफसर निलंबित हुए थे। प्रकरण की जांच निजी स्तर से पीडब्ल्यूडी एक्सईएन से कराएंगे। उसकी भी वृहद रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
- अनिल कुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी